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डाउनलोड करेंभोपाल. मप्र में एक रिटायर्ड सैनिक खालिद खान पिछले 6 साल से प्रदेश सरकार से अपनी आजीविका के लिए पट्टे पर कृषि भूमि दिए जाने की मांग कर रहे हैं। खालिद राजधानी भोपाल से लगे बैरसिया के ललरिया गांव के रहने वाले हैं। खालिद भूमिहीन हैं। गांव में कृषि योग्य खाली जमीन भी है। लेकिन 35 साल पुराने एक बेअसर हो चुके नियम में संशोधन नहीं हो पाने के कारण प्रदेश में खालिद जैसे हजारों भूमिहीन सैनिकों को खेती के लिए जमीन के पट्टे नहीं मिल पा रहे हैं। क्या है नियम ?
- प्रदेश सरकार ने रिटायर्ड भूमिहीन सैनिकों को पट्टे पर खेती की जमीन देने का नियम 1983 में बनाया था।
- इसमें जमीन आवंटन के लिए पेंशन राशि 350 रुपए से कम होने का प्रावधान है।
- वर्तमान में महंगाई और मुद्रा स्फीति के कारण चपरासी की पेंशन भी 10 हजार रुपए से अधिक होती है।
- लेकिन बदले हालात के बीच बेअसर हो चुके इस नियम के कारण पिछले एक दशक से प्रदेश में किसी भी भूमिहीन सैनिक को जमीन नहीं दी जा सकी है।
'खैरात नहीं मांग रहे'
- रिटायर्ड सैनिक खालिद ने बताया- 'साढ़े चार साल हो गए हैं, लेकिन प्रशासन न तो मेरे आवेदन को खारिज कर रहा है, न ही जमीन आवंटन का आदेश जारी किया जा रहा है।'
- 'आज की तारीख में 350 रुपए से कम पेंशन तो चौकीदार और चपरासी तक को नहीं मिलती, जबकि मैं तो रिटायर्ड फौजी हूं।'
- 'मैं सरकार से कोई खैरात नहीं मांग रहा हूं। अगर सैनिकों को जमीन देना ही नहीं हैं, तो वाहवाही लूटने के लिए ऐसे नियम बना ही क्यों रखे हैं।'
प्रशासन का क्या है कहना?
- बैरसिया के एसडीएम राजीव नंदन श्रीवास्तव का कहना है कि खालिद खान को जमीन आवंटन का मामला 2015 से राजस्व न्यायालय में लंबित हैं। उनकी पेंशन 16 हजार रुपए है। जबकि जिस सैनिक की पेंशन 350 रुपए से ज्यादा है, वह जमीन के लिए पात्र ही नहीं हैं।
- उन्होंने कहा- यह प्रावधान काफी पुराना है, इसलिए राज्य शासन से मार्गदर्शन मांगा है। लेकिन शासन से अब तक हमें कोई निर्देश नहीं मिले हैं।
साढ़े तीन साल से एसडीएम कोर्ट में लंबित है मामला
- 48 वर्ष के खालिद 31 मार्च, 2013 को 19-आर्म्ड रेजीमेंट से रिटायर होकर गांव लौटे थे। 24 साल की उम्र में सेना में भर्ती हुए खालिद ने 20 साल सर्विस की।
- परिवार भूमिहीन है, इसलिए बंटाई पर दूसरों की जमीन पर खेती करते हैं। साढ़े तीन साल से उनका मामला बैरसिया एसडीएम के राजस्व कोर्ट में लंबित है।
- 2012 में जिला सैनिक कल्याण बोर्ड के माध्यम से उन्होंने जमीन दिलाने की मांग शासन से की। जिला प्रशासन ने बैरसिया तहसील को यह मामला सौंप दिया। जमीन भी तलाश ली गई।
- लेकिन 2015 से जमीन आवंटन का मामला बैरसिया एसडीएम कोर्ट में लंबित है। साढ़े तीन साल बीतने के बावजूद प्रशासन उनके प्रकरण को न तो खारिज कर पा रहा है, न ही उन्हें जमीन के पट्टे का आदेश कर पा रहा है।
संभागायुक्त कर चुके संशोधन की सिफारिश
- संभागायुक्त अजात शत्रु श्रीवास्तव ने पिछले साल 30 अगस्त, 2017 को राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव को पत्र लिखकर 1983 में बने भूमिहीन सैनिकों को जमीन का पट्टा देने के नियम में संशोधन करने की सिफारिश की थी।
- भूतपूर्व सैनिक की परिभाषा में लिखा गया है कि जिसकी मासिक पेंशन 325 रुपए से अधिक न हो, उनको ही भूमि आवंटन की पात्रता होगी। लेकिन वर्तमान में किसी भी सैनिक की पेंशन 8 हजार और 20 हजार रुपए से कम नहीं है।
- इस कारण किसी भी भूतपूर्व सैनिक को सरकारी जमीन की पात्रता ही समाप्त हो गई है। राज्य सरकार का यह नियम 35 साल पुराना है, इसलिए अब इसमें संशोधन किए जाने की जरूरत है।
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