सरकारी आदेशों की अवहेलना पर 123 साल पुराने कानून के तहत जेल होगी

Nagour News - दुनियाभर में तबाही मचा रहे पैनडेमिक कोरोना वायरस (कोविड-19) से हर कोई भयभीत है। इस वायरस को हराने के लिए प्रभावी...

Mar 27, 2020, 08:56 AM IST

दुनियाभर में तबाही मचा रहे पैनडेमिक कोरोना वायरस (कोविड-19) से हर कोई भयभीत है। इस वायरस को हराने के लिए प्रभावी तरीके से देशभर में लॉकडाउन घोषित किया हुआ है। इसके बाद भी कुछ लोग सड़कों पर हैं। ऐसे में लॉकडाउन के बीच पुलिस वाहनों को तो जब्त कर ही रही है, लेकिन अब और सख्त कार्रवाईयों के लिए पुलिस महामारी अधिनियम (एपीडेमिक डिजीज एक्ट 1897) के तहत घेरने के मूड में है। इससे देश और राज्य की जनता को इस महामारी के संक्रमण से बचाया जा सके। हालांकि जिले में अभी तक इस कानून के तहत एक भी प्रकरण दर्ज नहीं हुआ है, लेकिन एएसपी रामकुमार कस्वां ने इस अधिनियम के तहत कार्रवाई के पुख्ता संकेत दिए हैं।

एएसपी ने बताया कि पुलिस अब तक करीब ढाई सौ वाहनों को जब्त कर चुकी है। लेकिन अब एपिडेमिक एक्ट के तहत कार्रवाइयां की जाएगी। सूत्रों के अनुसार महामारी अधिनियम करीब 123 साल पुराना कानून है। विश्व स्वास्थ्य संगठन से महामारी घोषित हो चुके कोविड-19 के चलते इस माह इस अधिनियम के सेक्शन दो को लागू करने का फैसला लिया है। उनके अनुसार यह अधिनियम महामारियों की प्रासंगिकता को देखते हुए वर्ष 1897 में अस्तित्व में आया। सोशल साइट्स पर वायरल जानकारियों के अनुसार इस अधिनियम के तहत वर्ष 2018 में गुजरात के एक गांव में हैजा फैलने, वर्ष 2015 में डेंगू व मलेरिया का संक्रमण फैलने पर चंडीगढ़ तथा वर्ष 2009 में स्वाइन फ्लू के मामले में पुणे में इस अधिनियम के तहत कार्रवाईयों की घोषणा हुई थी।जानकारों के अनुसार किसी महामारी को दूर करने या नियंत्रण की दिशा में कदम उठाने के लिए राज्य व धारा 2(ए) की शक्तियां केन्द्र के पास रहती हैं। हालांकि इस एक्ट में सेक्शन चार हैं। इस अधिनियम की धारा दो में लिखा हुआ है कि जब राज्य सरकार को ऐसा लगे कि वहां के किसी हिस्से में खतरनाक महामारी फैल रही है या फैलने की आशंका है। ऐसी स्थिति में मौजूद कानून महामारी रोकने में नाकाफी दिखाई पड़ता है तो यह उपाय किया जाता है।

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