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डाउनलोड करेंभीलवाड़ा. उदयपुर में हुई राजस्थान-मध्यप्रदेश केसरी, कुमार, किशोर, कुमारी व बसंत दंगल में भीलवाड़ा के पहलवानों का दबदबा रहा। भीलवाड़ा के पहलवानों ने पांच में से तीन खिताब अपने नाम किए। दिलचस्प बात यह है कि इन तीनों मुकाबलों में भीलवाड़ा के पहलवानों का यहीं के पहलवानों से मुकाबला हुआ। यानी फाइनल में दोनों पहलवान भीलवाड़ा जिले के ही थे। पुर के निर्मल विश्नोई ने पुर के ही सुनील विश्नोई को हराकर किशोर का खिताब जीता। भीलवाड़ा के लादूलाल जाट ने भीलवाड़ा के ही बबलू गुर्जर को हराकर कुमार और मनीषा माली ने अपनी दोस्त और यहीं की अंजली साहू को हराकर कुमारी का खिताब अपने नाम किया।
राजस्थान-एमपी कुमार- लादू जाट
दंगल में कुमार का खिताब जीतने वाले गठीलाखेड़ा निवासी 23 वर्षीय लादू जाट के संघर्ष और जीत की कहानी दिलचस्प है। बचपन से कुश्ती का शौक रखने वाले लादू सर्दी, गर्मी हो या बरसात सुबह चार बजे साइकिल से भीलवाड़ा की लवकुश व्यायामशाला में अभ्यास के लिए आते थे। उनके भाई भी कुश्ती से जुड़े रहे हैं, लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने से उन्हें बीच में पढ़ाई व कुश्ती छोड़नी पड़ी। लादू के भी कुश्ती छोड़ने की नौबत आई तो भाइयों ने हौसला बढ़ाया। भाइयों को ग्रामीणों के ताने भी सुनने पड़े कि भाई को काम धंधा करवाओ कुश्ती में कुछ नहीं रखा, क्यों हाथ पैर तुड़वा रहे हो? इसके बावजूद भाई पीछे नहीं हटे।
जाट ने यह खिताब भीलवाड़ा के बबलू गुर्जर को हराकर जीता। इससे पहले बबलू से लादू छह मुकाबलों में हार चुके थे। कुछ दिन पहले लादू ने तय किया कि जब तक बबलू को हरा नहीं देगा शादी नहीं करेगा। रविवार को उदयपुर में ये खिताब जीतने के बाद सोमवार को लादू की शादी की तारीख भी तय हो गई। वे कुमार का खिताब जीतने का श्रेय कोच रामनिवास गुर्जर को देते हैं। लव-कुश व्यायामशाला के लादू ने दो साल रोहतक स्थित मेहर सिंह अखाड़े में प्रशिक्षण लिया।
12 में 3 अखाड़ों में ही है मेट, इसलिए कुश्ती एकेडमी खोलने की जरूरत
यहां अखाड़ों में रोज अभ्यास करने वालों में गजब की फुर्ती है। इसी कारण तो देशभर में भीलवाड़ा का नाम है। लेकिन यह सब अखाड़ों के स्तर से ही हो रहा है। इसमें सरकार का कोई सहयोग नहीं है। अभी तो 12 में से केवल तीन अखाड़ों में ही मेट की व्यवस्था है। भीलवाड़ा के पहलवानों ने जिस तरह देश में नाम कमाया उसके लिए तो यहां एकेडमी खुलनी चाहिए। अच्छे पहलवानों को इसमें जाने का अवसर मिले और इनका खर्च सरकार उठाए। मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि यहां से इंडिया के लिए खेलने वाले पहलवान तैयार होंगे। - तेजेंद्र गुर्जर, पूर्व अध्यक्ष, राजस्थान कुश्ती संघ
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