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प्रदेश में पहली बार ट्रांसजेंडर्स का फुटबाल मैच... 11वीं के छात्र अर्जुन ने इनके लिए बनाया ‘स्काउट मी’ ऐप, 32 हजार रजिस्टर्ड

Jaipur News - थर्ड जेंडर को संविधान में बराबरी का हक तो है, लेकिन आज भी समाज इन्हें भेदभाव की नजर से देखता है। ट्रांस जेंडर...

Dec 01, 2019, 08:46 AM IST
थर्ड जेंडर को संविधान में बराबरी का हक तो है, लेकिन आज भी समाज इन्हें भेदभाव की नजर से देखता है। ट्रांस जेंडर प्लेयर्स को मुख्यधारा में लाने के लिए प्रदेश में पहली बार ट्रांस फुटबॉल एग्जीबिशन मैच खेला गया। शनिवार को महापुरा स्थित जेपीअाईएस में यह मैच केशव सूरी फाउंडेशन (केएसएफ), स्काउट मी एप अाैर राजस्थान फुटबॉल एसोसिएशन के साथ मिलकर आयोजित किया गया।

Level Playing field

सिटी रिपोर्टर . जयपुर

मोबाइल एप पर मिली ट्रांसजेंडर प्लेयर्स की 32 हजार एंट्रीज

‘स्काउट मी’ एप के को-फाउंडर अर्जुन पांडे जयश्री पेड़ीवाल स्कूल में 11वीं क्लास के स्टूडेंट हैं। उन्हाेंने अपने भाई कुश पांडे के साथ मिलकर ट्रांसजेंडर प्लेयर्स के लिए यह एप तैयार किया है। अर्जुन ने बताया, राजस्थान टीम के लिए स्टेट लेवल पर कई बार मैच खेले हैं। जब भी ऑडिशन के लिए फॉर्म भरते हैं तो उसमें पार्टिसिपेंट्स के लिए मेल और फीमेल के अलावा अन्य कैटेगरी तो होती है, लेकिन ट्रांस जेंडर कभी बड़े लेवल पर नहीं खेल पाए। इन्हें भी मुख्य धारा से जोड़ने के लिए दो साल पहले ‘स्काउट मी’ मोबाइल एप के की शुरूआत की थी। अब तक इससे 32 हजार से ज्यादा प्लेयर्स जुड़ चुके हैं। मुझे बचपन से फुटबॉल पसंद था इस लिए अभी तक फुटबॉल प्लेयर्स की ही एंट्री मंगवाई है। जल्द ही बास्केटबॉल को भी शामिल करेंगे। कुछ सालों में सभी एक्टिविटीज इसमें शामिल की जाएंगी।

आरएफए ने भी किया सपोर्ट

राजस्थान फुटबॉल एसोसिएशन (आरएफए) के प्रेसीडेंट मानवेंद्र सिंह ने बताया, ट्रांसजेंडर प्लेयर्स के प्रति आरएफए का पूरा सहयोग रहेगा। फीफा के आदेश अनुसार खेल में भेदभाव नहीं होना चाहिए। राजस्थान के लिए यह गौरव की बात है कि इसकी शुरूआत यहां से हो रही है। वहीं राजस्थान में गर्ल्स फुटबॉल को भी बढ़ावा देना होगा। 10 साल पहले तक गर्ल्स चैंपियनशिप होती थी, लेकिन किसी कारणों से बंद हो गई।

एेसी एक्टिविटीज से डवलप हाेता है बच्चाें में कॉन्फिडेंस

ट्रांसजेंडर एक्टिविस्ट लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने कहा, एक तरफ थर्ड जेंडर को मुख्य धारा से संभावित करने की बात की जाती है, वहीं दूसरी तरफ समाज अभी तक इन्हें अपना नहीं पा रहा है। फिर समाज में इतना भेदभाव क्यूं? मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता कि लाेग मेरे बारे में क्या सोचते हैं। छोटे बच्चों के लिए थाेड़ा मुश्किल जरूर होती है, लेकिन इस तरह की एक्टिविटीज से उनका कॉन्फिडेंस डवलप होता है।

केशव सूरी की टीम भी उतरी

एलजीबीटीक्यू समुदाय के अधिकारों के लिए आवाज उठाने वाले ललित होटल के एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर केशव सूरी भी ट्रांसजेंडर प्लेयर्स की मदद के लिए आगे आए। उन्होंने भी इस मैच में अपनी एक टीम उतारी है। वे मणिपुर में भी ट्रांसजेंडर के लिए फुटबॉल मैच करवा चुके हैं।

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