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राजेंद्र कुमार को तंगी के कारण बेचना पड़ा था अपना लकी बंगला, गम में पूरी रात रोए थे

इस बंगले को राजेश खन्ना ने राजेंद्र कुमार से ख़रीदा था जिसके लिए उन्होंने 3.5 लाख रुपए अदा किए थे।

Danik Bhaskar | Jul 12, 2018, 12:16 PM IST

बॉलीवुड डेस्क.'जुबली हीरो' राजेंद्र कुमार की गुरुवार को 19वीं डेथ एनिवर्सरी (12 जुलाई, 1999) है। कई सुपरहिट फिल्मों में काम करने वाले राजेंद्र कुमार के इंडस्ट्री के लोग कंजूस कहते थे। जब उनकी माली हालत खराब हुई तो उन्होंने अपना लकी बंगला राजेश खन्ना को बेचा था। जब उन्हें ये बंगला छोड़कर जाना पड़ा था, वो पूरी रात रोते रहे थे।

50 रुपए लेकर मुंबई पहुंचे थे हीरो बनने: राजेंद्र कुमार को फिल्मों में काम करने के लिए काफी संघर्ष करना पड़ा था। वे हीरो बनने का ख्वाब लिए जिस वक्त मुंबई आए थे, उस समय उनकी जेब में मात्र 50 रुपए थे, जो उन्हें पिता से मिली घड़ी को बेचकर मिले थे। गीतकार राजेंद्र कृष्ण की मदद से उनको 150 रुपए सैलरी पर डायरेक्टर एचएस रवैल के सहायक के तौर पर काम मिला था।

- 1950 में आई फिल्म 'जोगन' में राजेंद्र कुमार को काम करने का अवसर मिला। इस फिल्म में उनके साथ दिलीप कुमार लीड रोल में थे। 1950 से 1957 तक राजेन्द्र कुमार फिल्म इंडस्ट्री में अपनी जगह बनाने के लिए संघर्ष करते रहे। 1957 में आई फिल्म 'मदर इंडिया' में छोटे से रोल के बावजूद उन्हें पसंद किया गया।

- 1959 में आई फिल्म 'गूंज उठी शहनाई' बतौर लीड एक्टर राजेंद्र कुमार की पहली हिट साबित हुई थी। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्होंने 'धूल का फूल' (1959), 'मेरे महबूब' (1963), 'आई मिलन की बेला' (1964), 'संगम' (1964), 'आरजू' (1965), 'सूरज' (1966) आदि सफल फिल्मों में काम किया है। फिल्मों की कामयाबी को देखते हुए उनके फैन्स ने उनका नाम 'जुबली कुमार' रख दिया था क्योंकि उनकी फिल्में 25 हफ़्तों तक सिनेमाघरों में चलती रहती थीं।

खराब हो गई थी माली हालत
70 के दौर में उनका रंग फीका पड़ने लगा और माली हालत भी खराब होने लगी। अपनी आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए राजेंद्र कुमार को अपना बंगला 'डिंपल' बेचना पड़ा था। बता दें कि 1960 के शुरुआत में राजेंद्र कुमार ने बांद्रा के कार्टर रोड पर समुद्र किनारे बने इस बंगले को 60 हजार रुपए में एक्टर भारत भूषण से खरीदा था।

-उन्होंने इसे नया रूप देकर इसका नाम अपनी बेटी 'डिंपल' के नाम पर रखा था। इस बंगले में आते ही राजेंद्र कुमार को सफलता मिलनी शुरू हो गई थी। इस कारण यह बंगला लकी माना जाता था। राजेश खन्ना को जब यह पता लगा कि राजेंद्र कुमार इसे बेच रहे हैं तो उन्होंने इसे तुरंत खरीदने का फैसला कर लिया था। बंगला खरीदने के बाद राजेश खन्ना ने इसका नाम 'आशीर्वाद' रख दिया।

-राजेश खन्ना के लिए यह बंगला काफी लकी साबित हुआ था। उन्होंने इसमें शिफ्ट होने के बाद एक के बाद एक 15 हिट फिल्में दी थीं। यही वजह है कि उन्हें यह बंगला बेहद प्यारा था। जिंदगी का अंतिम वक्त भी उन्होंने इसी बंगले में काटा था। 18 जुलाई 2012 को उनकी मौत के बाद इसे बेच दिया गया था। इसे 90 करोड़ रु. में बिजनेसमैन शशि किरण शेट्टी ने खरीदा था। शशि ने बंगले को तुड़वा दिया है और इसकी जगह वह पांच मंजिला इमारत बनवा रहे हैं।