रिलेशनशिप

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…तो क्या इसलिए रिश्तों में बढ़ रही हैं दूरियां

ज्यादातर मामलों में रिश्तों को समय न देने की आदत उस पर नकारात्मक ​असर डालती है।

Dainik Bhaskar

May 25, 2018, 03:55 PM IST
रिश्ते एक दिन में नहीं बनते-बिगड़ते हैं। प्यार का एहसास जिंदा रखने के लिए अपने पार्टनर को क्वॉलिटी टाइम देना जरूरी है। रिश्ते एक दिन में नहीं बनते-बिगड़ते हैं। प्यार का एहसास जिंदा रखने के लिए अपने पार्टनर को क्वॉलिटी टाइम देना जरूरी है।

यूटिलिटी डेस्क । ‘तुम्हारे पास मेरे लिए कभी समय नहीं होता है’। यह ऐसी लाइन है जो आजकल हर रिलेशनशिप में सुनने को मिलती है। दरअसल आज की आपाधापी की जिंदगी में पर्सनल टाइम कम होता जा रहा है। हर कोई अपने आपको प्रूव करने में लगा है और ​निजी रिश्तों में दूरियां बनती जा रही हैं। यूं तो यह छोटी सी शिकायत है, मगर कई बार इससे पार्टनर आहत महसूस करने लगता है। ऐसी स्थि​ति उस रिश्ते में और ज्यादा असर डालती है जो नया-नया बना हो। जानिए ऐसी 02 बातें, जो रिश्तों में दूरियां बढ़ा रही हैं, इन्हें सुधारें और आगे बढ़ें।

पहले ऐसा: ज्यादा महत्वाकांक्षाएं नहीं थीं
अगर हम आज से 30-35 साल पहले के कपल्स की जिंदगी के बारे में सोचें तो पाएंगे कि उस वक्त आज की तुलना में बहुत कम महिलाएं नौकरीपेशा थीं। लंबी दूरियां और ट्रैफिक जाम पार करके दफ्तर में 8-10 घंटे नहीं खपाने होते थे। उस पीढ़ी का जीवन इस लिहाज से सुकून भरा था। बहुत महत्वाकांक्षाएं और कॉम्पिटीशन भी नहीं था, इसलिए जीवन आसान था। पति-बच्चों को भेजने के बाद महिलाओं का ज्यादा वक्त घरेलू कार्यों में बीतता था।

अब क्या: क्वॉलिटी टाइम की कमी
अब समय की कमी कपल्स के आपसी रिश्तों को ही नहीं, माता- पिता, बच्चों व परिवार के अन्य लोगों से उनके रिश्तों को भी प्रभावित कर रही है। रिश्ते एक दिन में नहीं बनते-बिगड़ते हैं। प्यार का एहसास जिंदा रखने के लिए अपने पार्टनर को क्वॉलिटी टाइम देना जरूरी है। पार्टनर की शिकायत को नजरअंदाज करना भी ठीक नहीं होता है। बेहतर शेयरिंग से रिश्तों की मुश्किलें दूर हो सकती हैं।


पहले ऐसा: होता था भरपूर समय
पहले ज्वॉइंट फैमिली थी। घर में कामकाज बंटे हुए थे। बच्चों का लालन-पालन हो या शॉपिंग करना, सब काम घर में अधिक सदस्य होने से कम समय में हो जाते थे। फ्रेंड्स भी फ्री रहती थीं तो वे हाथ बंटा लेती थीं। पति-पत्नी हों या माता-पिता और बच्चे, सभी को एक दूसरे लिए भरपूर समय होता था। अच्छी सेहत भी रिश्ते को मजबूत बनाती है, उस समय सेहत सुधारने और बनाने के लिए भी लोगों के पास भरपूर समय होता था।


अब क्या: सभी अपने आप में बिजी
आज एकल परिवार हैं। अपने शहरों से दूर दूसरे शहरों में बसे लोगों के सामाजिक संबंध भी उतने गहरे नहीं हो पाते। चूंकि अन्य रिश्तों से कट जाते हैं, इसलिए भी पति-पत्नी की एक-दूसरे से अपेक्षाएं बढ़ जाती हैं। ऐसे में जब दूरियां होने के चलते वे अपेक्षाएं पूरी नहीं हो पातीं तो शिकायतें बढ़ने लगती हैं। आजकल के लोग पूरी तरह से अपने पार्टनर पर ही निर्भर हो गए हैं। लेकिन जब उन्हें वो प्यार नहीं मिलता तो टकराव पैदा होता है।

पार्टनर की शिकायत को नजरअंदाज करना भी ठीक नहीं होता है। बेहतर शेयरिंग से रिश्तों की मुश्किलें दूर हो सकती हैं। पार्टनर की शिकायत को नजरअंदाज करना भी ठीक नहीं होता है। बेहतर शेयरिंग से रिश्तों की मुश्किलें दूर हो सकती हैं।
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रिश्ते एक दिन में नहीं बनते-बिगड़ते हैं। प्यार का एहसास जिंदा रखने के लिए अपने पार्टनर को क्वॉलिटी टाइम देना जरूरी है।रिश्ते एक दिन में नहीं बनते-बिगड़ते हैं। प्यार का एहसास जिंदा रखने के लिए अपने पार्टनर को क्वॉलिटी टाइम देना जरूरी है।
पार्टनर की शिकायत को नजरअंदाज करना भी ठीक नहीं होता है। बेहतर शेयरिंग से रिश्तों की मुश्किलें दूर हो सकती हैं।पार्टनर की शिकायत को नजरअंदाज करना भी ठीक नहीं होता है। बेहतर शेयरिंग से रिश्तों की मुश्किलें दूर हो सकती हैं।
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