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नशा छुड़ाओ केंद्र पर पड़ा छापा तो रोगी बोले- यहां हमारे साथ जानवरों से बदत्तर व्यवहार होता है

3 वर्ष पहले
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गुरदासपुर. कलानौर रोड पर स्थित नवजीवन नशा छुड़ाओ केंद्र पर अचानक सिविल जज सीनियर डिविजन कम सचिव जिला कानूनी सेवाएं अथॉरिटी राणा कंवरदीप कौर ने चैकिंग की। इस दौरान पाया गया कि वहां भर्ती रोगियों को कमरों में बंद कर बाहर ताले लगे हुए थे। इसके साथ चैकिंग में एक के बाद एक कई कमियां साफ नजर आने लगीं। केंद्र में भर्ती रोगियों से जब उन्होंने बातचीत की तो पता चला कि 1 रोगी को भर्ती करने के लिए 25 हजार रुपए लिए जाते हैं जबकि रसीद सिर्फ 8 हजार रुपए की दी जाती है। इसके अलावा सुविधा के नाम पर कोई ऐसी चीज नहीं मिली जिससे लगे कि रोगी वहां रहना चाहते हों।


उक्त केंद्र 12 साल से चल रहा था और स्वास्थ्य विभाग की टीम की कभी भी यहां भर्ती रोगियों की हालत की भनक नहीं लगना अपने आप में कई सवाल खड़े करता है। हालांकि केंद्र के संचालक ने खुद माना कि इस केंद्र में भर्ती रोगियों को वही डाॅक्टर चैक करने आता है जोकि सिविल अस्पताल के नशा छुड़ाओ केंद्र में तैनात है। वहीं, केंद्र में भर्ती रोगियों में डर इतना था कि वहां से छूटने के बाद भी वो यही कहते रहे कि कहीं दोबारा हमें इस कैदखाने में तो नहीं लाएंगे।

 

16 रोगी छुड़वाए

 

नशा छुड़ाओ केंद्र में भर्ती 16 रोगियों ने सेहत विभाग को हस्ताक्षर करके मांग की कि उन्हें इस केंद्र से छुटाकार दिलायाए। इस पर सेहत विभाग ने 16 में से 14 रोगियों को गुरदासपुर के सरकारी अस्पताल में बने नशा छुड़ाओ केंद्र में शिफ्ट कर दिया। बाकी रोगियों को उनके परिजन अपने साथ घर ले गए हैं। रोगियों की सुरक्षा का जिम्मा थाना सदर के प्रभारी राजिन्दर कुमार को सौंपा। 

 

सुविधा के नाम पर कुछ नहीं मिला

 

जांच के दौरान केंद्र में सुविधा के नाम पर कोई चीज नहीं मिली। जहां रोगियों को सुलाया जाता था था वहां पर इतनी बदबू थी कि वहां खड़ा नहीं हुआ जा रहा था। यही नहीं बीमार होने पर दवाई के नाम पर राजमाह पानी के साथ देते। ज्यादा बात करने पर उससे बुरी तरह पीटा जाता। 

 

साल में एक बार चैकिंग करते हैं, सब सही मिलता है

 

जज कंवरदीप कौर ने 2 घंटे चैकिंग करने के बाद रोगियों के बयान अपने रीडर से कलमबंद करवाए व उसके बाद सिविल सर्जन डॉ.किशन चन्द व एसएमओ डॉ.विजय कुमार मौके पर पहुंचे। जब जज ने उन्हें केंद्र में सुविधाओं की जानकारी होने संबंधी पूछा तो उन्होंने यह कहते हुए पल्ला झाड़ लिया कि साल में 1 बार चैकिंग की जाती है जिसमें डीसी कार्यालय, सेहत विभाग व 1 मनोचिकित्सक की टीम शामिल होती है। चैकिंग के दौरान यहां सब सही मिलता रहा है जिसके चलते किसी तरह की कोई परेशानी नहीं आई।  

 

सरताज सिंह करता था रोगियों से मारपीट

 

सिविल जज ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि वे सभी रोगियों से एक-एक करके मिलीं। जांच में सामने आया है कि न तो कोई डॉक्टर वहां रोगियों को चैक करने आता है और न ही यहां कोई मेडिकल की सुविधा है। रोगियों ने बताया कि केंद्र में एक सरताज सिंह नाम का व्यक्ति है जोकि उनसे अक्सर मारपीट करता है।

 

मालिक खुद करता है नशा


रोगियों ने बताया कि अगर किसी को ज्यादा नशा करने की तलब लगती थी तो केंद्र का मालिक मोहन सिंह उससे 3 घंटे अपनी टांगें दबाने के लिए कहता था तथा उसके बाद उसे चबाने के लिए तंबाकू देता था। जबकि वो खुद नशा करने का आदी है।

 

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