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क्या रेड्‌डी बंधु भाजपा की नैया पार लगाएंगे?

बेल्लारी व आसपास के क्षेत्रों की 23 सीटों पर प्रभाव को देखते हुई थी जनार्दन रेड्‌डी की पार्टी में वापसी।

शेखर गुप्ता | Last Modified - May 15, 2018, 01:36 AM IST

क्या रेड्‌डी बंधु भाजपा की नैया पार लगाएंगे?

कर्नाटक के चुनाव को कोई दीवार पर लिखी इबारत नहीं कह सकता। कोई पोस्टर नहीं, बैनर नहीं, झंडे, होर्डिंग, कट-आउट कुछ नहीं। चुनाव वाले इस प्रदेश में राजमार्ग व भीतरी इलाके के 2 हजार किमी के सफर के बाद आप इसकी आंध्र से लगी उत्तर-पूर्वी सीमा पर बल्लारी (पहले बेल्लारी) पहुंचते हैं। एक संकरी पर सुंदर सड़क मोलाकलमुरु गांव ले जाती है। मोड़ पर केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की चौकी थी लेकिन, उनकी रुचि अंदर जाने वालों की बजाय बाहर आने वालों में थी। क्यों यह हम बाद में जानेंगे।
गली में कुछ मीटर आगे जाते ही भूसे जैसा सूखा इलाका दाएं एकदम हराभरा नखलिस्तान हो जाता है। यहां हमें होर्डिंग और कट-आउट भी दिखते हैं। सामने ही भाजपा के मुख्यमंत्री पद के प्रत्याशी बीएस येदियुरप्पा और अमित शाह के विशाल पोस्टर हैं। दोनों के पीछे हट्‌टे-कट्‌टे तेलुगु फिल्म स्टार जैसे श्रीरामुलु दिखते हैं, बादामी से मौजूदा मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के खिलाफ भाजपा के प्रत्याशी। बल्लारी के बादशाह और बेंगुलुरू के किंग मेकर जनार्दन रेड्‌डी की चर्चा ज्यादा है। भाजपा को उम्मीद है कि देश के ज्यादातर नेताओं से ज्यादा मामलों का सामना करने वाले रेड्‌डी अपने क्षेत्र की 23 में से अधिकतम सीटें दिला देंगे। सत्ता में लौटने की तड़प ने भाजपा को संगठित राजनीतिक अपराध और भ्रष्टाचार के साथ खुलेआम समझौता करने पर मजबूर कर दिया।
रेड्‌डी बंधुओं में जनार्दन सबसे छोटे हैं। करुणाकर और सोमशेखर उनके बड़े भाई हैं। पिछले येदियुरप्पा कैबिनेट में पहले दो और उनके साथी श्रीरामुलु महत्वपूर्ण विभागों के मंत्री थे। सोमशेखर को कर्नाटक दुग्ध महासंघ का अध्यक्ष बना दिया गया था। मेरी सहयोगी रोहिणी स्वामी ने बताया कि यह ‘नकदी से मालामाल दुधारु गाय’ है।
चार में से तीन पर मामले दर्ज हैं और कोर्ट ने जनार्दन को इस शर्त पर जमानत दी है कि वे बल्लारी जिले में नहीं जा सकते। इसलिए वे मोलकलमुरू में जमे बैठे हैं और इसीलिए सुरक्षाकर्मियों को वहां जाने वालों की बजाय वहां से निकलने वालों की चिंता है। वे जनार्दन को उनकी ‘राजधानी’ में नहीं जाने दे सकते। हालांकि इससे उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता। शोले में जेलर असरानी का प्रसिद्ध डायलॉग है, ‘हमारे आदमी चारों तरफ फैले हुए हैं।’ जनार्दन यह कह सकते हैं। बल्लारी में उनके आदमी, दल-बल और भाई सब हैं।
हमें घर-घर प्रचार अभियान में सोमशेखर सत्यनारायणपेट में मिले। ‘जंगमा’ समुदाय के 70 लोग इकट्‌ठा हैं और अनुसूचित जाति का दर्जा मांग रहे हैं, जिसे रेड्‌डी समर्थन देते हैं। जंगमा लिंगायतों में पुजारी हैं इसलिए गुरु कहलाते हैं। इसके कारण उनसे श्रद्धालुओं से मिले दान से आजीविका चलाने की अपेक्षा रहती है। वे कहते हैं कि चूंकि वे ‘भीख’ मांगते हैं तो अनुसूचित जाति में होने चाहिए। यहां देखिए ऊंची जाति में भी ऊंचा वर्ग अजा दर्जा मांग रहा है। कर्नाटक के जटिल जातिगत अलजेब्रा की तुलना में उत्तर प्रदेश व बिहार की जाति की राजनीति तो मामूली जोड़-घटाव है। सोमशेखर से अवैध खनन के बारे में पूछा तो खुद को प्रतिद्वंद्वियों व कांग्रेस का शिकार बताया। आपराधिक मामलों पर रटा-रटाया जवाब देते हैं, अदालत को तय करने दीजिए। वे जोर देते हैं कि बल्लारी में सिर्फ जरूरत से ज्यादा खनन हुआ है, आपराधिक खनन नहीं। फिर मैं परिवार के बारे में पूछता हूं, ‘बॉस कौन है?’ जनार्दन, जवाब मिलता है। मैं बनावटी आश्चर्य जताता हूं, ‘पर वे सबसे छोटे हैं।’ वे कहते हैं, ‘नो सर, वे हम सबसे बुद्धिमान हैं।’
खनन घोटाला समझने के लिए हम जनता दल (सेक्यूलर) यानी देवेगौड़ा के प्रत्याशी होथुर मोहम्मद इकबाल के यहां एक घंटा ठहरे। वे उर्दू बोलने वाले संभ्रांत परिवार के मुखिया हैं। उनकी तीन बड़ी खदाने हैं। वे बताते हैं, 2000 तक न तो पैसा था न कोई समस्या। एक टन खुदाई में 150 रुपए लागत आती थी। ब्रिकी होती थी 250 रुपए में, जिसमें से 16.50 रुपए राज्य को रायल्टी में जाते थे। मार्जिनल बिज़नेस था। फिर चीनी अर्थव्यवस्था में उछाल आया। कीमत 600, 1000 और फिर तो 6,000 तक पहुंच गई। विशाल संपत्ति पैदा हुई। अब वे यह तो नहीं बताएंगे कि ज्यादातर अवैध व काली संपत्ति। प्रतिबंध लगने तक जिसके पास भी परमिट था वह कितना भी, कहीं खोद सकता था। दूसरे की खदान से भी। कोई सरकार नहीं थी। केवल जनार्दन रेड्‌डी का हुकूम चलता था। वे सबसे सिर्फ अपना हफ्ता वसूलते थे। बाकी तो आप संतोष हेगड़े की रिपोर्ट में पढ़ लीजिए। उनका अनुमान है कि 2006 और 2010 के बीच 1,22,000 का खनिज निर्यात किया गया। लोकायुक्त ने यह भी बताया कि रेड्‌डी बंधुओं की खदान केवल आंध्र में थी, लेकिन जो भी उन्होंने निर्यात किया वह कर्नाटक का था। सीबीआई ने चुनाव के पहले सबूत के अभाव और न्याय क्षेत्र के आधार पर मामले वापस ले लिए।
मैंने एक पुलिस अधिकारी से पूछा तो उसने बताया यहां के खनन माफिया की तुलना धनबाद के माफिया से हो सकती है लेकिन, एक अंतर है कि यहां कोई हत्या नहीं होती। पुलिस और स्थानीय प्रशासन की मिलीभगत के चलते अगर हिस्सा नहीं चुकाया गया तो खनन रोक दिया जाता है। आईपीसी के तहत मामला दर्ज हो जाता है। लोकायुक्त ने जिले के 650 से अधिक अधिकारियों की पहचान की। इनमें से 53 को बाहर कर दिया गया। रेड्डी ने येदियुरप्पा के खिलाफ बगावत कर दी। भाजपा नेतृत्व शांति चाहता था। नतीजतन अधिकारियों की वापसी हुई, रेड्डी अहम मंत्रालयों में बने रहे। इसीलिए येदियुरप्पा कहते हैं कि रेड्‌डी बंधुओं का पुनर्वास उनका नहीं आला कमान का निर्णय था।
बेतहाशा पैसे से निर्धन बल्लारी में चमचमाती कारें, निजी विमान और हेलिकॉप्टर आ गए। अब काफी कुछ चला गया है। कांग्रेस प्रत्याशी अनिल लाड के पास दो हेलिकाप्टर थे। वे कहते हैं यह कोई लग्जरी नहीं सिर्फ सुविधा थी। क्योंकि 20 टन के ट्रक पर 50 टन खनिज लादा जाता था, जो राजमार्गों को उधेड़ देते थे। जनार्दन के पास अब भी दो हेलिकॉप्टर है। अब मैं संसाधनों से अभिशप्त क्षेत्र में दीवार पर लिखी इबारत बताता हूं। तीनों प्रत्याशी पूर्व मंत्री है। जद (एस) ने तीन में से दो खदानें खो दी हैं, कांग्रेस प्रत्याशी ने सारी खो दी हैं और भाजपा प्रत्याशी ने कोई खदान नहीं गंवाई, क्योंकि उनकी थी ही नहीं। तीनों को उम्मीद है कि न जाने कैसे चुनाव परिणाम उनके अच्छे दिन लौटा देगा। दुनिया में लौह खनिज की कीमतें फिर बढ़ रही हैं।

(ये लेखक के अपने विचार हैं।)

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