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डाउनलोड करेंइंदौर. हाई कोर्ट की डिविजन बेंच ने कैंटोनमेंट बोर्ड की जमीनों के व्यवस्थापन मामले में महत्वपूर्ण फैसला दिया है। हाई कोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा व्यवस्थापन के संबंध में बनाए गए नियमों को सही ठहराते हुए इसे चुनौती देने वाली 27 याचिकाओं को खारिज कर दिया।
शासन की योजना को रहवासियों ने चुनौती दी
कैंटोनमेंट बोर्ड नीमच के दायरे में रहने वालों का व्यवस्थापन करने के लिए सरकार ने नियम जारी किए थे। जो लोग बरसों से कैंटोनमेंट एरिया में रह रहे हैं, उन्हें दस्तावेज पेश करने थे। सरकार उनके निर्माण को दस्तावेजों के आधार पर नियमित कर देती। शासन की योजना को रहवासियों ने चुनौती दी तथा जस्टिस सतीशचंद्र शर्मा, जस्टिस एसके अवस्थी की डिविजन बेंच के समक्ष इन याचिकाओं पर सुनवाई हुई। याचिकाओं में कहा गया कि वह बरसों से इस क्षेत्र में निवास कर रहे हैं। अब अचानक सरकार व्यवस्थापन के नाम पर रहवासियों से रिकॉर्ड तलब कर रही है और नियमित करने का बहाना बना रही है।
वहीं शासन की ओर से कहा गया कि शहर के बीच कैंटोनमेंट बोर्ड की जमीन नगर निगम में समाहित हो चुकी है, लिहाजा शासन के जरिए निगम इन जमीनों का सेटलमेंट कर सकती है। शासन को भी व्यवस्थापन संबंधी नियम बनाने के पूरे अधिकार हैं। वहीं बड़ी संख्या में रहवासियों ने सेटलमेंट के लिए अपने दस्तावेज भी मुहैया करा दिए हैं।
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