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लॉकडाउन का असर: घर जाने के लिए निकले कई लोग फंसे, समाजसेवियों ने की मदद, प्रशासन ने पहुंचाया घर तक

Sirohi News - पूरे देश में हुए लॉक डाउन का असर अब नजर आने लगा है। जिले के पड़ौसी राज्य से प्रवासी अपने घरों को जाने के लिए निकले,...

Mar 27, 2020, 09:50 AM IST
Sirohi News - rajasthan news effect of lockdown many people left to go home trapped help from social workers administration reached home

पूरे देश में हुए लॉक डाउन का असर अब नजर आने लगा है। जिले के पड़ौसी राज्य से प्रवासी अपने घरों को जाने के लिए निकले, लेकिन वे संसाधान नहीं मिलने और रुपए भी पर्याप्त नहीं होने से कई जगहों पर लोग फंस गए। लेकिन इस संकट के समय जिले के लोगों ने मानवता दिखाई और सिरोही, रेवदर और रोहिड़ा में फंसे ऐसे ही कई लोगों के रुकने के साथ खाने-पीने की व्यवस्था की। इतना ही नहीं प्रशासन से मदद लेकर उन्हें उनके घरों तक जाने की भी व्यवस्था करवाई। जिले में ऐसे फंसे प्रवासियों की तीन कहानियां सामने आई, जिसमें समाजसेवियों और प्रशासनिक अधिकारियों ने मानवता के नाते लोगों को उनके घर तक भिजवाने के साथ खाने-पीने की भी व्यवस्था की। इस बीच जिले में ऐसी तीन कहानियां सामने आई, जिसमें लॉकडाउन में फंसे लोगों को कैसे हमारे जिले के लोगों और प्रशासन ने ठहरने की सुविधा उपलब्ध करवाई, खाने-पीने की व्यवस्था की और उन्हें घर तक पहुंचा। इस पर ऐसे परेशान लोगों ने लोगों और प्रशासन के अधिकारियों को धन्यवाद भी दिया। इसमें सिरोही में अहमदाबाद से आए 6 युवकों को प्रशासन ने घर पहुंचाया। रेवदर में समाज सेवियों ने दो दिन तक 51 लोगों के रुकने व खाने की व्यवस्था की, तो रोहिड़ा में रात 11 बजे पहुंचे 9 मजदूरों को स्कूल में ठहराया और खाने-पीने की व्यवस्था की।

बाड़मेर से खेरवाड़ा पैदल जा रहे 9 मजदूरों को स्कूल में रुकवाया

रोहिड़ा | लॉक डाउन को लेकर वाहनों की सुविधा नहीं मिलने के कारण बाड़मेर से खेरवाड़ा उदयपुर के लिए पैदल ही रवाना हुए 9 मजदूर बुधवार रात रोहिड़ा पहुंचने पर आरआई ने उन्हें राजकीय स्कूल में ठहराया और उनके खाने-पीने की व्यवस्था की। आरआई सरुपगंज जेठमल सेन एवं पंचायत कर्मी मुकेश कुमार सिंघल ने बताया कि बाडमेर से पहुंचे मजदूर रात करीब 11 बजे रोहिड़ा पहुंचे, जिन्हें स्कूल में रात्रि विश्रम करवाया और उनके खाने की भी व्यवस्था की। खेरवाड़ा निवासी डायालाल पुत्र शांतिलाल मीणा ने बताया कि वे मजदूरी के लिए बाड़मेर में रहते है, लेकिन लॉक डाउन के कारण अपने गांव खेरवाड़ा जा रहे थे। डायालाल ने बताया कि उसके साथ ललित कुमार, शंभू, प्रवीण, नवीन, विनोद, जगदीश, विकास एवं माया देवी प|ी विकास मीणा भी साथ थे।

गुजरात से आए उत्तरप्रदेश के 51 लोग, रुपए खत्म हाेने पर की मजदूरी, रेवदर में की खाने-पीने की व्यवस्था

दो दिन से भूखे अहमदाबाद से सिरोही पहुंचे छह युवकों को तहसीलदार ने खाना खिलाकर घर पहुंचाया

रेवदर | लॉक डाउन के कारण घर गुजरात से युपी अपने घर जा रहे करीब 51 लोग रेवदर में फंस गए। इसकी सूचना सरपंच अजबराम चौधरी को मिलने पर उन्होंने सभी को कस्बे से दो किलोमीटर दूर धोलकिया हनुमान मंदिर परिसर में बने एक हॉल में रुकवाया तथा सभी के खाने पीने की व्यवस्था मां आशापुरा सेवा संस्थान ने की। अकबरपुर जिला फिरोजावास उत्तर प्रदेश निवासी संतोष कुमार ने बताया कि वे सभी लोग गुजरात के कच्छ भूंज में एक फार्म पर अनार भरने का कार्य करते थे। बाजार बंद होने के कारण फार्म मालिक ने एक ट्रक किराए पर किया, जो उन्हें आगरा उत्तर प्रदेश छोडऩे वाला था। लेकिन उसने राजस्थान के मंडार बोर्डर पर उन्हें प्रवेश की अनुमति नहीं दी और पुलिस ने ट्रक जब्त कर दिया। इसके बाद जैसे-तैसे ट्रक को छुडवाया, लेकिन ट्रक वापस गुजरात रवाना हो गया। ऐसे में पैदल चलकर रेवदर की और आ रहे थे। इस बीच एक किसान ने होटल पर बुलाया और खेत मे खड़ी गेंहू की फसल को काटने के बदले खाना दिया। इसके बाद रेवदर में आए तो सरपंच व आशापुरा सेवा संस्थान के लोगों ने ठहरने और खाने-पीने की व्यवस्था की और प्रशासन की मदद से सरकारी बस से आगरा के लिए रवाना किया।


सिरोही | मुंबई के ईस्ट मलाड में नौकरी कर रहे जालोर के 6 युवक लॉक डाउन के कारण टैक्सी से अहमदाबाद पहुंचे, लेकिन वहां से घर तक जाने के लिए कोई साधन नहीं होने से वे पैदल ही सिरोही से होते हुए जालोर के आकोली व बागरा के लिए रवाना हो गए। इस दौरान हिम्मतनगर से एक ट्रक में सवार हो गए, जिसने उन्हें उदयपुर पहुंचा दिया। यहां से भी एक ट्रक में सिरोही के लिए रवाना हुए, जिसमें उन्हें शहर के बायपास पर उतार दिया। यहां सभी 6 युवक बागरा निवासी महिपाल चौहान, आकाश राणा, आकोली निवासी रुपसिंंह राठौड़ व मनोहरसिंह राठौड, जावाल निवासी प्रवीण देवड़ा और देलदरी निवासी ताराराम शहर में आए। शहर के कलेक्ट्रेट तिराहे पर उन्हें तहसीलदार प्रवीण रतनू मिले, तो उन्होंने पूरी कहानी बताई। इस पर तहसीलदार ने उनकी अस्पताल लाकर जांंच करवाई तथा सरकेएम स्कूल के पास रुकवा उन्हें भोजन करवाया। इसके बाद उन्होंने एक कार से इन युवकों को घर के लिए रवाना किया।

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