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महाभारत 2019: विपक्षी एकता की पहली बड़ी परीक्षा होगा राज्यसभा का उपसभापति चुनाव

18 जुलाई से शुरू हो रहे मानसून सत्र में होना है चुनाव, 41 साल से कांग्रेस के पास है डिप्टी स्पीकर पद।

मुकेश कौशिक/संतोष कुमार | Last Modified - Jun 30, 2018, 08:36 AM IST

महाभारत 2019: विपक्षी एकता की पहली बड़ी परीक्षा होगा राज्यसभा का उपसभापति चुनाव

नई दिल्ली.सभी दलों की निगाहें मानसून सत्र में होने वाले राज्यसभा के उपसभापति के चुनाव पर लग गई हैं। इसे 2019 में विपक्षी एकता के ट्रेलर के तौर पर भी देखा जा रहा है। क्योंकि यह इस एकजुटता की पहली बड़ी परीक्षा है। कर्नाटक के नाटकीय घटनाक्रम ने भी विपक्षी दलों को एकजुट होने की खुराक दे दी है। वहीं, जम्मू-कश्मीर में पीडीपी से दोस्ती टूटने से भाजपा की राह और मुश्किल हो सकती है।

खास बात यह है कि पिछले 41 साल के उपसभापति का पद कांग्रेस के पास है। वैसे तो पिछले 66 सालों में से 58 साल तक यह पद उसके पास रहा, लेकिन इस बार उच्च सदन में संख्या का संतुलन ऐसा है कि कांग्रेस जीत का दावा नहीं कर सकती। विपक्ष एकजुट होकर सत्ता पक्ष को मात देने की स्थिति में है, लेकिन इसके लिए कांग्रेस समेत 16 विपक्षी दलों को एकजुट होना होगा। इनमें गैर-यूपीए, गैर-एनडीए वाले बीजद और तृणमूल भी हैं। ऐसा हुआ, तो उनके पास कुल 128 वोट होंगे। मगर दो खेमों में बंटे विपक्ष को ऐसे प्रत्याशी की जरूरत होगी, जिस पर सभी सहमत हों। वहीं, भाजपा के सामने एनडीए के घटक दलों को एकजुट रखने की चुनौती है। साथ ही उन दलों का समर्थन भी हासिल करना होगा, जो चार साल के दौरान एनडीए और यूपीए दोनों से दूरी बनाते हुए संतुलन साधते रहे हैं।


अप्रैल में चुनावों के बाद भाजपा 68 सदस्यों के साथ राज्यसभा में सबसे बड़ी पार्टी बन चुकी है। अन्नाद्रमुक सदस्यों को भी अगर भाजपा के खेमे में मान लिया जाए, तब भी उसके पास 113 सदस्य हैं। शिवसेना और अन्नाद्रमुक ने किनारा कर लिया या वोटिंग से दूर रहे, तो एनडीए के लिए अपना उपसभापति बनवाना असंभव हो जाएगा। भाजपा दलित चेहरे के तौर पर मध्यप्रदेश से राज्यसभा सांसद सत्यनारायण जटिया को उतारने का दांव खेलना चाहती है। मगर विपक्ष, भाजपा प्रत्याशी को समर्थन देगा इसकी संभावना बेहद कम है। राज्यसभा में कुछ गैर-एनडीए दल बीच का रास्ता अपनाते रहे हैं। भाजपा की उम्मीद और नाउम्मीदी इन्हीं पर निर्भर करेगी। राष्ट्रपति चुनाव में विपक्ष ने मीरा कुमार को खड़ा कर भाजपा के कोविंद को प्रतीकात्मक टक्कर दी थी।

विकल्प और संभावनाएं

भाजपा

1. आम सहमति से एनडीए का कोई उम्मीदवार बने- पूरी कोशिश, लेकिन मुश्किल है।

2. यूपीए के बाहर के दल जैसे- टीएमसी, बीजद, वाईएसआर कांग्रेस के किसी उम्मीदवार पर दांव लगाएं- काफी संभावना, लेकिन नंबर जुटाना आसान नहीं।

3. आम सहमति से गैर-एनडीए, गैर-यूपीए पार्टी का उम्मीदवार बने- अंतिम विकल्प और बहुत संभव।

कांग्रेस

1. यूपीए के किसी उम्मीदवार पर विपक्ष को एकजुट किया जाए- संभव, पर गैर-यूपीए, गैर-एनडीए दलों का समर्थन जुटाना मुश्किल।

2. यूपीए के बाहर के दल जैसे- टीएमसी, बीजद, वाईएसआर कांग्रेस के किसी उम्मीदवार पर दांव लगाएं- काफी संभावना, लेकिन नंबर जुटाना आसान नहीं।

3. आम सहमति से गैर-एनडीए, गैर-यूपीए पार्टी के उम्मीदवार पर विपक्ष एकजुट हो- बहुत संभावना।

विपक्षी खेमे के संभावित वोट

पार्टीवोटपार्टीवोट
कांग्रेस51इंडियन मुस्लिम लीग01
टीएमसी13टीडीपी06
सपा13टीआरएस06
बसपा04बीजद09
वाम दल07जेडीएस01
डीएमके04केरल कांग्रेस मणि01
आप03वाईएसआर कांग्रेस02
राजद05पीडीपी02

कुल 128 वोट

सत्ता पक्ष के संभावित वोट

पार्टी वोट
भाजपा68
अन्नाद्रमुक13
जदयू06
नामांकित08
शिवसेना03
अकाली दल03
जेएमएम01
निर्दलीय06
अन्य05
कुल113
- मानसून सत्र से पहले 4 मनोनीत सदस्यों का कार्यकाल खत्म हो रहा है। एेसे में जीत के लिए 122 सदस्यों के समर्थन की जरूरत होगी।

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