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कॉलेज ने दाखिला लिया, अब RU ने दाखिले पर उठाए सवाल, कहा-परीक्षा नहीं देने देंगे

3 वर्ष पहले
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जयपुर. राजस्थान विश्वविद्यालय व इससे संबद्धता प्राप्त 185 महाविद्यालयों में पढ़ने वाले हर साल एक सौ से ज्यादा विद्यार्थी कॉलेज व आरयू की लापरवाही के  कारण परीक्षा देने से वंचित कर दिए जाते हैं। हर साल की तरह इस वर्ष भी कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें विद्यार्थियों को एक शैक्षणिक वर्ष पीछे धकेल दिया है।

 

- जयपुर के मानसरोवर स्थित एक आरयू से एफिलिएटेड कॉलेज ने एमजेएमसी कोर्स में सत्र 2017-18 में दाखिला ले कर 20 हजार से ज्यादा शुल्क भी वसूल लिया लेकिन अब आरयू ने स्टूडेंट के दाखिले को ही गलत बताते हुए मुख्य परीक्षाओं में बैठने से वंचित कर दिया है। ऐसे ही जयपुर के एक अन्य एफिलिएटेड कॉलेज ने भी दो विद्यार्थियों को 2 परीक्षाएं दिलाने के बाद उनकी हार्डकॉपी जमा नहीं और अटेंडेंस शॉर्ट बताते हुए बाकी परीक्षाएं दिलाने  से मना कर दिया।, जबकि दर्जनभर विद्यार्थियों ने ऑनलाइन आवेदन कर परीक्षा शुल्क और हार्डकॉपी जमा भी जमा करा दी, लेकिन आरयू ने उनका एडमिट कार्ड जारी नहीं किया जिससे विद्यार्थी परीक्षा देने के अपने अंतिम अवसर से भी वंचित हो गए। विवि के लाइब्रेरी साइंस के विद्यार्थियों से  वार्षिक परीक्षा ली और उनका परिणाम भी घोषित किया लेकिन बाद में आरयू ने अटेंडेंस शॉर्ट होने के कारण उनको आंसरशीट देने से इनकार कर दिया। 

 

आरयू की लापरवाही ने एक साल की पढाई खराब कर दी

केस- 1  : जयपुर के मानसरोवर स्थित एफिलिएटेड  कॉलेज में एमजेएमसी कोर्स में पढ़ने वाली छात्रा आकांक्षा शर्मा के 48 प्रतिशत मार्क ग्रेजुएशन में होने पर भी कॉलेज ने पीजी में दाखिला दिया और शुल्क वसूल कर एक साल पढ़ाया भी लेकिन अब परीक्षाओं से वंचित करने के लिए कॉलेज आरयू पर आरोप लगा रहा है, जबकि आरयू का कहना है कि मिनिमम पर्सेंटेज नहीं होने पर भी छात्रा को कॉलेज ने दाखिला दिया इसलिए यह दाखिला ही गलत है ऐसे में परीक्षा नहीं दिला सकते हैं। इधर, छात्रा आकांक्षा का कहना है कि कॉलेज और आरयू की लापरवाही ने मेरी एक साल की पढाई खराब कर दी है। 
केस- 2 : आरयू से एफिलिएटेड जयपुर स्थित  एक अन्य कॉलेज ने बीए प्रथम वर्ष के छात्र अंकित से दो मुख्य परीक्षाएं दिलाईं और इसके बाद अन्य परीक्षाएं देने से मना कर दिया, कॉलेज ने दो परीक्षाएं देने के बाद कहा कि स्टूडेंट की अटेंडेंस शॉर्ट हैं इसलिए परीक्षाएं नहीं दिलाई जा सकती हैं जबकि आरयू ने स्टूडेंट अंकित को प्रवेश पत्र भी जारी कर दिया था। 
केस- 3  : विवि के ही लाइब्रेरी साइंस के 4 विद्यार्थियों  ने पिछले सत्र की मुख्य परीक्षाएं दी और आरयू ने उनका परिणाम भी जारी किया लेकिन बाद में स्टूडेंट्स को शॉर्ट अटेंडेंस की बात कह कर मार्कशीट देने से इनकार कर दिया गया। विद्यार्थी अब भी अपनी मार्कशीट के लिए विवि के चक्कर काट रहे हैं। 
केस- 4 : आरयू से एफिलिएटेड एक कॉलेज के लॉ द्वितीय वर्ष की छात्रा अनिता चौहान ने मुख्य परीक्षा का ऑनलाइन आवेदन कर परीक्षा शुल्क भी जमा कराया और आवेदन की हार्ड कॉपी भी परीक्षा पूर्व ही विवि में जमा कराई, लेकिन प्रवेश पत्र जारी नहीं होने से वह अपने ड्यू पेपर देने के अंतिम अवसर से  वंचित हो गईं। ऐसे में अब आरयू की लापरवाही ने स्टूडेंट को एक शैक्षणिक  वर्ष पीछे धकेल दिया है।

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