पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • National
  • \'14 साल की ममता ने घर आई बारात लौटा दी\'

\'14 साल की ममता ने घर आई बारात लौटा दी\'

5 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक

नीरज सिन्हा

बघिमा, गुमला से बीबीसी हिंदी के लिए

“ग़रीब घर की लड़की जब बड़ी होने लगती है, तो रातों की नींद उड़ने लगती है बाबू”.

ये शब्द हैं नवीं कक्षा में पढ़ने वाली 14 साल की ममता के माता-पिता के. ममता की शादी तय हुई थी लेकिन उसने कम उम्र में शादी से इनकार कर दिया. इसके बाद से झारखंड में गुमला के सुदूर हापामुनी गांव की ममता सुर्खियों में है.

ममता के इरादे मज़बूत हैं पर जेहन में एक फिक्र भी. शादी से इनकार करने के बाद वो चाहती है कि शादी के लिए मां-बाबा ने जो क़र्ज़ लिया था, वो ख़त्म हो जाए.

गांवों की गलियों और पगडंडियों से पैदल चलकर छह किलोमीटर दूर स्कूल जाने वाली इस लड़की का दाख़िला अब सरकार के कस्तूरबा बालिका आवासीय विद्यालय बघिमा पालकोट में कराया गया है.

यहां ममता को बारहवीं तक पढ़ाई के लिए पोशाक, किताबें, जूते और भोजन मुफ़्त मिलते रहेंगे.

बात दो जनवरी की है जब ममता की शादी के लिए लड़के वाले उसके घर पहुंचे तो एेन मौके़ पर पुलिस भी वहां पहुंची और ममता को अपने साथ ले गई.

शादी न करने के ममता के इस फ़ैसले पर सरकार ने उन्हें एक लाख रुपए इनाम देने की घोषणा की है.

ममता बताती हैं कि छोटी उम्र में शादी के सवाल पर उसने टोका ज़रूर था, पर घर वालों के सामने कड़ा विरोध नहीं कर सकी थी. उसे लगा कि मां-बाबा आर्थिक अभावों से गुज़रते हैं, शायद इसलिए शादी कर रहे हैं.

कस्तूरबा स्कूल में नवीं कक्षा में पढ़ने वाली पल्लवी बताती हैं कि उन लोगों ने अपनी नई सहेली का स्वागत तालियों से किया था.

ममता ने सभी लड़कियों को जब अपनी शादी तोड़ने की बात बताई, तो उसे बताया गया कि कस्तूरबा स्कूल का स्लोगन ही हैः पहले पढ़ाई, फिर विदाई.

पिछले साल 26 जनवरी को कस्तूरबा स्कूल की लड़कियों के लिए इस अभियान की शुरुआत की गई थी.

स्कूल की छात्रा पूजा कहती है, \"अशिक्षा के कारण गांवों में पुराने ख़्यालात हैं. लड़कियों को बोझ समझा जाता है. लिहाजा कम उम्र में शादी कर दी जाती है. पर इस ख़्याल को ख़त्म करना है.\"

हफ़्ते भर के दौरान ममता कई दौर से गुज़री है. अब वह दूसरी लड़कियों से घुल मिल रही है. वो पढ़ लिखकर शिक्षक बनना चाहती है. उसकी नज़रें सरकार की घोषणा पर टिकी है.

वो कहती हैं, \"पैसे मिलें, तो मां-बाबा ने शादी के लिए जो क़र्ज़ लिया था, उसे चुका दूंगी. बाक़ी पैसे अपनी तथा भाई-बहनों की पढ़ाई पर ख़र्च करूंगी.\"

बघिमा स्कूल की वार्डन और शिक्षिका नीलन प्रभा केरकेट्टा समेत सभी शिक्षक और कर्मचारी भी स्कूल में ममता के दाखिले से ख़ुश हैं.

इससे पहले एक आदिवासी लड़की बिरसमुनी ने बाल विवाह से मना किया था. वो भी इसी स्कूल में छठी कक्षा में पढ़ती है.

हम हापामुनी गांव भी गए. ममता के पिता रतन साहू, मां शालो देवी अपने दो अन्य बच्चों के साथ मिले. उनका दो कमरे का टूटा-फूटा खपरैल कच्चा मकान है.

घर के अंदर एक अलमारी और छोटे से आंगन में रखी रजाई, गद्दा और पलंग देखकर समझते देर नहीं लगी कि यह सब बेटी की शादी के लिए ख़रीदा गया था.

रतन बताते हैं कि वह ड्राइवरी करते हैं. खेती के लिए बित्ता भर भी जमीन नहीं है.

क्या बेटी ने पहले शादी से मना नहीं किया था, वह कहते हैं, \"यह सब अचानक हुआ.\"

रतन कहते हैं कि अब बेटी पढ़ कर अपने पैरों पर खड़ी हो जाए, यही उनकी ख़ुशी होगी. क़र्ज़ चुकाने के लिए उन्हें हाड़तोड़ मेहनत करनी होगी.

उनकी पत्नी शालो देवी बताती हैं कि कई लोगों से कुछ-कुछ करके क़रीब 45 हजार रुपए क़र्ज़ लिए हैं. कुछ पैसे मजदूरी कर उन लोगों ने बचाए थे.

शालो देवी कहती हैं कि सरकार से उन्हें ग़रीबी का राशन कार्ड और इंदिरा आवास मिल जाता, तो बड़ी राहत मिल जाती.

क्या लड़के वाले नाराज नहीं हुए, इस सवाल पर ममता के चाचा कृष्णा साहू बताते हैं, \"पहले तो वे ग़ुस्सा हो गए पर उन्हें सच्चाई का पता चला, तो वे भी राज़ी होकर लौट गए.\"

गांव में सामाजिक कार्यकर्ता बिंदेश्वर साहू का मानना है कि जाने-अनजाने तो रतन ने कम उम्र में बेटी की शादी तय कर दी, लेकिन शादी न करने के ममता के फ़ैसले से गांव में लोगों को सीख मिली है.

गांव के ही सुरेंद्र साहू बताते हैं, \"वे लोग तैयारियों में जुटे थे. पुलिस आकर ममता को ले गई, तो सभी सकपका गए, पर मिल जुलकर स्थिति को संभाला गया.\"

घाघरा प्रखंड की नवनिर्वाचित प्रमुख सुनीता देवी भी रतन साहू के परिवार से मिलने पहुंची थीं. उन्होंने कहा कि ममता जैसी लड़की ने उनके प्रखंड का मान बढ़ाया है.

उन्होंने साथ ही रतन साहू को सरकारी मदद दिलाने के लिए पहल करने का भरोसा भी जताया है.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

खबरें और भी हैं...