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40 लाख रु. का कर्ज चढ़ा लेकिन महज दाे साल में 3300 प्रतिशत की ग्रोथ हासिल की

2 वर्ष पहले
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महज 18 साल की उम्र में नौकरी तलाशने के बजाय कर्मेश गुप्ता ने चचेरे भाई प्रवीण के साथ एक कंपनी शुरू की। ढाई साल में
एक के बाद एक तीन कंपनियां फेल हो गईं। करीब 40 लाख
रुपए का कर्ज चढ़ गया। लेकिन अपनी जिद, जुनून और जज्बे से अगले 2 साल के भीतर ही 27 देशों में वाईजंगल साइबर सिक्योरिटी कंपनी खड़ी कर डाली। भारतीय रक्षा मंत्रालय से लेकर हयात और अलजजीरा तक उनके क्लाइंट हैं। कंपनी की ग्रोथ रेट 3300 प्रतिशत रही।

इस उपलब्धि पर फोर्ब्स मैगजीन ने गुरुवार को एशिया के टॉप युवा उद्यमियों की
सूची ‘फोर्ब्स 30 अंडर 30’
सूची में कर्मेश को शामिल
किया है। इस सूची में जगह बनाने वाले वे सबसे कम उम्र के इंटरप्रन्योर हैं।

यूनीफाइड साइबर सिक्योरिटी का कंसेप्ट दिया : सायबर सिक्योरिटी बाजार में अलग-अलग कंपनियों के उपकरण जोड़ कर सायबर हमले रोके जाते थे लेकिन कर्मेश ने यूनीफाइड सायबर सिक्योरिटी कंसेप्ट दिया। इस पर भारत सरकार की डेटा सिक्यूरिटी काउंसिल और नैसकॉम ने उनकी कंपनी को मोस्ट इनोवेटिव प्रोडक्ट-2108 का पुरस्कार दिया। 2015 में उन्होंने फ्री वाई-फाई इंटरनेट देने वाली कंपनी एचटीटीपी कार्ट लांच की मगर ये बड़े घाटे में बंद हुई। फिर 2017 में सोशल वाई-फाई कंपनी लाए लेकिन मोबाइल कंपनियों द्वारा फ्री इंटरनेट आने से बंद हो गई।

माता-पिता शिक्षक, बेटे ने बिजनेस चुना

कर्मेश के पिता एनके गुप्ता शिक्षक थे। 2009 में सड़क हादसे में उनकी मृत्यु हो गई थी। मां सुमन गुप्ता भी अलवर में स्कूल व्याख्याता हैं। मगर कर्मेश ने अपने लिए बिजनेस चुना। कर्मेश ने बताया कि पापा के जाने के बाद जिम्मेदारियां अचानक से बढ़ गईं। मां सब संभालती थीं, मगर वे बीमार रहने लगीं। तब लगा कि मुझे कुछ करना ही पड़ेगा। मां ने बीटेक करने जयपुर भेज दिया। कॉलेज में था तभी आईपीएल की राजस्थान रॉयल्स में मुझे सीएसआर के लिए चुना गया। यहां दुनिया के नामी खिलाड़ियों, मालिकों से मुलाकातें हुईं तो लगा कि जिंदगी मुझसे कुछ बड़ा करवाना चाहती है। फिर 2014 में मैंने चचेरे भाई के साथ अपनी पहली कंपनी बनाई।
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