पर्यावरण मंत्रालय को एनसीएपी मसौदे पर सौंपे गए सुझाव
पर्यावरण मंत्रालय को एनसीएपी मसौदे पर सौंपे गए सुझाव
एनसीएपी को 17 मई 2018 तक पर्यावरण मंत्रालय की वेबसाइट पर लोगों की प्रतिक्रिया और सुझाव के लिए डाला गया था। पिछले एक महीने में संबंधित संगठनों और समूहों द्वारा लगातार देशभर में कई चर्चा आयोजित करने के बाद अलग-अलग सेक्टर के विशेषज्ञों ने एनसीएपी को मजबूत बनाने के लिए 20 बिंदुओं पर सुझाव दिए।
इन मुख्य बिंदुओं में उत्सर्जन को तीन साल में 35 प्रतिशत और पांच सालों में 50 प्रतिशत कम करने के लक्ष्य को एनसीएपी में शामिल करना, उद्योग और औद्योगिक क्षेत्रों में होने वाले प्रदूषण को नियंत्रित करना, एनसीएपी का समय समय पर मूल्यांकन, पराली जलाने के मुद्दे को लेकर व्यापक रुख अपनाने की जरूरत, गैर मोटरयुक्त परिवहन को मजबूत करना, कचरा प्रबंधन, अयोग्य शहरों के चयन की प्रक्रिया को परिभाषित करना, कानूनी अधिनियम के अंतर्गत लाना, एनसीएपी मसौदे को दूसरी क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध कराना जैसे महत्वपूर्ण तथ्य शामिल हैं।
ग्रीनपीस इंडिया के सीनियर कैंपेनर सुनील दहिया ने कहा, \"\"पर्यावरण मंत्रालय को एनसीएपी में उत्सर्जन कम करने के लिये स्पष्ट समयसीमा और लक्ष्य निर्धारित करने को प्राथमिकता देनी चाहिए। एनसीएपी एक ऐसा कार्यक्रम है जिसमें विभिन्न प्रदूषकों से निपटने के लिए प्रतिबद्ध होकर काम किया जा सकता है। अगर उत्सर्जन कम करने के लक्ष्य और विभिन्न प्रदूषकों से निपटने की योजना को इसमें शामिल नहीं किया जाता है तो फिर यह व्यर्थ का अभ्यास साबित होगा।\"\"
हालिया विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट ने एक बार फिर वैश्विक स्तर पर भारत के वायु प्रदूषण की समस्या को उजागर किया है। डब्लूएचओ द्वारा जारी 2016 के आंकड़ों के अनुसार दस सबसे ज्यादा प्रदूषित शहर भारत में हैं। पूरी दुनिया में 10 लोगों में से 9 लोग खतरनाक हवा में सांस ले रहे हैं।
--आईएएनएस