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डाउनलोड करेंनए नोटों के पिछले हिस्से पर प्रकाशन वर्ष अंकित है
भारतीय रिजर्व बैंक की प्रवक्ता अल्पना किलावाला का कहना है कि नोटों को बदला जाना कोई अचानक फ़ैसला नहीं है बल्कि हम लोग पहले भी कुछ सालों से करते आए हैं. इससे पहले जो हुआ था, वो हम चुपचाप करते आ रहे थे.
बीबीसी से बातचीत में उन्होंने कहा, \"हमने बैंकों को पिछले कई सालों से निर्देश दे रखा है कि जो भी पुराने नोट आएं उन्हें दोबारा जारी न करें बल्कि रिजर्व बैंक को वापस कर दें. इस तरह से ऐसे बहुत सारे पुराने नोट नष्ट किए जा चुके हैं. इसलिए हमने सोचा कि जो बचे हुए पुराने नोट हैं उन्हें इकट्ठा कर लिया जाए और फिर उन्हें चलन से बाहर कर दिया जाए.\"
दरअसल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नोटों के बारे में यही तरीका अपनाया जाता है कि मार्केट में एक नोट के बहुत ज्यादा डिजाइन न चलें.
उनका कहना था कि साल 2005 के बाद रिज़र्व बैंक ने जो नोट छापे हैं उनमें सुरक्षा की दृष्टि से कई उपाय किए गए हैं जो कि पुराने नोटों में नहीं थे. इसीलिए अब सिर्फ उन्हीं नोटों को आगे जारी रखना चाहते हैं ताकि उपभोक्ता को ज़्यादा सुरक्षा मानकों वाले नोट मिल सकें.
जहां तक नए नोटों और पुराने नोटों के बीच पहचान का मुद्दा है तो नए नोट को के पीछे की तरफ़ निचले भाग में छपाई का वर्ष छपा होता है जबकि पुराने नोटों में ऐसा नहीं होता था.
प्रकाशन वर्षअल्पना किलावाला कहती हैं कि यदि किसी के पास बिना छपाई वर्ष अंकित किया हुआ नोट मिलता है तो वो उसे बैंक को वापस कर दे क्योंकि नए नोट में यानी 2005 के बाद के सभी नोटों में उसके प्रकाशन का वर्ष लिखा हुआ है.
उनके मुताबिक, आरबीआई के दिए समय में यदि नोट नहीं बदल पाते हैं तो भी कोई दिक्कत नहीं है, हालांकि इसके लिए काफी समय दिया गया है.
वो कहती हैं, \"नोटों को बदलने की प्रक्रिया एक अप्रैल से शुरू होगी और जुलाई तक बदल सकते हैं. लेकिन इसके बाद भी यदि आप नोट बदलना चाहते हैं तो कोई दिक्कत नहीं है. जिस बैंक की शाखा के आप खाताधारक नहीं हैं और आपके पास दस से ज़्यादा नोट हैं तो आपको सिर्फ पहचान पत्र दिखाना होगा.\"
नोट तो बदल ही जाएगा, उसकी कोई समय सीमा निर्धारित नहीं की गई है.
(बीबीसी संवाददाता तुषार बैनर्जी से बातचीत पर आधारित)
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