--Advertisement--

रामायण : एक बात, पति-पत्नी के रिश्ते को हमेशा सुखी बना सकती है

रामायण में बताई गई बातों का ध्यान रखने से वैवाहिक जीवन में शांति और प्रेम बढ़ सकता है।

Danik Bhaskar | May 07, 2018, 04:41 PM IST

रिलिजन डेस्क। सुखी और सफल वैवाहिक जीवन की शुरुआत विवाह के पहले दिन से ही होती है। रामायण में श्रीराम ने सीता को विवाह के पहले ही दिन एक वचन दिया था, जिसने उनकी सफल गृहस्थी की नींव रखी। श्रीराम ने सीता को यह वचन दिया था कि वे हमेशा सिर्फ सीता के प्रति निष्ठा रखेंगे। जीवन प्रबंधन गुरु पं. विजयशंकर मेहता के अनुसार पति-पत्नी किसी भी गृहस्थी की धुरी होते हैं। इनकी सफल गृहस्थी ही सुखी परिवार का आधार होती है। अगर पति-पत्नी के रिश्ते में थोड़ा भी दुराव या अलगाव है तो परिवार कभी भी खुश नहीं रह सकता। परिवार का सुख, गृहस्थी की सफलता पर निर्भर करता है। यहां जानिए श्रीराम और सीता से कौन-कौन सी बातें सीख सकते हैं...

- भगवान श्रीराम ने कैसे सीता से अपने विवाह के साथ ही सफल वैवाहिक जीवन की नींव रखी। सीता को भगवान राम ने विवाह के बाद सबसे पहला उपहार क्या दिया। श्रीराम ने सीता को वचन दिया कि जिस तरह से दूसरे राजा कई रानियां रखते हैं, कई विवाह करते हैं, वे ऐसा कभी नहीं करेंगे। हमेशा सीता के प्रति ही निष्ठा रखेंगे।

- विवाह के पहले ही दिन एक दिव्य विचार आया। रिश्ते में भरोसे और आस्था का संचार हो गया। सफल गृहस्थी की नींव पड़ गई। श्रीराम ने अपना यह वचन निभाया भी। सीता को ही सारे अधिकार प्राप्त थे। श्रीराम ने उन्हें कभी कमतर नहीं आंका।

- पति-पत्नी का संबंध तभी सार्थक है जबकि उनके बीच का प्रेम सदा तरोताजा बना रहे। तभी तो पति-पत्नी को दो शरीर एक प्राण कहा जाता है। दोनों की अपूर्णता जब पूर्णता में बदल जाती है तो अध्यात्म के मार्ग पर बढऩा आसान और आंनदपूर्ण हो जाता है। मात्र पत्नी से ही सारी अपेक्षाएं करना और पति को सारी मर्यादाओं और नियम-कायदों से छूट दे देना बिल्कुल भी निष्पक्ष और न्यायसंगत नहीं है।

- स्त्री में ऐसे कई श्रेष्ठ गुण होते हैं जो पुरुष को अपना लेना चाहिए। प्रेम, सेवा, उदारता, समर्पण और क्षमा की भावना स्त्रियों में ऐसे गुण हैं, जो उन्हें देवी के समान सम्मान और गौरव प्रदान करते हैं।

- जिस प्रकार पतिव्रत की बात हर कहीं की जाती है, उसी प्रकार पत्नीव्रत भी उतना ही आवश्यक और महत्वपूर्ण है। जबकि गहराई से सोचें तो यही बात जाहिर होती है कि पत्नी के लिये पति व्रत का पालन करना जितना जरूरी है उससे ज्यादा आवश्यक है पति का पत्नी व्रत का पालन करना। दोनों का महत्व समान है। कर्तव्य और अधिकारों की दृष्टि से भी दोनों से एक समान ही हैं।

- जो नियम और कायदे-कानून पत्नी पर लागू होते हैं वही पति पर भी लागू होते हैं। ईमानदारी और निष्पक्ष होकर यदि सोचें तो यही साबित होता है कि स्त्री पुरुष की बजाय अधिक महम्वपूर्ण और सम्मान की हकदार है।

Related Stories