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डाउनलोड करें- सालाना 50 हजार टन कार्बन डाइ ऑक्साइड का उत्सर्जन रोकेगा फ्लोटिंग स्टेशन
- पर्यावरणविद इसे खतरनाक बताते हुए न्यूक्लियर टाइटैनिक का दर्जा दे चुके हैं
मुरमैन्स्क. रूस ने अपना पहला तैरता हुआ एटमी पावर स्टेशन (परमाणु संयंत्र) दुनिया को दिखाया। अब तक किसी देश के पास ऐसा संयंत्र नहीं है। इसे न्यूक्लियर पावर फर्म रोसेटोम ने सेंट पीटर्सबर्ग में तैयार किया है। जहां से शनिवार को यह मुरमैन्स्क पहुंचा। यहां परमाणु ईधन लोड होने के बाद यह पूर्वी साइबेरिया के लिए रवाना होगा। अगले साल तक इसे उत्तर-पूर्व में स्थित पेवेक बंदरगाह ले जाया जाएगा। इस स्टेशन का नाम एकेडेमिक लोमोनोसोव है, जो 2 लाख आबादी वाले शहर के लिए बिजली पैदा करने की क्षमता रखता है।
एकेडेमिक लोमोनोसोव क्या है?
- रूस के इस परमाणु ऊर्जा संयंत्र की लंबाई 144 मीटर, चौड़ाई 30 मीटर और वजन 21,000 टन है। इसमें 35 मेगावाट के दो न्यूक्लियर रिएक्टर हैं, जो रिएक्टर बर्फ के पहाड़ों को काटने वाले आइसब्रेकर शिप के रिएक्टर की तरह हैं। संयंत्र की क्षमता इतनी है कि यह 2 लाख आबादी वाले शहर के लिए बिजली पैदा कर सकता है।
दूरवर्ती क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति होगी
- इस तैरते हुए संयंत्र से दूरदराज के इलाकों में गैस और तेल उत्खनन प्लेटफार्मों को बिजली मिलेगी। ऑपरेशन इंचार्ज ने बताया कि ऐसे रिएक्टर की मदद से सालाना 50 हजार टन कार्बन डाइ ऑक्साइड का उत्सर्जन रोका जा सकता है।
पर्यावरणविद चिंता जता चुके हैं
- पर्यावरणविदों इस संयंत्र को न्यूक्लियर टाइटैनिक बता चुके हैं। वहीं, ग्रीनपीस ने एकेडेमिक लोमोनोसोव को तैरता हुआ चेर्नोबिल करार दिया। विशेषज्ञों का कहना है कि आर्कटिक महासागर में तैरते हुए परमाणु रिएक्टर यहां के मौसम और हवाओं को देखते हुए खतरनाक हो सकते हैं।
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