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डॉलर के मुकाबले रुपया अब तक के सबसे निचले स्तर 69.10 पर पहुंचा, विदेश में घूमना-पढ़ना महंगा होगा

रिकॉर्ड निचला स्तर छूने के बाद रुपए में रिकवरी, 68.79 पर बंद हुआ।

DainikBhaskar.com | Last Modified - Jun 28, 2018, 07:05 PM IST

  • डॉलर के मुकाबले रुपया अब तक के सबसे निचले स्तर 69.10 पर पहुंचा, विदेश में घूमना-पढ़ना महंगा होगा
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    2017 में रुपया 5.76% मजबूत हुआ था लेकिन 2018 में अब तक करीब 8% टूट चुका है।- सिंबॉलिक
    • मोदी सरकार में रुपया दूसरी बार रिकॉर्ड निचले स्तर पर
    • मई 2014 में मोदी सरकार आने के वक्त रुपया 60 के आस-पास था

    मुंबई.डॉलर के मुकाबले रुपया अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। गुरुवार को रुपया 28 पैसे कमजोर होकर 68.89 पर खुला और 69.10 तक चला गया। इससे पहले 24 नवंबर 2016 को ये 68.86 तक गिर गया था। क्रूड महंगा होने से चालू खाता घाटा और महंगाई बढ़ने की आशंका बन गई है। इस वजह से रुपए पर दबाव है। बैंक और इंपोर्टर्स की ओर से डॉलर की मांग बढ़ने से भी रुपए में कमजोरी आई। हालांकि बाद में रुपए में कुछ सुधार हुआ और ये 68.79 पर बंद हुआ। बुधवार को रुपया 37 पैसे टूटकर 68.61 पर बंद हुआ था।

    रुपया कमजोर होने का असर ये होगा

    रुपया कमजोर होने से चार असर : पहला- भारतीयों के लिए विदेश यात्रा महंगी हो जाएगी। दूसरा- विदेश में पढ़ाई का खर्च भी बढ़ जाएगा। यात्रा अौर पढ़ाई इसलिए महंगी होगी क्योंकि करेंसी एक्सचेंज के लिए डॉलर के मुकाबले ज्यादा रुपए चुकाने होंगे। तीसरा- भारत के लिए क्रूड का इंपोर्ट महंगा हो जाएगा। इससे महंगाई बढ़ सकती है। चौथा- आईटी और फार्मा कंपनियों को रुपए की कमजोरी से फायदा होगा क्योंकि इनका बिजनेस एक्सपोर्ट से जुड़ा है।

    पांच साल में रुपए के तीन कमजोर स्तर

    तारीखडॉलर के मुकाबले रुपया
    28 जून 201869.10
    24 नवंबर 201668.86
    28 अगस्त 201368.80

    क्रूड 77 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर: अमेरिका ने भारत समेत सभी देशों से 4 नवंबर तक ईरान से कच्चे तेल का आयात बंद करने को कहा है। ऐसा नहीं करने पर प्रतिबंध लगाने की चेतावनी दी है। इस खबर के बाद कच्चे तेल में उछाल आ गया। क्रूड 77 डॉलर प्रति बैरल के पार चला गया है। लीबिया और कनाडा से सप्लाई बाधित होने की आशंका से भी क्रूड में तेजी आई। विदेशी मुद्रा के कारोबारियों का कहना है क्रूड में तेजी और रुपए में कमजोरी से भारत को दोहरी मार झेलनी पड़ेगी।

    आरबीआई की रिपोर्ट का असर: रिजर्व बैंक ने मंगलवार को फाइनेंशियल स्टैबिलिटी रिपोर्ट जारी की। इसके मुताबिक बैंकिंग इंडस्ट्री की हालत आगे और खराब हो सकती है। मार्च 2018 में देश के सभी बैंकों का ग्रॉस एनपीए 11.6% था, जो मार्च 2019 तक 12.2% तक जा सकता है। रिजर्व बैंक ने कहा है कि स्थितियां ज्यादा खराब हुईं तो एनपीए 13.3% तक पहुंच सकता है। इस रिपोर्ट की वजह से करेंसी मार्केट में दबाव बढ़ा है।

    अमेरिका-चीन के बीच ट्रेड वॉर: दोनों देशों के बीच व्यापार को लेकर लगातार बढ़ते तनाव और बयानबाजी की वजह से मुद्रा कारोबारियों की चिंता बढ़ गई है। अमेरिका की नीतियों की वजह से कई देशों से इसके व्यापारिक रिश्तों पर नकारात्मक असर दिख रहा है।

    शेयर बाजार में गिरावट: बिकवाली के दबाव में बुधवार को सेंसेक्स 272.93 अंक और निफ्टी 97.75 प्वाइंट्स गिरकर बंद हुए। शेयर बाजार से पैसे की निकासी और विदेशी निवेशकों की ओर से बिकवाली बढ़ने की आशंका से भी रुपए पर असर पड़ा। शेयर बाजार में गुरुवार को भी गिरावट रही। सेंसेक्स 179.47 अंक गिरकर 35,037.64 पर और निफ्टी 82.30 प्वाइंट नीचे 10,589.10 पर बंद हुआ।

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    बुधवार को रुपया 37 पैसे टूटकर 68.61 पर बंद हुआ ।- सिंबॉलिक
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    इंपोर्ट-एक्सपोर्ट और विदेशी मुद्रा भंडार रुपए पर असर डालने वाले कारक हैं।- सिंबॉलिक
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