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अंगारों पर दौड़े और कांटों पर लेटकर दिखाई अपनी भक्ती, बच्चों को भी बना दिया अंधीभक्ति का मोहरा

3 वर्ष पहले
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चक्रधरपुर (जमशेदपुर). मां भगवती मंदिर केरा व पुरानी बस्ती के मां पाउड़ी मंदिर के चैत्र मेला में भक्तों की हठभक्ति आकर्षण के केंद्र में रहा। भक्त अंगारों पर दौड़े व कांटों पर लेटकर हठभक्ति दिखाई। नन्हे  बच्चे को कांटों पर लेटाया। आस्था के नाम पर जारी अंधभक्ति की पराकाष्ठा देखने को मिली। इसे देख किसी का भी कलेजा मुंह को आ जाएगा। ऐसा था मेला...

 

- प्रसिद्ध मां भगवती मंदिर केरा व पुरानी बस्ती के मां पाउड़ी मंदिर में लगनेवाली चैत्र मेला के अंतिम दिन कालिका घट आगमन के बाद भक्तों की हठभक्ति आकर्षण के केंद्र में रहा।
-  मां की प्रति भक्ति जताते हुए सैकड़ों भक्त दहकते अंगारों पर दौड़े व कांटों पर लेटकर भक्ति प्रकट किया। नन्हें  बच्चों को कांटों पर लेटाते व अंगारों में पैदल दौड़ाते जैसे नजारे भी देखने को मिला। 
- इस दौरान बारिश होने पर दहकते अंगारे बूझ गए तो कांटों पर नंगे बदन लोटने की होड़ मच गई।  केरा भगवती मंदिर में कई राज्यों से लाखों श्रद्धालु पहुंचे। 
- हजारों की तादाद में दुकानें लगी है।  इस दौरान केरा मंदिर में पहुंचने वाली कालिका घट दर्शन के लोगों की होड़ मची रही । 
- घट मंदिर तक घटवारी के लाने के दौरान जगह जगह पर श्रद्धालुओं द्वारा पूजा किया गया। केरा मंदिर परिसर में रात को छऊ नाच होने के बाद रात दिन मेला लगा है। 
- इस दौरान मेले में इलेक्ट्रिक झूला, रेल गाड़ी झूला, डिस्को झूला आदि मनोरंजन के साधन लगे हैं।

 

अलौकिक होता है प्रदर्शन

 

- प्रचलन की मानें तो हल्की सी चोट भी दर्द देने वाली होती है। यदि लोहे से चोट चपेट लगे तो लोग सेप्टिक होने के भय से तुरंत इलाज के लिए दौड़ते हैं लेकिन आस्था के इस महात्योहार में अपने शरीर को पीड़ा देने वाले लोग बताते हैं कि इससे उन्हें जरा भी दर्द नहीं होता है। 
- वही स्थानीय जन हिमांशु महतो, पूर्णचंद्र सरदार, बताते हैं कि लोहे की कील से शरीर को छेदने के बाद आज तक किसी भी भक्तों को दर्द नहीं हुआ है।

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