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डेटा सुरक्षा कानून में यूजर के नुकसान की जिम्मेदारी तय हो: जस्टिस श्रीकृष्ण समिति की सिफारिश

समिति ने रिपोर्ट सौंपी, इसमें यूजर द्वारा सहमति वापस लेने का अधिकार जोड़ने के बारे में कहा गया

DainikBhaskar.com | Last Modified - Jul 28, 2018, 12:20 PM IST

डेटा सुरक्षा कानून में यूजर के नुकसान की जिम्मेदारी तय हो: जस्टिस श्रीकृष्ण समिति की सिफारिश

नई दिल्ली. जस्टिस बी.एन. श्रीकृष्ण समिति ने शुक्रवार को डेटा सुरक्षा पर रिपोर्ट सरकार को सौंप दीं। इसमें व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा, सहमति वापस लेने का अधिकार, नियमों के उल्लंघन पर पेनाल्टी, आपराधिक मुकदमा, डेटा अथॉरिटी का गठन जैसे प्रस्ताव हैं। गूगल, फेसबुक और ट्विटर जैसी विदेशी कंपनियों को भी इस रिपोर्ट का इंतजार था। भविष्य में भारत में उनका बिजनेस इसी पर निर्भर करेगा।

सिफारिशों को संसद में पेश किया जाएगा: सरकार जन-कल्याण, कानून-व्यवस्था, इमरजेंसी, रोजगार आदि के लिए बिना यूजर की सहमति के उसका डेटा ले सकती है। सरकारी और निजी कंपनियां दोनों इस कानून के दायरे में आएंगी। कंपनियों को डेटा भारत में ही स्टोर करना पड़ेगा। जस्टिस श्रीकृष्ण ने आईटी और कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद को रिपोर्ट सौंपी। प्रसाद ने कहा कि सिफारिशों पर सभी पक्षों की राय के बाद इसे अंतिम रूप दिया जाएगा और संसद में पेश किया जाएगा। उन्होंने इसकी कोई समय सीमा नहीं बताई।

समिति की खास सिफारिशें:
1) डेटा की सुरक्षा के लिए आधार एक्ट में संशोधन किया जाए
2) यूजर की सहमति के बिना निजी डेटा की प्रोसेसिंग ना हो। यूजर को नुकसान पर जिम्मेदारी भी तय हो।
3) डेटा देश से बाहर ले जाने के लिए कंपनी यूजर की सहमति ले।
4) डेटा सुरक्षा के लिए आधार एक्ट में संशोधन हो। लेकिन यह पिछली तारीख से लागू ना हो।
5) डेटा प्रोटेक्शन अथॉरिटी का गठन हो। इसके आदेशों पर सुनवाई के लिए सरकार अपीलेट ट्रिब्यूनल बनाए या मौजूदा ट्रिब्यूनल को अधिकार दे।
6) नियम उल्लंघन पर पेनाल्टी का प्रावधान हो। इसकी ऊपरी सीमा तय होनी चाहिए।

कानून का दायरा:व्यक्तिगत डेटा का कलेक्शन, इस्तेमाल, शेयरिंग या प्रोसेसिंग देश में हुआ है तो वह इस कानून के दायरे में आएगा।
संवेदनशील डेटा:पासवर्ड, वित्तीय और स्वास्थ्य संबंधी आंकड़े, पहचान संख्या, सेक्स लाइफ, बायोमीट्रिक और जेनेटिक डेटा, जाति, धर्म या राजनीतिक पसंद को संवेदनशील डेटा माना जाएगा।

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