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पेशोतन दस्तूर का कॉलम: ज्यादा उम्र में रिटायरमेंट प्लानिंग महंगी पड़ती है

महंगाई का आंकलन करते हुए योजना बनानी चाहिए।

DainikBhaskar.com | Last Modified - Jun 28, 2018, 01:22 PM IST

पेशोतन दस्तूर का कॉलम: ज्यादा उम्र में रिटायरमेंट प्लानिंग महंगी पड़ती है
रिटायरमेंट ऐसा आर्थिक लक्ष्य है जिसकी ज्यादातर लोग अनदेखी करते हैं। जो लोग इस पर पहले ध्यान देते हैं उन्हें इसका ज्यादा फायदा मिलता है। 55 साल की उम्र में रिटायरमेंट की योजना शुरू करना 25 वर्ष की तुलना में 18 गुना महंगा पड़ता है। बचत को ऐसे इंस्ट्रूमेंट में लगाना चाहिए जिसमें बार-बार कंपाउंडिंग की सुविधा हो और रिस्क प्रोफाइल के हिसाब से एडजस्ट किया जाता हो।
रिटायरमेंट के बाद जरूरत : बचत शुरू करने से पहले यह देखें कि आपकी जरूरत कितनी है। औसत 6% महंगाई के हिसाब से रिटायरमेंट के बाद मासिक खर्च को जोड़ें। इससे पता चलेगा कि रिटायरमेंट के बाद आपको हर महीने कितनी रकम की जरूरत होगी। फिर देखें कि इतनी राशि जमा करने के लिए आपको हर महीने कितनी बचत करनी पड़ेगी।
कहां निवेश करें : शुरूआत कम उम्र में करते हैं तो पोर्टफोलियो में 80% इक्विटी रख सकते हैं। उम्र 30 से 40 के बीच है तो इक्विटी फंड में होल्डिंग थोड़ी कम करनी पड़ेगी। जोखिम लेने की क्षमता है तो इससे 70% रख सकते हैं। कम जोखिम वाले 40% पैसा इक्विटी फंड में लगा कर सकते हैं। 40 से 50 की उम्र वाले इक्विटी और डेट में बराबर निवेश कर सकते हैं। कम जोखिम लेना चाहते हैं डेट में 10 से 20% ज्यादा पैसा लगा सकते हैं। अगर आप की उम्र 50 से ज्यादा है तो सुरक्षित निवेश आपकी प्राथमिकता होनी चाहिए।
निवेश की स्ट्रेटेजी : नियमित आय के लिए डेट प्रोडक्ट में निवेश करना चाहिए। एफडी, वरिष्ठ नागरिक बचत योजना, पोस्ट ऑफिस एमआईएस, पेंशन स्कीम आपके पोर्टफोलियो में होने चाहिए। शुरुआती दिनों में इक्विटी में किए गए निवेश को जोखिम से बचाना होगा। इसलिए इक्विटी फंड से धीरे-धीरे पैसा निकाल कर डेट फंड में लगाना चाहिए।
इमर्जेंसी फंड बनाएं : आप अपना पैसा ऐसे बैलेंस फंड में लगा सकते हैं जिसमें इक्विटी एक्सपोजर 65% तक हो। म्यूचुअल फंड स्कीम से पूरी तरह नहीं निकलना चाहते तो सिस्टेमेटिक विथड्रॉल प्लान चुन सकते हैं। इससे आपको नियमित आय होती रहेगी। रिटायरमेंट के बाद कॉर्पोरेट बांड में तभी निवेश करें जब उनकी रेटिंग बहुत अच्छी हो। आर्थिक जिम्मेदारी ना होने पर लाइफ इंश्योरेंस प्रोडक्ट लेने से बचें। यूलिप से भी बचना चाहिए। चिकित्सा जैसी इमरजेंसी जरूरतों के लिए आपात फंड बनाएं। समय-समय पर इस फंड की समीक्षा करते रहें।

पेशोतन दस्तूर, नेशनल सेल्स डायरेक्टर, फ्रैंकलिन टेम्पलटन

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