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  • कर्नाटक चुनाव, कर्नाटक में राहुल गांधी की गलतियां, Rahul Gandhi Mistakes In Karnataka Assembly Elections 2018

कर्नाटक चुनाव में राहुल ने की 5 गलतियां, 'हाथ' से निकल गया कर्नाटक

3 वर्ष पहले
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बेंगलुरु. दक्षिण में कांग्रेस का आखिरी किला भी ढह गया। कांग्रेस कर्नाटक हार गई। कांग्रेस 77-78 सीटों पर सिमटती दिख रही है। हो सकता है कि कांग्रेस जेडीएस के साथ मिलकर सरकार बना ले, लेकिन कर्नाटक में उसकी हार हुई है इससे कोई इनकार नहीं कर सकता। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर राहुल गांधी ने वो कौन सी गलतियां कीं जिसके कारण कांग्रेस की कर्नाटक में ये बुरी गत हुई।

 

गलती नंबर 1:सिद्धारमैया को सीएम उम्मीदवार बनाना
कांग्रेस की सिद्धारमैया सरकार से जनता नाखुश थी। सरकार विरोधी माहौल था। इसका सबूत ये है कि सिद्धारमैया ने दो-दो सीटों से चुनाव लड़ने का फैसला किया। यानी उन्हें अपनी जीत का पक्का भरोसा नहीं था। उनकी ऐहतियात सही भी साबित हुई क्योंकि सिद्धारमैया  चामुंडेश्वरी सीट से चुनाव हार गए..उन्हें सिर्फ बादामी सीट से जीत मिली। हो सकता है अगर कांग्रेस यहां से किसी और को सीएम उम्मीदवार बनाती तो आज नतीजे कुछ और होते। 

 

गलती नंबर 2:जेडीएस और बीएसपी जैसे दलों से समझौता नहीं
देश में अक्सर थर्ड फ्रंड की बातचीत होती रहती है। सोनिया अपने घर में पूरे विपक्ष को बुलाकर डिनर पार्टी भी करती हैं। तो फिर कर्नाटक चुनाव में गठबंधन से परहेज क्यों? क्या कांग्रेस ने ओवरकॉन्फिडेंस में किसी से गठबंधन नहीं किया। अगर ऐसा है तो ये पार्टी की बड़ी भूल साबित हुई। अगर पार्टी जेडीएस के साथ मिलकर चुनाव लड़ती तो जो नतीजे आए हैं उसके हिसाब से आराम से सरकार बना सकती थी। जेडीएस से समझौता होता तो बीएसपी भी साथ आ जाती। क्योंकि कर्नाटक में जेडीएस और बीएसपी में गठबंधन है। 

 

गलती नंबर 3:लिंगायत का दांव उल्टा पड़ा
राहुल की पार्टी ने कर्नाटक में लिंगायत को अलग धर्म का दर्जा देने का प्रस्ताव पास कराया। राज्य में लिंगायतों की तादाद 17 फीसदी है लेकिन सरकार ने जो सर्वे कराया उसमें लिंगायतों को 9 फीसदी बताया। इसी बिना पर लिंगायत को अलग धर्म और अल्पसंख्यक बनाने की कोशिश की गई। इसमें समीकरण ये था कि अगर ये अल्पसंख्यक घोषित हो गए तो आरक्षण मिलेगा। ये बात समझते ही वोक्कालिगा समेत दूसरी जातियों को अपना हक मरता दिखा और वो कांग्रेस के खिलाफ हो गये। इधऱ लिंगायत पारंपरिक तौर पर बीजेपी को वोट देते आए हैं। खुद बीजेपी के सीएम पद के उम्मीदवार येदियुरप्पा लिंगायत समुदाय से आते हैं। तो लिंगायतों ने भी बीजेपी का पूरी तरह साथ नहीं छोड़ा। कोई ताज्जुब नहीं कि लिंगायत बहुल 70 सीटों में से 45 सीटों पर बीजेपी की जीत हुई है

 

गलती नंबर 4:राहुल का मंदिर-मठ दर्शन
गुजरात से लेकर कर्नाटक तक राहुल ने अपने हिंदू इमेज को आगे करने की कोशिश की। वो मंदिर-मंदिर गए। कई मठों का दौरा किया। चुनाव प्रचार के दिनों में ही कहा कि वो चुनाव के बाद कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर जाना चाहते हैं। जाहिर ये सारे पैंतरे हिंदू वोटों को अपनी ओर करने की कोशिश थी। इससे कांग्रेस को कितने हिंदू वोट मिले ये तो कह नहीं सकते लेकिन हो सकता है कि हिंदुओं को खुश करने की कोशिश में लगी कांग्रेस को देख कर उसके पारंपरिक वोट कट गए हों..क्योंकि जो नतीजे आए हैं वो बताते हैं कि कर्नाटक के मुस्लिम बहुल 13 सीटों में से कांग्रेस को सिर्फ 7 सीटें मिलीं..जो कि पिछले चुनाव से एक कम है। 


गलती नंबर 5:पीएम बनने को तैयार लेकिन अभी देश का इनकार
राहुल गांधी ने एक चुनावी रैली में कहा कि मैं पीएम क्यों नहीं बन सकता। ये बात शायद उन्हें नहीं कहनी चाहिए थी। पूरी चुनाव प्रचार के दौरान राहुल की छवि साकारात्मक थी। जब मोदी ने कहा कि आप बिना कागज का टुकड़ा लिये 15 मिनट बोल के दिखाइए तो राहुल ने जवाब दिया कि आप मुझपर कितने भी पर्सनल अटैक करें लेकिन मैं बुरा नहीं मानूंगा, सवाल पूछता रहूंगा। लेकिन प्रधानमंत्री बनने की अपनी इच्छा जाहिर कर राहुल ने हड़बड़ी कर दी। कही न कहीं इसे जनता ने दंभ के दौर पर देखा।