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दुर्भाग्य दूर करने के लिए हथेली के किस हिस्से से चढ़ाएं भगवान को जल?

ग्रंथों में मनुष्य की दाईं हथेली का विशेष महत्व बताया गया है। क्योंकि इसी से हम पूजा-पाठ आदि कर्म करते हैं।

Danik Bhaskar | Jun 20, 2018, 04:18 PM IST

रिलिजन डेस्क। भविष्य पुराण के अनुसार, मनुष्य की दाईं हाथ की उंगलियों के सबसे आगे वाले पोरों को देवतीर्थ कहा गया है। भगवान को जल चढ़ाने के लिए उंगलियों के इसी हिस्से का उपयोग किया जाता है। इससे भगवान प्रसन्न होते हैं और दुर्भाग्य दूर हो सकता है। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार मनुष्य के दाएं यानी सीधे हाथ में 5 ऐसी जगह होती हैं जो बहुत ही खास होती हैं। धर्म ग्रंथों में इन्हें 5 तीर्थ कहा गया है। इन तीर्थों से ही मनुष्य देवताओं, पितृ व ऋषियों को जल चढ़ाते हैं।

जिस प्रकार देवताओं को जल चढ़ाने के लिए दाईं हथेली की ऊंगलियों का अगला हिस्सा तय है, उसी तरह पितरों को जल चढ़ाने के लिए और अन्य कामों के लिए भी हथेली में कुछ विशेष स्थान बताए गए हैं। आप भी जानिए हथेली में कहां हैं 5 तीर्थ...


1. देवतीर्थ
इस तीर्थ का स्थान चारों उंगलियों के ऊपरी हिस्से में होता है। इस तीर्थ से ही देवताओं को जल अर्पित करने का विधान है।


2. पितृतीर्थ
तर्जनी (पहली उंगली) और अंगूठे के बीच के स्थान को पितृतीर्थ कहते हैं। इससे पितरों को जल अर्पित किया जाता है।


3. ब्राह्मतीर्थ
हथेली के निचले हिस्से (मणिबंध) में ब्राह्मतीर्थ होता है। इस तीर्थ से आचमन ( शरीर शुद्धि के लिए पानी पीना) किया जाता है।


4. सौम्यतीर्थ
यह स्थान हथेली के बीचों-बीच होता है। भगवान का प्रसाद व चरणामृत इसी तीर्थ पर लेते हैं व यहीं से ग्रहण भी करते हैं।


5. ऋषितीर्थ
कनिष्ठा (छोटी उंगली) के नीचे वाला हिस्सा ऋषितीर्थ कहलाता है। विवाह के समय हस्तमिलाप इसी तीर्थ से किया जाता है।