सिंजारा फीका, उद्यापन करने वाली महिलाओं को निराशा

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Mar 27, 2020, 07:22 AM IST

कोरोना वायरस संक्रमण रोकने के लिए सरकार द्वारा किए गए लॉक डाउन व घरों से नहीं निकलने के लिए दिए गए निर्देशों के चलते पहली बार सिंजारे का पर्व फीका रहा है। सिंजारे पर्व पर जहां महिलाएं सजधज कर एक साथ एकत्रित होकर सिंजारे के गीत गाया करती थी। वह इस बार घरों से बाहर नहीं निकलने के कारण गीत गली मोहल्लों में नहीं गाए गए। इसके अलावा सिंजारे के पर्व पर नवविवाहितों के यहां ससुराल से सिंजारा पर ले जाने वाली सुहाग की सामग्रियां भी आवागमन की छूट नहीं होने के कारण नहीं पहुंच पाई है। सिंजारे पर्व पर बड़े चाव से खाया जाने वाला मिष्ठान घेवर भी इस बार लॉक डाउन में तैयार नहीं हो पाया। इस कारण पहला सिंजारा बिना घेवर के ही मनाया गया है। इसी प्रकार शुक्रवार को गणगौर का त्योहार भी लॉक डाउन के कारण फीका ही निकलेगा। शहर में तो जो बाजारों के प्रमुख मार्गों में भरे जाने वाला मेला तथा नगरपालिका द्वारा निकाली जाने वाली ईशर गणगौर की सवारी पहले ही निरस्त कर देने के कारण इस बार नहीं निकल पाएगी। इसके साथ ही गणगौर पर्व पर महिलाओं द्वारा 16 दिन गणगौर पूजन करने के बाद किए जाने वाले उद्यापन को भी महिलाएं नहीं कर पाएगी। क्योंकि लॉक डाउन के चलते तथा संक्रमण के कारण इस प्रकार के मौके पर मनाए जाने वाले उत्सव में लोग शामिल नहीं हो पाएंगे।

जालसू/बधाल/बाघावास/हिरनोदा/गोविंदगढ़

| कोरोना वायरस के चलते क्षेत्र में इस बार सिंजारा पर्व फीका ही रहा। कस्बे सहित आसपास के गांवों में हर वर्ष सिंजारे का पर्व बड़ी धूमधाम से मनाया जाता था। इस पर्व पर नवविवाहित महिलाओं के ससुराल पक्ष से घेवर कपड़े मिठाइयां आती थी, लेकिन इस बार कोरोना वायरस चलते भारत लॉक डाउन किया गया। इसकी पालना करते हुए लोगों ने पर्व को नहीं मनाया। लोगों ने लॉकडाउन को महत्व दिया है। वहीं बधाल के पास लुनियावास में 27 व 28 मार्च को आयोजित होने वाला मेला स्थगित कर दिया गया है।

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