नवरात्र पर इस बार 176 साल बाद बना दुर्लभ योग, घरों से करें आराधना

Zila News News - चैत्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शुरू हो रहे चैत्र नवरात्र में इस बार 176 साल बाद एक दुर्लभ योग बना है। इसकी...

Mar 27, 2020, 09:21 AM IST

चैत्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शुरू हो रहे चैत्र नवरात्र में इस बार 176 साल बाद एक दुर्लभ योग बना है। इसकी शुरुआत 25 मार्च से हो चुकी है। पंचांग में सभी कार्यों के लिए शुभ माने इस नवरात्र में कई योग आ रहे हैं। खास बात यह है कि इस चैत्र नवरात्र में तिथि का क्षय नहीं होने के कारण पूरे 9 दिन मां शक्ति की पूजा अर्चना और व्रत किए जा सकेंगे।

चैत्र नवरात्र पर एक विशेष दुर्लभ योग बन रहा है। ज्योतिषाचार्य अमित शास्त्री ने बताया कि नवरात्र के बीच में ही 29 मार्च को गुरु का गोचर होगा। गुरु अपनी राशि धनु से मकर में जाएगा। मकर गुरु की नीच राशि है। नवरात्र के मध्य गुरु का गोचर होने के कारण गुरु नीच का हो जाएगा। मकर में शनि और मंगल पहले से ही विराजमान होंगे जो एक दुर्लभ संयोग का निर्माण कर रहे हैं।

ज्योतिषाचार्य शास्त्री ने बताया कि 176 वर्ष पहले 11 अप्रैल 1842 से शुरू हुए चैत्र नवरात्र के बीच 16 अप्रैल को गुरु ने मकर राशि में गोचर किया था। गुरु का वही गोचर संयोग इस साल 25 मार्च से शुरू हो रहे नवरात्र के बीच 29 मार्च 2020 को भी बन रहा है।

नवरात्र के बाकी बचे दिनों को ऐसे समझें

27 मार्च: तृतीया तिथि, सर्वार्थ सिद्धि योग, मां चंद्रघंटा की पूजा।

28 मार्च: चतुर्थी तिथि, मां कुष्मांडा की पूजा,रवि योग।

29 मार्च: पंचमी तिथि, रवि योग, मां स्कंदमाता की पूजा, लक्ष्मी पंचमी।

30 मार्च: षष्ठी तिथि, मां कात्यायनी की पूजा, स्कन्ध षष्ठी व्रत, अमृतसिद्धि योग।

31 मार्च: सप्तमी तिथि, मां कालरात्रि की पूजा, राज योग।

1 अप्रैल: अष्टमी तिथि, मां महागौरी की पूजा।

2 अप्रैल: नवमी तिथि, मां सिद्धिदात्री की पूजा रात 7:30 बजे से गुरुपुष्य योग रहेगा। अमृतसिद्धि योग।

सालभर में 2 गुप्त और 2 प्राकट्य नवरात्र

हिंदू कैलेंडर के अनुसार पूरे साल में 4 बार नवरात्र मनाए जाते हैं। इनमें से मार्च-अप्रैल और सितंबर-अक्टूबर में प्राकट्य नवरात्र एवं जनवरी-फरवरी और जून-जुलाई में आने वाली नवरात्र को गुप्त नवरात्र कहा जाता है। प्राकट्य नवरात्रों में नवदुर्गा की पूजा की जाती है। गुप्त नवरात्र में सिद्धि प्राप्त करने के लिए विशेष मंत्र जाप के साथ देवी के महाविद्या स्वरूपों की पूजा की जाती है।

चैत्र नवरात्र का महत्व: चैत्र नवरात्र के पहले दिन मां दुर्गा का प्राकट्य हुआ और मां दुर्गा के कहने पर ही ब्रह्माजी ने सृष्टि का निर्माण किया था। यही वजह है कि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से हिंदू नववर्ष प्रारंभ होता है। इसके अलावा भगवान विष्णु के सातवें अवतार भगवान राम का जन्म भी चैत्र नवरात्र में ही हुआ था।

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