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कैसे मुकेश अंबानी की कंपनी दे रही...इतना सस्ता 4G डाटा, दूसरे क्यों नहीं दे पा रहे

जियो ने सिर्फ 20 महीने में 17 करोड़ के करीब यूजर बना लिए हैं...

Dainik Bhaskar

May 17, 2018, 01:30 PM IST
Reliance Jio Business Model

गैजेट डेस्क। आज वर्ल्ड टेलीकम्युनिकेशन डे (17 मई) है। टेलीकम्युनिकेशन इंडस्ट्री में पिछले सालों में सबसे बड़ी क्रांती रिलायंस जियो ने लाई है। जियो ने सिर्फ टेलीकॉम इंडस्ट्री का बिजनेस पैटर्न ही नहीं बदला बल्कि पूरी इंडस्ट्री को ही बदलकर रख दिया है। यूजर के लिहाज से अब भी एयरटेल (करीब 30 करोड़) सबसे बड़ी कंपनी है लेकिन जियो ने सिर्फ 20 महीने में 17 करोड़ के करीब यूजर बना लिए हैं। वॉइस कॉलिंग फ्री का पैटर्न जियो ने पेश किया। टेक्स्ट मैसेज भी एक निश्चित सीमा तक फ्री हैं। 4G डाटा दूसरी कंपनियों को भी सस्ता करना पड़ा।

हम बता रहे हैं आखिर कैसे जियो इतनी सस्ती सेवाएं यूजर्स को दे रही है और दूसरी कंपनियां ऐसा क्यों नहीं कर रहीं। dainikbhaskar.com ने इस बारे में जियो, एयरटेल के ऑफिशियल स्पोक्सपर्सन सहित आईटी एक्स्पर्ट्स से बात की।

जियो क्यों दे पा रहा है इतनी सस्ती सेवाएं?

- जियो एक नए बिजनेस मॉडल के साथ टेलीकॉम इंडस्ट्री में आई।
- दूसरी कंपनियां वॉइस कॉलिंग से पैसा कमा रहीं थीं लेकिन जियो ने कॉलिंग के बजाए डाटा से पैसा कमाने का मॉडल अपनाया।
- इसी के बाद कंपनी ने सबसे लेटेस्ट टेक्नोलॉजी VoLTE पर निवेश किया।
- VoLTE टेक्नोलॉजी में डाटा के साथ ही वॉइस कॉलिंग की क्वालिटी बहुत अच्छी मिलती है। दूसरी कंपनियां LTE पर काम कर रही हैं, यदि उन्हें VoLTE पर शिफ्ट होना है तो एक बड़ा निवेश करना होगा। हालांकि एयरटेल VoLTE पर अपने नेटवर्क को शिफ्ट करने का काम शुरू कर चुकी है।

- जियो ने VoLTE टेक्नोलॉजी से ही बिजनेस शुरू किया है। जियो को किसी नेटवर्क को अपग्रेड या चेंज नहीं करना बल्कि पूरा इन्वेस्टमेंट नई टेक्नोलॉजी पर है लेकिन एयरटेल सहित दूसरी कंपनियों के सामने पूरा नेटवर्क अपग्रेड करने की चुनौती है।

- LTE टेक्नोलॉजी को 3.5G भी कहा जाता है, दरअसल इसमें वॉइस कॉलिंग पुरानी टेक्नोलॉजी पर काम कर रही थी। इस टेक्नोलॉजी में वॉइस इधर से उधर लाइन सेटअप के जरिए जाती थी। नई टेक्नोलॉजी VoLTE में वॉइस पैकेट के जरिए इधर से उधर जाती है यानी इसमें किसी भी तरह की रुकावट नहीं होती।

- पैरेंट कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज से जियो को स्ट्रॉन्ग फाइनेंशियल सपोर्ट है। यह भी जियो की सफलता के पीछे का बड़ा कारण है।
- रिलायंस पूरे कम्प्यूटर बेस्ड नेटवर्क के साथ काम कर रही है, जबकि कई टेलीकॉम कंपनियां अभी भी पुराने मोड में ही वर्किंग कर रही हैं।

जियो को कैसे मिल रहा है VoLTE से फायदा

- दूसरी कंपनियां सर्किट स्विच्ड नेटवर्क टेक्नोलॉजी का यूज करती हैं। इसमें 4G डाटा का इस्तेमाल करते वक्त यदि किसी का कॉल आता है तो डाटा आना कुछ सेकंड के लिए बंद हो जाता है, क्योंकि नेटवर्क 2G मोड पर स्विच हो जाता है।

- इसमें आपका पूरा नेटवर्क सर्किट स्विच्ड नेटवर्क का इस्तेमाल कर रहा होता है। इसमें प्रति सेकंड 64kbps डाटा दोनों तरफ से ट्रांसफर हो रहा होता है।

- वहीं जियो ने VoLTE (वॉइस ओवर एलटीई) टेक्नोलॉजी में पैसा लगाया है। जियो ने 2G, 3G इक्विपमेंट पर कोई निवेश नहीं किया। कंपनी ने फाइबर ऑप्टिक का नेटवर्क बिछाया है।

- इसमें यूजर जब फोन पर बात करता है तो उसका मोबाइल नेटवर्क 4G से 2G सर्किट पर स्विच नहीं होता, बल्कि मोबाइल 4G डाटा पैकेज पर ही उसकी कॉल को ट्रांसफर करता है। यानी इसमें वॉइस और डाटा अलग नहीं होते। वॉइस डाटा के पैकेज के फॉर्म में ही जा रही होती है।

- इसमें जानकारी पैकेज में ट्रांसफर होती है। जब आप कुछ नहीं बोलते तो पैकेज empty (खाली) हो जाता है। यानी इसमें कोई डाटा नहीं होता। इससे रिलायंस को बड़ा फायदा होता है।

- एक कॉल में उतने डाटा का यूटिलाइजेशन नहीं होता जितना सर्किट स्विच्ड नेटवर्क में होता है।

नुकसान उठाकर, फायदा पहुंचा रहे हैं!

प्रतिस्पर्धियों का तर्क है कि, जियो नुकसान उठाकर यूजर्स को सस्ती सेवाएं दे रहा है। इसी का नतीजा है कि छोटी कंपनियां मार्केट में जम नहीं पा रहीं। एयरसेल दिवालिया होने की कगार पर है। आइडिया-वोडाफोन का मर्जर हो चुका है। दूसरी कंपनियां भी संकट में आ गई हैं।

डाटा कंजप्शन के मामले में इंडिया बना नंबर-1, देखिए अगली स्लाइड में...

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डाटा कंजप्शन के मामले में इंडिया बना नंबर-1


- 20 महीने पहले जब जियो ने टेलीकॉम इंडस्ट्री में कदम रखे थे तब दुनिया में डाटा कंजप्शन के मामले में इंडिया का नंबर 155वां 

था, आज इंडिया सबसे ज्यादा डाटा कंजप्शन करने वाला देश बन गया है। 


- अमेरिका और चाइना दोनों मिलकर जितने डाटा का कंजप्शन करते हैं, उतने डाटा का कंजप्शन सिर्फ इंडिया अकेला करता है। 


- जियो के आने से पहले जहां 1GB डाटा 250 रुपए तक में मिल रहा था वहीं अब इसकी कीमत आधे से भी कम रह गई है। 


- पूरी दुनिया में इतना बड़ा सेटअप पर जियो ही काम कर रहा है। 

 

जियो का टारगेट क्या है


- जियो अगले तीन से चार साल में 50 परसेंट मार्केट शेयर पर कब्जा करना चाहता है। 16 परसेंट मार्केट पर जियो कब्जा कर चुका है।


- आज सबसे बड़ा नेटवर्क जियो के पास है। डेढ़ लाख से ज्यादा टॉवर जियो के पास हैं, एयरटेल के पास 1 लाख के करीब मोबाइल टॉवर हैं। 

 

- जियो का पूरा नेटवर्क ऑप्टिक फाइबर में है ( जियो 2.7 लाख किलोमीटर का फाइबर नेटवर्क इंडिया में बिछा चुका है), जबकि 

एयरटेल सहित दूसरी कंपनियों का बहुत सा नेटवर्क अब भी माइक्रोवैव पर है। ऑप्टिक फाइबर में डाटा स्पीड और वॉइस क्वालिटी दोनों 

अच्छी मिलती हैं।

 

कमाई का मॉडल भी बदल दिया, देखिए अगली स्लाइड में...

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कमाई का मॉडल भी बदल दिया


- इंडिया में जियो के पहले जो कंपनियां काम कर रहीं थीं, उनके रेवेन्यू का 80 परसेंट हिस्सा कॉलिंग से आता था लेकिन जियो ने 

कॉलिंग को ही पूरा फ्री कर दिया। 


- जियो पैसा डाटा बेचकर कमा करा है, इसलिए कंपनी खुद को डाटा कंपनी ही कहती है। 


- जियो की टेक्नोलॉजी पर अब मजबूरी में दूसरी कंपनियों को भी आना पड़ रहा है। 

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