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800 साल पहले भय से मुहम्मद गौरी ने इस मंदिर को मस्जिद में तब्दील करवाया

अढाई दिन का झोपड़ा ख़्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती दरगाह से आगे कुछ ही दूरी पर स्थित है।

Dainik Bhaskar

Nov 25, 2014, 12:07 AM IST
800 साल पहले भय से मुहम्मद गौरी ने इस मंदिर को मस्जिद में तब्दील करवाया
19 नवंबर से लेकर 25 नवंबर तक वर्ल्ड हेरिटेज वीक मनाया जा रहा है। इस मौके पर dainikbhaskar.com उन धरोहरों के बारें में बता रहा है जिनकी महत्वता ने उनका नाम इतिहास में दर्ज करा दिया। भारत में ऐसे कई किले, उद्यान और जगह है जिन्हें विश्व विरासत में जगह मिली है। वहीं, कुछ ऐसे भी हैं जो इस सूची में शामिल होने की क्षमता रखते हैं। आज की कड़ी में हम आपको एक ऐसी ही धरोहर के बारे में बताएंगे जो कि एक ऐतिहासिक पर्यटन स्थल है।
अजमेर। 800 साल पहले राजस्थान के अजमेर में एक मंदिर को मस्जिद में तब्दील कर दिया गया था। खास बात यह रही कि इसे मंदिर से मस्जिद बनाने में सिर्फ अढाई दिन का समय लगा और तभी से इसका नाम अढाई दिन का झोपड़ा पड़ गया। कुछ का मानना है कि यहां हर साल ढाई दिन का मेला लगता है इसीलिए इसे अढाई दिन का झोपड़ा कहते हैं। यह ख़्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती दरगाह से आगे कुछ ही दूरी पर स्थित है।
आखिर मंदिर को मस्जिद में क्यों किया तब्दील
11वीं सदी के अंतिम दशक में मुहम्मद गोरी ने तराई के युद्ध में महाराजा पृथ्वीराज चौहान को परास्त कर दिया और उसकी फौजों ने अजमेर में प्रवेश के लिए कूच किया तो गोरी ने वहां नमाज अदा करने के लिए मस्जिद बनाने की इच्छा प्रकट की और इसके लिए 60 घंटे का समय दिया। तब इस मंदिर को ढाई दिन में मस्जिद बना दिया। इस तरह इसका नाम अढाई दिन का झोपड़ा पड़ा। इसका स्थापत्य हिन्दू व जैन मन्दिरों के अवशेषों से तैयार है।
आगे की स्लाइड्स में देखें अढाई दिन का झोपड़ा की और भी तस्वीरें...
800 साल पहले भय से मुहम्मद गौरी ने इस मंदिर को मस्जिद में तब्दील करवाया
अढाई दिन का झोपड़ा
 
आर्कषण का केन्द्र हैं मूर्तियों की आकृतियां
 
इस इमारत में 7 मेहराब एवं हिंदू-मुस्लिम कारीगिरी के 70 खंबे बने हैं तथा छत पर भी शानदार कारीगिरी की गई है। स्तंभों की ऊंचाई लगभग 25 फीट है और उनमें लगभग 20 फीट की ऊंचाई तक अति सुंदर नक्काशी का काम है। जिसमें अत्यंत सुंदर नमूने बने हुए हैं जिनके ऊपर चित्ताकर्षक आकृतियां भी हैं। यह एक अस्वाभाविक बात है कि उनमें कोई भी ऐसी आकृति नहीं है जिसका सर न काटा गया हो। यहां सुंदर नक्काशीदार दरवाजा लगाया गया। इसका श्रेष्ठ वर्णन फ्यूहरर द्वारा पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग की 1893 की वार्षिक रपट में इन शब्दों में किया गया है - "समूचे बहिर्मार्ग में इतनी महीन और कोमल नक्काशी की जाली तराशी गई है कि उसकी तुलना महीन जालीदार कपड़े से की जा सकती है।'
800 साल पहले भय से मुहम्मद गौरी ने इस मंदिर को मस्जिद में तब्दील करवाया
अजमेर में पुष्कर और ख्वाजा शरीफ की दरगाह विश्व प्रसिद्ध हैं और यहां दुनिया भर से पर्यटक आते हैं। इसके बावजूद यह अढाई दिन का झोपड़ा लोगों का ध्यान आकर्षित करता है। यह पर्यटकों के लिए एक अच्छा पर्यटन स्थल है।
800 साल पहले भय से मुहम्मद गौरी ने इस मंदिर को मस्जिद में तब्दील करवाया
अढाई दिन का झोपड़ा के अंदर की नक्काशी
800 साल पहले भय से मुहम्मद गौरी ने इस मंदिर को मस्जिद में तब्दील करवाया
आगे की स्लाइड में देखें अढाई दिन का झोपड़ा की और तस्वीर
800 साल पहले भय से मुहम्मद गौरी ने इस मंदिर को मस्जिद में तब्दील करवाया
800 साल पहले भय से मुहम्मद गौरी ने इस मंदिर को मस्जिद में तब्दील करवाया
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