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डाउनलोड करेंभोपाल. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत मिशन में मप्र के 14 जिले पिछड़ गए हैं। खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) करने का इन जिलों को अप्रैल में जो लक्ष्य दिया गया था, वे उसे एक तिहाई भी पूरा नहीं कर पाए। उमरिया जिले में स्थिति सबसे खराब है। यहां सिर्फ आठ फीसदी ही काम हो पाया है। इन स्थितियों के मद्देनजर एक-दो दिन में मुख्य सचिव इन जिलों की समीक्षा कर सकते हैं। चौदह जिलों में छतरपुर, सिंगरौली और दमोह जिले भी शामिल हैं, जिन्हें नीति आयोग ने हाल ही में देश के 100 पिछड़े जिलों में रखा था।
शिवराज ने कहा था- 2 अक्टूबर 2018 तक तमाम जिले होंगे ओडीएफ
पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस ने इन बेहद कम प्रगति वाले जिलों की जानकारी शासन को भेज दी है। साथ यह भी जोड़ा है कि ये 2 अक्टूबर 2018 तक लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर सकते। यहां बता दें कि केंद्रीय पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री उमा भारती के पिछले सप्ताह 12 मई को भोपाल दौरे पर हुए राज्य-स्तरीय स्वच्छता पुरस्कार समारोह में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने घोषणा की थी कि 2 अक्टूबर 2018 गांधी जयंती तक मप्र के तमाम जिले ओडीएफ हो जाएंगे। उमा भारती ने कहा था कि देश को 2 अक्टूबर 2019 तक ओडीएफ कर देंगे।
विभाग की रिपोर्ट में सामने आई सच्चाई
मुख्यमंत्री की इसी घोषणा के बाद पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग हरकत में आया और अप्रैल माह की ही रिपोर्ट टटोली गई तो सामने आया कि 14 जिले मुख्यमंत्री की घोषणा को पूरा नहीं कर पाएंगे। लिहाजा विभाग के अपर मुख्य सचिव ने तुरंत शासन को इसकी जानकारी दी। बताया जा रहा है कि मुख्य सचिव इन 14 जिलों के कलेक्टरों व संबंधित अधिकारियों के साथ बात करेंगे। विभाग के अधिकारिक सूत्र बता रहे हैं कि अप्रैल माह में तो ये जिले पिछड़े ही हैं, पूरे साल के लक्ष्य में भी ये पीछे हैं।
जो काम नहीं करेंगे, हटेंगे
मुख्य सचिव की समीक्षा के बाद इन 14 जिलों में कुछ अधिकारियों पर गाज गिर सकती है। बताया जा रहा है कि शासन इन जिलों के कलेक्टरों को कुछ मोहलत देंगे। इसके बाद भी काम नहीं हुआ तो कार्यवाही की जाएगी।
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