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डाउनलोड करेंपटना. रालोसपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष व केंद्रीय मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री उपेंद्र कुशवाहा ने पूछा कि जब चाय वाले का बेटा देश का प्रधानमंत्री हो सकता है, दूसरे के घरों में बर्तन घोने वाली का बेटा डीएम और एसपी हो सकता है, तो दलित, पिछड़े और गरीब का बेटा न्यायाधीश क्यों नहीं हो सकता? शिक्षा में सुधार के साथ ही पार्टी न्यायालय में दलितों, पिछड़ों और सवर्ण गरीबों को आरक्षण दिलाने के लिए हल्ला बोल दरबाजा खोल अभियान चलाएगी। खुल जा सिमसिम बोलने से काम नहीं चलेगा, बल्कि जोरदार हल्ला बोलना होगा।
आज सभी राजनीतिक दलों के लोग अंबेडकर जयंती मना रहे हैं, लेकिन बाबा साहब को सच्ची श्रद्धांजलि तब होगी, जब दलितों और समाज में पिछड़ गए लोगों को अधिकार मिले। रालोसपा दलितों और पिछड़ों के हक में आवाज उठाती रहेगी। शनिवार को विद्यापति भवन में बाबा साहेब भीम राव अंबेडकर की 127 जयंती समारोह को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि शिक्षा सुधार मानव कतार में जब दूसरे दलों के लोग साथ आ गए तो हमें क्या-क्या नहीं कहा गया। 10 अप्रैल को कुछ लोग आरक्षण के विरोध में सड़क पर उतर गए, यह ठीक नहीं है। आरक्षण के पक्ष में जो लोग सड़क पर आ रहे है, उनकी पीड़ा तो समझ में आती है, लेकिन विरोध वाजिब नहीं है। राम मनोहर लोहिया और बाबा साहेब अंबेडकर ने विशेष आरक्षण की बात इसलिए कही कि दलित और पिछड़े भी समाज की मुख्य धारा में शामिल हो जाए।
पूर्व केंद्रीय मंत्री दशई चौधरी ने कहा कि महादलित शब्द असंवैधानिक है। बाबा साहेब ने संविधान में भी दलित शब्द का प्रयोग किया है। महादलित आयोग के पास कोई अधिकार नहीं मिल सका।
प्रदेश अध्यक्ष भूदेव चौधरी ने कहा कि जब तक दलित अपने बच्चों को शिक्षित नहीं करेंगे और संगठित नहीं होंगे, तब तक अधिकार नहीं मिलेगा। बाबा साहेब ने कहा था कि शिक्षित हो, संगठित होकर संघर्ष करो। फेकू राम और लक्ष्मी पासवान ने भी संबोधित किया। मौके पर रामबिहारी सिंह, भूदेव चौधरी, सुरेंद्र प्रसाद सिंह, अभ्यानंद सुमन, हिमांशु पटेल, रेखा गुप्ता, अख्तर नेहाल, भोला शर्मा, अभिषेक झा, अजय कुमार गुड्डू, केतन कुमार और उपेंद्र पासवान आदि मौजूद थे।
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