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नदियां बचाएंगी धार्मिक मान्यताओं से हटकर बनीं योजनाएं

राज्यों के बीच पैदा हुए विवाद सीधे तौर पर नदियों के गिरते जलस्तर से जुड़े हैं।

लखन रघुवंशी | Last Modified - Apr 12, 2018, 09:15 AM IST

नदियां बचाएंगी धार्मिक मान्यताओं से हटकर बनीं योजनाएं

हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में गंगा स्वच्छता पखवाड़े का आयोजन किया गया। ठीक इसी प्रकार कुछ माह पूर्व मध्यप्रदेश के मुख्यममंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में नर्मदा नदी के किनारे पौधारोपण का कार्य व्यापक स्तर पर किया गया था। नदी बचाने के सारे सरकारी प्रयासों के बाद भी नदियों के संरक्षण की स्थिति दिन पर दिन एक गंभीर समस्या का रूप धारण करती जा रही है और स्थिति यहां तक पहुंच गई है कि राज्यों के बीच जल के बंटवारे को लेकर संघर्ष शुरू हो गए हैं। दक्षिण में जहां तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच कावेरी नदी जल वितरण को लेकर विवाद चल रहा है तो वहीं दूसरी ओर हरियाणा और दिल्ली के बीच यमुना जल वितरण को लेकर नए विवाद सामने आ रहे हैं। इतना ही नहीं हाल ही में प्रधानमंत्री द्वारा उद्‌घाटित सरदार सरोवर बांध में पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं होने से गुजरात में सिंचाई के लिए जल वितरण रोक दिया गया और नर्मदा से निकली मुख्य नहरों पर पुलिस का सख्त पहरा है।

राज्यों के बीच पैदा हुए विवाद सीधे तौर पर नदियों के गिरते जलस्तर से जुड़े हैं। अवैध रेत खनन से लेकर औद्योगिक कचरे के निष्कासन ने यमुना नदी के अस्तित्व को दिल्ली में लगभग खत्म कर दिया है। वही यमुना जिसके जल पर दिल्ली की आबादी का एक बड़ा हिस्सा अपनी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए निर्भर है। नदियों को लेकर कुछ माह पूर्व न्याकयालय ने एक महत्वीपूर्ण निर्णय दिया, जिसके अनुसार गंगा और यमुना को जीवित व्यक्ति का दर्जा दिया गया। राष्ट्री य स्वच्छ गंगा मिशन जैसी योजनाओं के बाद भी आवश्यकता है कि नदियों के संरक्षण का कार्य जनभागीदारी के साथ किया जाए। औपचारिकताओं से अलग एवं धार्मिक मान्यताओं से हटकर नदियों के संरक्षण की योजनाएं बनाई जाए। साथ ही नदियों पर बनी बड़ी पनबिजली योजनाओं का निरीक्षण कर यह सुनिश्चित किया जाए कि नदियों का प्रवाह प्राकृतिक रूप से बना रहे। जिससे भविष्य में संभावित जल संकट से योजनाबद्ध रूप से निपटा जा सके साथ ही नदी से जुड़ी लोक संस्कृति को भी बचाया जा सके।

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