--Advertisement--

महाभारत 2019: 2014 में सरकार बनने के एक साल बाद ही लग गया था विपक्षी दलों का महागठबंधन बनेगा- राजनाथ सिंह

मोदी सरकार में नंबर दो और तीन बार भाजपा अध्यक्ष रहे राजनाथ ने एनआरसी, नोटबंदी, कश्मीर जैसे अहम मुद्दों पर अपनी बात रखी

Danik Bhaskar | Aug 23, 2018, 07:38 AM IST
आर्थिक आधार पर आरक्षण की मांग आर्थिक आधार पर आरक्षण की मांग

  • एनआरसी पर बोले- इसे हिन्दू-मुस्लिम में बांटकर नहीं देखना चाहिए
  • कहा- देश को पता हो कि कितने स्वदेशी और कितने विदेशी हैं

नई दिल्ली. विपक्षी एकजुटता, एनडीए में उठापटक, 2019 के चुनाव जैसे अहम मुद्दों पर गृहमंत्री राजनाथ सिंह से दैनिक भास्कर के संतोष कुमार ने खास बातचीत की। मोदी सरकार में नंबर दो और तीन बार भाजपा अध्यक्ष रहे राजनाथ ने एनआरसी, नोटबंदी, कश्मीर जैसे अहम मुद्दों पर भी अपनी बात रखी।

सवाल: यूपी में एसपी-बीएसपी, छोटे दल साथ हो रहे हैं। एमपी, राजस्थान, छत्तीसगढ़, गुजरात में बीजेपी पीक पर है। इन राज्यों में अगर भाजपा की सीटें कम होती हैं तो कहां से भरपाई होगी?
राजनाथ:
जहां तक उत्तर प्रदेश का सवाल है तो 2014 में सरकार बनने के साल-डेढ़ साल में ही लग रहा था कि ऐसी परिस्थितियां पैदा होंगी, क्योंकि सरकार और पीएम की लोकप्रियता बढ़ रही थी। इससे अहसास हो गया था कि विपक्ष पोलराइज होगा। जनता आज भी मानती है कि सही नेतृत्व नरेंद्र मोदी दे सकते हैं। उपचुनाव में भी एकजुट विपक्ष के बावजूद बीजेपी को 34-35 फीसदी वोट मिले हैं। बड़े ध्रुवीकरण में विपक्षी दल वोट बैंक को एक-दूसरे को ट्रांसफर करा पाएंगे, ऐसा न पहले हुआ है और न कभी होगा। जनता जागरूक हो चुकी है वो नहीं चाहेगी कि 50 दलों को मिलाकर सरकार बने।


सवाल: आपने कहा कि विपक्ष का गठबंधन होता है तो वोट ट्रांसफर नहीं होता। लेकिन कर्नाटक व कुछ उपचुनाव में असर दिखा है। यूपी में सीएम-डिप्टी सीएम की सीट भी बीजेपी हारी, तो आप कैसे कह रहे हैं?
राजनाथ: गठबंधन में कभी भी दो और दो चार नहीं होता। कर्नाटक में हमारी स्थिति कभी बहुत अच्छी रही हो, ऐसा नहीं है। हमने अधिकतम 110 सीटें जीती थीं, इस बार 104 जीतीं। बहुत अंतर नहीं है। उपचुनाव में जनता समझती है कि नतीजों का सरकार पर असर नहीं पड़ने वाला। हमारे वोट प्रतिशत में कमी नहीं आई है।


सवाल: आपने कहा अहसास हो गया था कि विपक्षी एकजुटता होगी...
राजनाथ: नहीं, सरकार बनने के एक-डेढ़ साल बाद अहसास शुरू हुआ। सामान्य तौर पर सरकार बनने के बाद लोकप्रियता गिरती है, लेकिन इस सरकार ने जैसे प्रोग्राम लागू किए उससे लग गया था कि ऐसी परिस्थितियां बन सकती हैं।


सवाल: तो क्या उसी समय से आपकी राजनीतिक तैयारियां शुरू हो चुकी थी?
राजनाथ: तैयारी की जरूरत नहीं है, लक्ष्य था- विकास, गुड गवर्नेंस। इसी पर काम करना था और जनता भी यही चाहती है।


सवाल: आलोचक 2019 के चुनाव की तुलना 2004 से कर रहे हैं, तब भी विपक्ष के पास चेहरा नहीं था। कहा जा रहा है कि 2004 दोहराया जाएगा, इसे कैसे देखते हैं?
राजनाथ: 2004 में कांग्रेस की हालत आज जैसी पतली नहीं थी। कांग्रेस की विश्वसनीयता खत्म हो चुकी है। आज नेतृत्व को लेकर भी लोगों को उस पर भरोसा नहीं रहा है।


सवाल: 2014 नहीं दोहरा पाए तो रणनीति क्या होगी, क्या और सहयोगी जोड़ेंगे?
राजनाथ: हमें पूरा भरोसा है कि न सिर्फ पूर्ण बहुमत से हमारी सरकार बनेगी, बल्कि यह भी हो सकता है कि 2014 से भी हमारे नंबर बढ़ जाएं।


सवाल: गठबंधन की जरूरत पड़ी तो...
राजनाथ: यह काल्पनिक प्रश्न हो गया। गठबंधन की जरूरत पड़ेगी ही नहीं।

सवाल: एक वर्ग माहौल बना रहा है कि देश में बहुत तनाव है। दलित बनाम सामान्य, हिंदू बनाम मुस्लिम, इसके पीछे क्या है?

राजनाथ: इसके बावजूद आपने देखा होगा कि कहीं भी ऐसा तनाव का माहौल देखने को नहीं मिला। बल्कि सुरक्षा, सामाजिक समरसता की दृष्टि से देखें तो वह या तो अटल सरकार के समय थी या इस सरकार के समय है।


सवाल: एनआरसी बंगाल व देश में लाने की बात बीजेपी नेताओं ने की, यह क्या है?
राजनाथ: कोई भी देश चाहेगा कि उसे पता हो देश में कितने स्वदेशी और कितने विदेशी हैं। यह देशहित में लिया फैसला है। इसकी सराहना होनी चाहिए। इसे हिंदू-मुस्लिम में नहीं बांटना चाहिए। हमारे विरोधी दलों ने तो चुनाव जीतने के लिए देश बांटने से भी परहेज नहीं किया है।


सवाल: आपको नहीं लगता कि दो कैटेगरी-स्वदेशी और विदेशी चिह्नित कर देने से कानून-व्यवस्था का सवाल खड़ा होगा और लोग विदेशी को टारगेट करेंगे?
राजनाथ: असम में एनआरसी हो रहा है, वहां कानून-व्यवस्था का प्रश्न खड़ा नहीं हुआ तो अन्य राज्यों में कैसे होगा? 40 लाख लोग एनआरसी से बाहर हैं फिर भी शांति है, क्योंकि लोगों को भरोसा है कि इस सरकार में जो भी होगा, न्यायपूर्ण होगा।


सवाल: तो क्या 2019 में आपकी सरकार बनती है तो एनआरसी पूरे देश में लागू होगा?
राजनाथ:
इस पर फैसला नहीं किया है। एनआरसी पर अनावश्यक संदेह व समाज बांटने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। यह फैसला देशहित में है।


सवाल: हिंदू-हिंदू बनकर, मुसलमान-मुसलमान बनकर, सिख-सिख बनकर सोच रहा है, हम भारतीय होकर कब सोच पाएंगे। इसमें क्या रुकावट आ रही है?
राजनाथ:
कुछ लोग ऐसे हो सकते हैैं। उनका कोई अपना मकसद हो सकता है। हर हिंदू, हिंदू बनकर सोच रहा है, मैं ऐसा नहीं मानता। मैं एक उदाहरण देता हूं कि आईएसआईएस का वैश्विक स्तर पर प्रभाव बढ़ा। लेकिन भारत में मुस्लिमों ने इसका समर्थन नहीं किया। भारत की विशिष्ट संस्कृति है। इसके प्रति लोगों की आस्था है।


सवाल: विपक्ष का आरोप है कि नोटबंदी का फैसला होता है तो वित्त मंत्री को मालूम नहीं होता, पीडीपी से समर्थन वापसी पर गृहमंत्री को पता नहीं होता..
राजनाथ:
नहीं, कैबिनेट की बैठक हुई थी। मैं स्वयं मौजूद था उसमें।


सवाल: लेकिन सिर्फ सूचना देने के लिए कैबिनेट बैठक हुई थी, फैसला तो हो चुका था?
राजनाथ: (हंसते हुए) ऐसा नहीं है। जब पीडीपी वाला फैसला हुआ तो अमित शाहजी ने बैठक बुलाई थी, तो मैं नहीं गया था। समर्थन देने या वापसी का फैसला पार्टी का काम है, सरकार का नहीं। पर राष्ट्रीय अध्यक्ष ने मुझसे बात की। प्रधानमंत्री ने मुझे फोन कर कहा देखिए क्या हो रहा है। तब मैं लखनऊ में था। मैंने कहा, छोड़िए ये सब चलता रहता है, इसकी चिंता मत करिए।


सवाल: भाजपा के शत्रुघ्न सिन्हा, यशवंत सिन्हा, अरुण शौरी कहते हैं सिस्टम ठीक से काम नहीं कर रहा है?
राजनाथ: पार्टी फोरम से बाहर जिसे जो बोलना है बोले। मुझे इन आरोपों का आधार नहीं दिखता।


सवाल: इनका आरोप है कि मार्गदर्शक मंडल से कोई मार्गदर्शन लिया ही नहीं?
राजनाथ:
आडवाणीजी, जोशीजी संसदीय दल की बैठक में आते हैं। औपचारिक रूप से मार्गदर्शक मंडल की बैठक की जरूरत नहीं पड़ी। अपेक्षा भी नहीं थी कि रोज के काम पर इनसे चर्चा होगी।


सवाल: कश्मीर में समर्थन वापसी से दो हफ्ते पहले आप पीडीपी की रैली में गए थे, अचानक समर्थन वापसी की बात होती है, ऐसा क्या हुआ?
राजनाथ:
यह अस्वाभाविक गठबंधन था। लेकिन जनादेश जैसा मिला था- एक नंबर पर पीडीपी और दूसरे पर हम। तो क्या वहां अफरा-तफरी का माहौल पैदा होने देते। इससे बेहतर था कि प्रयोग करके देखा जाए। जिन अपेक्षाओं पर हमने सरकार बनाई थी, उस पर वह खरी नहीं उतरी।


सवाल: 35 ए को लेकर मामला कोर्ट में है। देश जानना चाहता है कि सरकार का क्या स्टैंड है, आप क्या सोचते हैं, इसे क्यों नहीं हटाना चाहिए?
राजनाथ:
मामले की व्याख्या कोर्ट को करने दीजिए। सही विश्लेषण वहीं होने दीजिए। ज्यादा कमेंट नहीं करूंगा।


सवाल: बीजेपी ने अनुच्छेद 370 हटाने की बात कही थी, लेकिन गृह-कानून मंत्रालय ने संसद में कहा कि ऐसा प्रस्ताव नहीं है। क्या भाजपा इसे छोड़ना चाहती है?
राजनाथ:
बहुत काम हो रहे हैं। सारी चीजों पर एक साथ काम नहीं होता। काम कर रहे हैं, देखते जाइए।


सवाल: आर्थिक आधार पर आरक्षण की मांग आपके ही लोग कर रहे हैं, आपका क्या मानना है?
राजनाथ:
आर्थिक विषमताएं कम करने के लिए जो भी कदम हों, सरकार को उठाने चाहिए, लेकिन क्या और कैसे होगा? यह नहीं बता सकता। जो भी फैसला होगा, शासन के स्तर पर सामूहिक होगा।

सवाल: सरकार पर आरोप है कि मीडिया को बहुत दबाया जाता है, क्या कहना है?

राजनाथ: ऐसा नहीं है। अभी आप ही ने कहा कि बुद्धिजीवी सरकार पर सवाल उठाते हैं, वो सारी चीजें मीडिया में आती ही हैं।