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रूस की जेलों में गूँजेंगे ठहाके

7 वर्ष पहले
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रूस की जेलों की ख़राब हालत मज़ाक का विषय नहीं हैं, लेकिन ऐसा लगता है कि न्याय मंत्रालय का मानना है कि मज़ाक के सहारे कैदी अपना समय जेल के अंदर बेहतर ढंग से काट सकते हैं.

इज़वेस्टिया अख़बार में छपी ख़बर के अनुसार न्याय मंत्रालय का कहना है कि जेलकर्मियों का मुख्य काम कैदियों के तनाव को काबू में रखना हो गया है और \'व्यंग्य और मज़ाक\' से इससे निपटने में मदद मिल सकती है.

विभाग के एक शोधकर्ता व्लादिस्लाव ग्रिब का कहना था कि तनाव को कम करने के लिए मज़ाक के इस्तेमाल पर अचरज नहीं होना चाहिए क्योंकि सामान्यतः कैदी ख़ुश नहीं रहते हैं.

ग्रिब ने अख़ाबार से कहा कि मालिश और ध्यान जैसे राहत पाने के पारंपरिक उपाय \'जेल के माहौल में व्यावहारिक नहीं होते.\'

\'चुटकुला पसंद नहीं आया\'

इस प्रस्ताव का कुछ जेल मनोचिकित्सकों ने स्वागत किया है.

मिखाइल देबोल्स्की ने अख़बार से कहा, \"कैदियों को यह महसूस होना चाहिए कि वे भी इंसान हैं. यह महत्वपूर्ण है कि उनकी मानवीय गरिमा को ठेस न पहुंचाई जाए.\"

उन्होंने कहा, \"मज़ाक और व्यंग्य से वे चीज़ों को ज़्यादा गहराई से समझ सकते हैं.\"

लेकिन कुछ लोग जेल के माहौल में मज़ाक किया जाने से सहमत नहीं है. ऐसे लोगों का मानना है कि कुछ नस्ली मज़ाक कई बार झगड़े का कारण बन जाते हैं.

जेल के एक बहुत पुराने शिक्षक इस विचार का स्वागत मज़ाक के साथ ही करते हैं.

वह कहते हैं, \"ज़रा हमारी रिपोर्ट की कल्पना कीजिए. पिछली तिमाही में हमने 150 बार चुटकुले सुनाए, जिनमें से 149 पर हंसा गया लेकिन एक मौके पर कैदियों को मज़ाक पसंद नहीं आया और उन्होंने जेल को जलाकर खाक कर दिया.\"

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