चिंतपूर्णी मंदिर में हुअा ब्रह्मचारिणी रूप का श्रृंगार

Alwar News - नवरात्रि के दूसरे दिन गुरुवार काे देवी के दूसरे रूप ब्रह्मचारिणी की विधि विधान से पूजा की गई। ब्रह्मचारिणी माता...

Mar 27, 2020, 06:35 AM IST
Alwar News - rajasthan news brahmacharini form decorated in chintpurni temple

नवरात्रि के दूसरे दिन गुरुवार काे देवी के दूसरे रूप ब्रह्मचारिणी की विधि विधान से पूजा की गई। ब्रह्मचारिणी माता की उपासना करने से तप, त्याग, सदाचार व संयम में वृद्धि होती है। नवरात्रि के तीसरे दिन शुक्रवार काे देवी के तीसरे स्वरूप चंद्रघटा की पूजा अर्चना की जाएगी।

बस स्टैंड स्थित चिंतपूर्णी मंदिर में ब्रह्मचारिणी रूप का श्रृंगार किया गया। मंदिर के पुजारी दिनेश शर्मा ने बताया कि सुबह व शाम को अारती हुई व दुर्गा सप्तशती का पाठ हुअा। जवाहर नगर दिल्ली राेड स्थित शक्ति पावन धाम चैरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष रमण देवड़ा ने बताया कि काेराेना वायरस के चलते इस बार चैत्र नवरात्र पर मंदिर में अायाेजित हाेने कार्यक्रम स्थगित कर दिए गए हैं। सुबह व शाम अारती हाे रही है। मंदिर श्रद्धालुअाें के लिए बंद है। श्रद्धालु मुख्य द्वार के ऊपर लगी मां दुर्गा की प्रतिमा के दर्शन कर लाैट रहे हैं।

करणी माता मंदिर जाने के लिए गुरुवार काे भी करीब 10 श्रद्धालु पहुंचे लेकिन प्रतापबंध के पास स्थित वन विभाग की चाैकी पर तैनात वन विभाग के कर्मचारियाें अाैर पुलिसकर्मियाें ने उन्हें अागे नहीं जाने दिया। सागर ऊपर स्थित मंसा माता मंदिर के पुजारी नवर| शर्मा ने बताया कि काेराेना वायरस के संक्रमण से बचाव के लिए मंदिर का मुख्य गेट श्रद्धालुअाें के लिए बंद है। इसकी सूचना भी चस्पा की गई है। कई श्रद्धालु बिना दर्शन किए ही लाैट गए।

तीसरे दिन अाज भास्कर में करें मां चंद्रघंटा के दर्शन

मां दुर्गा के तीसरे रूप का नाम चंद्रघंटा है। नवरात्रि के तीसरे दिन देवी के इस स्वरूप का पूजन किया जाता है। असुरों के विनाश के लिए मां दुर्गा से देवी चंद्रघंटा प्रकट हुई। देवी चंद्रघंटा ने भयंकर दैत्य सेनाओं का संहार करके देवताओं को उनका भाग दिलवाया।

देवी चंद्रघंटा पीड़ा का नाश करने वाली बताई गई हैं। देवी चंद्रघंटा का शरीर सोने के समान कांतिवान है। इनके माथे पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र है, इसीलिए इन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है।

उनकी दस भुजाएं हैं और दसों भुजाओं में अस्त्र-शस्त्र हैं। देवी के हाथों में कमल, धनुष-बाण, कमंडल, तलवार, त्रिशूल और गदा जैसे अस्त्र धारण किए हुए हैं। इनके कंठ में सफेद पुष्प की माला और र|जड़ित मुकुट शीर्ष पर विराजमान है। देवी चंद्रघंटा भक्तों को अभय देने वाली तथा परम कल्याणकारी हैं। इनके रूप और गुणों के अनुसार आज इनकी पूजा की जाएगी। माता देवी चंद्रघंटा की कृपा से पराक्रम बढ़ता है।

देवी चंद्रघंटा का मंत्र: पिण्डजप्रवरारूढा चण्डकोपास्त्रकैर्युता। प्रसादं तनुते मह्यं चंद्रघण्टेति विश्रुता।।

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