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राहुल दलितों में पैठ बनाने के लिए देशभर में शुरू करेंगे संविधान बचाओ अभियान, 23 अप्रैल को लॉन्चिंग

3 वर्ष पहले
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नई दिल्ली.   कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी दलितों में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए देश भर में संविधान बचाओ अभियान शुरू करेंगे। राहुल इसकी शुरुआत 23 अप्रैल को दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम से करेंगे। उनके इस अभियान में कांग्रेस के मौजूदा और पूर्व दलित सांसद-विधायक, जिला परिषदों, नगर निकायों और पंचायती राज संस्थाओं के पदाधिकारी मौजूद रहेंगे। 

 

 

पूरे देश में पहुंचाएंगे कांग्रेस का संदेश
- कांग्रेस के अनुसूचित जाति विभाग के अध्यक्ष और कार्यक्रम के आयोजक नितिन राउत ने बताया कि इस अभियान में शामिल होने वाले पार्टी नेता और कार्यकर्ता जनता को दलितों के मौजूदा हालातों से अवगत कराएंगे। 

- इसमें कांग्रेस के पदाधिकारियों के अलावा क्षेत्रीय इकाइयों, युवाओं और महिला दल भी शामिल होेंगे। दिल्ली के बाद अन्य राज्यों में दलितों के बीच पहुंचने के लिए ऐसे अभियान शुरू किए जाएंगे। 

 

कांग्रेस बोली-  भाजपा से संविधान को खतरा
- राउत ने कहा कि मौजूदा केंद्र सरकार में संविधान खतरे में आ गया है। दलितों को पढ़ाई और नौकरी से दूर किया जा रहा है। दलितों में विभिन्न मुद्दों को लेकर सरकार के लिए गुस्सा है। 
- राउत ने कहा कि मोदी सरकार में दलितों पर हमले बढ़ गए हैं। कांग्रेस सरकार आते ही ये सारी दिक्कतें दूर हो जाएंगी। 

 

एससी-एसटी एक्ट में बदलाव के लिए सरकार को बताया था जिम्मेदार
- कांग्रेस ने हाल ही में एससी-एसटी एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा किए गए बदलाव के लिए सरकार कोे जिम्मेदार ठहरा रही है। 2 मार्च को दलित संगठनों ने भारत बंद बुलाया था। जिसका कांग्रेस ने समर्थन किया था। 


मोदी ने कांग्रेस को अंबेडकर विरोधी बताया था
- मोदी ने शुक्रवार को डॉ. अंबेडकर मेमोरियल के इनॉगरेशन पर कांग्रेस को बाबा साहब का विरोधी बताया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने अंबेडकर का नाम इतिहास से हटाने की कोशिश की। इतना ही नहीं उन्हें नेहरू की कैबिनेट से इस्तीफा देना पड़ा था।
-  मोदी ने कहा कि 1972 में अंबेडकर मेमोरियल का विचार सामने आया था, लेकिन दूसरी सरकार ने इस प्रोजेक्ट की फाइलें दबा दीं। 
- मोदी ने कहा,  "सच्चाई ये है कि बाबा साहेब के निधन के बाद कांग्रेस ने राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान को भी मिटाने की कोशिश की। नेहरू जी से लेकर राजीव गांधी तक, कांग्रेस ने तमाम लोगों को भारत रत्न से सम्मानित किया, लेकिन उसे कभी बाबा साहेब ‘भारत के रत्न’ के लिए योग्य नहीं लगे। बाबासाहब को भारत रत्न तब मिला जब बीजेपी के समर्थन से वीपी सिंह की सरकार सत्ता में आई थी।"

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