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डाउनलोड करेंरांची. झारखंड के मेडिकल कॉलेजों में पीजी और अंडर ग्रेजुएट सीटों पर दाखिले के बाद बीच में पढ़ाई छोड़ने वाले छात्राें को 30 लाख रुपए तक जुर्माना देना होगा। साथ ही पीजी की पढ़ाई पूरी करने के बाद झारखंड में तीन साल की सेवा अनिवार्य होगी। पहले यह अवधि एक साल की थी। एडमिशन लेने के बाद छात्रों के मूल प्रमाण पत्र तब तक जब्त रहेंगे, जब तक उनकी पढ़ाई और राज्य में निर्धारित सेवा की अवधि पूरी नहीं हो जाती। इससे संबंधित एक बॉन्ड भरना होगा। स्वास्थ्य विभाग के इस आशय के संशोधन प्रस्ताव पर बुधवार को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी।
काउंसिलिंग के बाद दाखिला न लेने पर भी जुर्माना
स्वास्थ्य मंत्री रामचंद्र चंद्रवंशी और कैबिनेट के प्रधान सचिव एसकेजी रहाटे ने बताया कि ऑल इंडिया और स्टेट कोटे के विरुद्ध ग्रेजुएट और पीजी कोर्स के लिए अंतिम काउंसिलिंग के बाद दाखिला नहीं लेने पर नीट यूपी-पीजी या राज्य सरकार द्वारा नामित संस्थानों द्वारा आयोजित परीक्षा में शामिल होने से एक सत्र के लिए वंचित कर दिया जाएगा। बीच में पढ़ाई छोड़ते हैं तो 20 लाख तक जुर्माना होगा। छात्रवृत्ति राशि भी वसूली जाएगी। पीजी में चयन के बाद एडमिशन न लेने पर 30 लाख देना होगा। 2015 के बाद अब तक 72 स्टूडेंट्स से जुर्माना वसूले गए हैं।
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