गणगौर प्रतिमा न मिले तो घर में ही बना लें, घरों पर ही करें पूजा

Zila News News - कोरोना संक्रमण के चलते हुए लॉकडाउन का असर 25 से शुरू हुए नवरात्र, गुड़ी पड़वा, चैती चांद और गणगौर पर पड़ रहा है।...

Mar 27, 2020, 09:21 AM IST
R.mandi News - rajasthan news if the gangaur statue is not found then build it at home worship at home

कोरोना संक्रमण के चलते हुए लॉकडाउन का असर 25 से शुरू हुए नवरात्र, गुड़ी पड़वा, चैती चांद और गणगौर पर पड़ रहा है। धर्माचार्यों ने सभी से त्योहारों को घर पर ही मनाने की सलाह दी है। दरअसल, लॉकडाउन के चलते पूजा-अर्चना में उपयोग होने वाली वस्तुओं के उपलब्ध न होने से श्रद्धालु असहज महसूस कर रहे हैं।

ज्योतिषियों के अनुसार नवरात्र की तृतीया पर होने वाली गणगौर पूजा के लिए महिलाओं को सलाह दी है कि यदि गणगौर (शिव-पार्वती) की प्रतिमाएं न मिल पाएं, तो वे घर में ही मिट्टी से स्वयं उन्हें बनाकर पूजा करें। मंदिरों में सुबह-शाम नवरात्र की पूजा तो होगी, लेकिन श्रद्धालुओं की भीड़ नहीं लगने दी जाएगी। ज्योतिषाचार्य अमित शास्त्री ने महिलाओं को सलाह दी है कि वे 27 मार्च को गणगौर पूजा घरों में ही करें।गणगौर की प्रतिमाएं यदि बाजार से न ला पाएं तो घर में ही मिट्टी से प्रतिकात्मक प्रतिमाएं बनाकर पूजा करें। लॉकडाउन के चलते गणगौर का विसर्जन तालाब पर जाकर न करें, बल्कि घर में ही गमले में या पीपल के पेड़ के नीचे रखकर उन्हें जल अर्पण करें।

घी व शकर से भी दी जा सकती हैं अाहुतियां: शास्त्री ने बताया कि घर में जो सामग्री उपलब्ध उसी से पूजन कर सकते हैं। नवरात्र में उपवास रखने के साथ ही घरों में रहते हुए सप्तशती पाठ व पूजा-अारती करें। पूजा के लिए सामग्री उपलब्ध न हो तो घर में जो सामग्री उपलब्ध हो उसी से प्रसन्नता के साथ पूजा करें। पूजा में अापके भाव व श्रद्धा का अधिक महत्व है। हवन सामग्री कम पड़ने पर घी व शकर से भी आहुतियां दी जा सकती हैं।

इस बार रामगंजमंडी में नहीं निकलेगी शोभायात्रा: शहर में गणगौर का त्यौहार शुक्रवार को मनाया जाएगा। इसे कुंवारी कन्याएं अच्छा वर पाने के लिए और विवाहिताएं अखंड सौभाग्य की कामना के लिए हर्षोल्लास से मनाती हैं। गणगौर की तैयारी में महिलाएं घर पर मीठे व नमकीन गुणे बनाए गए हैं, वहीं, ईसर गणगौर की पूजा की जाती है। अब तक शहर में महिलाओं द्वारा शोभायात्रा भी निकाली जाती है। इस वर्ष कोरोना वायरस के चलते लॉकडाउन होने से महिलाएं इस उत्सव को सामूहिक रूप से नही मनाकर घरों में ही ईसर गणगौर की पूजा कर मनाएंगी। गणगौर का कुवारी कन्याओं एवं नवविवाहिताओं से ही नही,सम्पूर्ण मानवीय संवेदनाओं से गहरा संबंध है। इसे सास्कृतिक उत्सव के रूप मान्यता प्राप्त है, किंतु जीवन मूल्यों की सुरक्षा व वैवाहिक जीवन की सुदृढ़ता में यह एक सार्थक प्रेरणा भी बना है। यह पर्व सांस्कृतिक, पारिवारिक एवं धार्मिक चेतना की ज्योति किरण है। इसी वजह से इसे राजस्थान के प्रमुख पर्वों में से एक माना जाता है।

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