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टैक्स वसूलने के लिए फिर होगा शेल कंपनियों का रजिस्ट्रेशन, सीबीडीटी ने यह कदम उठाया

पिछले साल रजिस्ट्रेशन खत्म किया गया था, अब एनसीएलटी में दायर की जाएगी याचिका

Dainik Bhaskar

Jul 30, 2018, 11:33 AM IST
अफेयर्स मंत्रालय एनसीएलटी मे अफेयर्स मंत्रालय एनसीएलटी मे

नई दिल्ली. जिन कंपनियों का रजिस्ट्रेशन खत्म किया गया है लेकिन उन पर टैक्स बकाया है, उनके मामले में नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) में याचिका दायर होगी। सीबीडीटी ने आयकर विभाग को 31 अगस्त तक याचिका दायर करने का निर्देश दिया है। रजिस्ट्रेशन रद्द होने से आयकर विभाग इन कंपनियों से टैक्स नहीं वसूल पा रहा है, इसीलिए सीबीडीटी ने यह कदम उठाया है। सीबीडीटी आयकर विभाग की पॉलिसी बनाने वाली सबसे बड़ी बॉडी है। अभी यह साफ नहीं है कि इन कंपनियों पर कितना टैक्स बकाया है।

31 अगस्त तक ट्रिब्यूनल में याचिका दायर करें: सीबीडीटी के दिशानिर्देशों में कहा गया है कि असेसिंग अफसर ऐसे सभी मामलों की पहचान करें और 31 अगस्त तक ट्रिब्यूनल में याचिका दायर करें। इससे पहले सीबीडीटी ने आयकर विभाग को 31 मई तक विशेष टीम बनाने का निर्देश दिया था जो एनसीएलटी के विभिन्न बैंकों में याचिका दायर करेंगे। रजिस्ट्रार ऑफ़ कंपनीज (आरओसी) कॉरपोरेट अफेयर्स मंत्रालय के अधीन आता है। इसलिए सीबीडीटी ने इस मंत्रालय से भी आग्रह किया है कि रीजनल आरओसी आयकर विभाग के नोडल अफसरों को उन कंपनियों की जानकारी दें जिनका रजिस्ट्रेशन रद्द किया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक कॉरपोरेट अफेयर्स मंत्रालय ने सीबीडीटी को आश्वस्त किया है कि एनसीएलटी में उनकी याचिका का वह विरोध नहीं करेगा।

3 लाख डायरेक्टर भी डिस्क्वालिफाई: सरकार इस साल 2.25 लाख कंपनियों का रजिस्ट्रेशन खत्म कर सकती है। 2.26 लाख शेल कंपनियों का रजिस्ट्रेशन 2017-18 में खत्म किया गया था। इन्होंने तीन साल तक सरकार को वित्तीय लेखा-जोखा नहीं दिया था। 2.25 लाख कंपनियों और 7,191 एलएलपी के खिलाफ इस साल कार्रवाई हो सकती है। इन्होंने दो साल से फाइनेंशियल स्टेटमेंट जमा नहीं किए हैं। तीन साल तक कंपनियों की रिटर्न फाइल नहीं करने के कारण 3 लाख डायरेक्टर भी डिस्क्वालिफाई किए गए।

टास्क फोर्स के मुताबिक देश में हैं 16,537 शेल कंपनियां: जिन कंपनियों का रजिस्ट्रेशन खत्म किया गया है जरूरी नहीं कि वे सभी शेल कंपनियां हों और उनके जरिए काले धन को सफेद किया गया हो। 2017 में शेल कंपनियों की पहचान करने वाले टास्क फोर्स ने 16,537 कंपनियों की पहचान शेल के तौर पर की थी। इसके अलावा 16,739 कंपनियां ऐसी थीं जिनके डायरेक्टर इन शेल कंपनियों में भी डायरेक्टर थे। टास्क फोर्स ने 80,000 कंपनियों के शेल कंपनी होने का संदेह जताया था।

17.79 लाख रजिस्टर्ड कंपनियों में से सिर्फ 66% सक्रिय हैं: देश में 17.79 लाख कंपनियां रजिस्टर्ड हैं, लेकिन इनमें से सिर्फ 66% सक्रिय हैं। कंपनी मामलों के मंत्रालय के नए आंकड़ों के अनुसार 30 जून को 11.89 लाख कंपनियां ही बिजनेस कर रही थीं। सक्रिय कंपनियां उन्हें कहा जाता है जो सामान्य बिजनेस करती हैं और नियमित रूप से रिटर्न फाइलिंग करती हैं। 3.7 लाख कंपनियां बिजनेस सर्विसेज में और 2.36 लाख मैन्युफैक्चरिंग में थीं। बिजनेस सर्विसेज में आईटी, रिसर्च एंड डेवलपमेंट, लॉ और कंसल्टेंसी सर्विसेज शामिल हैं। सक्रिय कंपनियों में मुंबई में सबसे ज्यादा 2.34 लाख, दिल्ली में 2.16 लाख और पश्चिम बंगाल में 1.34 लाख हैं।

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