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ट्रांसफर स्टेशनों के पास कचरे के ढेर, सेग्रीगेशन हो ही नहीं रहा; 223 कंपोस्ट यूनिट में जैविक खाद बनना बंद

3 वर्ष पहले
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भोपाल.   लगातार दूसरे साल स्वच्छता सर्वे में भोपाल ने दूसरा स्थान तो हासिल कर लिया, लेकिन आज शहर में सफाई व्यवस्था की जो हालत है, वह नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है। सर्वे के ठीक पहले नवंबर में अमला सक्रिय हुआ और जमीन पर सर्वे टीम को दिखाने मात्र के लिए काम किया। इसके बाद फिर वही पुराना ढर्रा... जगह-जगह कचरे के ढेर दिखाई दे जाते हैं, डोर टू डोर कचरा कलेक्शन में ढिलाई हो रही है और करीब 80 फीसदी कंपोस्ट यूनिट में खाद बनना बंद हो चुकी है।

 

ट्रांसफर स्टेशनों में जल रहा कचरा

शहर से प्रतिदिन 850 मैट्रिक टन कचरा निकलता है। निगम का दावा है कि यह कचरा आदमपुर छावनी पहुंचाया जाता है। लेकिन, हकीकत यह है कि आज भी बहुतायत में कचरा शहर के अलग-अलग हिस्सों में बने ट्रांसफर स्टेशनों में सड़ता है। यही नहीं इन ट्रांसफर स्टेशनों पर ही आग लगाकर कचरा ढिकाने लगा दिया जाता है। इसी हफ्ते में दानापानी के पास ट्रांसफर स्टेशन और आरिफ नगर के ट्रांसफर स्टेशन में आग लगने से भारी तादाद में कचरा जला।

 

 

30 लाख खर्च, अब कंपोस्ट यूनिट बंद
निगम ने अन्य एजेंसियों आैर निजी कॉलोनियों के साथ मिलकर 273 पार्कों में कंपोस्ट यूनिट बनाईं। इस पर  30 लाख से अधिक राशि खर्च की। यहां पार्क से निकलने वाले कचरे से जैविक खाद बननी थी। टारगेट था रेाज पांच टन जैविक खाद बनाने का लेकिन अाज सिर्फ 50 यूनिट ही चालू हालत में हैं।

 

वेस्ट टू एनर्जी प्लांट को लेकर कोई काम नहीं
भानपुर खंती बंद करके आदमपुर छावनी की नई साइट बनाई गई। यहां एस्सेल इंफ्रा को वेस्ट टू एनर्जी प्लांट बनाना था। जहां कचरे से खाद बनाई जानी थी। करार के मुताबिक आठ महीने पहले यहां बिजली उत्पादन शुरू हो जाना था। आदमपुर में भानपुर खंती की तरह ही कचरा डंप किया जा रहा है।

 

फिर पुराने ढर्रे पर व्यवस्थाएं

- स्मार्ट बिन सिर्फ कागजों में ही लगाए गए, धरातल पर इन्होंने कोई काम ही नहीं किया।

- बाजारों की धुलाई के लिए लाई गई लाखों की मशीनें आज धूल खा रही हैं।

- सड़काें धुलाई और सफाई व्यवस्था चंद रोज ही चली, अब सड़काें धुलाई पूरी तरह से बंद है। जबकि, झाडू पहले की तरह कहीं-कहीं ही लगती है। 

 

मुझे तो सिर्फ दो महीने ही मिले

नगर निगम आयुक्त प्रियंका दास ने बताया कि मुझे दो महीने ही मिले थे, जितना संभव था तैयारी की आैर इतने कम समय में जो रिजल्ट आया वह संतोषजनक है। हम पहला स्थान भी हासिल कर सकते थे, लेकिन पूर्व निगम आयुक्त छवि भारद्वाज के जाने और मेरे आने के बीच में काम बिल्कुल नहीं हुआ। अगर इस दौरान काम हुआ होता ताे हम नंबर वन ही होते। 
 

कमियों को दूर करेंगे 
मेयर आलोक शर्मा सफाई रोजाना का काम है। यदि किसी वजह से एक-दो दिन भी ढिलाई हो  जाए तो व्यवस्था बिगड़ जाती है। नागरिकों के सहयोग और निगम अमले की मेहनत से हम देश में दूसरे नंबर पर हैं। कुछ कमियां हो सकती हैं इन्हें दूर किया जाएगा।

 

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