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डाउनलोड करेंसमीर हाशमी
बीबीसी संवाददाता
पिछले कुछ साल से गोवा का पर्यटन उद्योग रूसी पर्यटकों की ज़रूरतों के हिसाब से सुविधाएं उपलब्ध करवा रहा था.
यहां के कई तटों पर रूसी पर्यटकों की सुविधा के लिए साइन बोर्ड और मेन्यू तक रूसी भाषा में लिखे नज़र आते हैं.
लेकिन रूबल की गिरती क़ीमत और रूसी अर्थव्यवस्था में आई मंदी का सीधा असर गोवा के पर्यटन उद्योग पर पड़ रहा है.
पढ़िए पूरी रिपोर्टगोवा रूसी पर्यटकों के प्रिय स्थलों में से था और रूसी यहां के प्रिय पर्यटक थे- क्योंकि वह खुलकर ख़र्च करते थे और मस्ती पसंद थे.
पिछले दशक में दोनों की ऐसी जुगलबंदी बनी कि कई तटों को स्थानीय लोग \'छोटा रूस\' ही कहने लगे. यहां के साइनबोर्ड, रेस्तरां के मेन्यू- सब रूसी भाषा में लिखे नज़र आते थे.
पिछले साल 2,00,000 से ज़्यादा रूसी पर्यटक गोवा आए थे लेकिन रूबल के गिरने से रूसी पर्यटकों की संख्या में भी कमी आई है.
रूस से आने वाली सैकड़ों चार्टर्ड उड़ानें रद्द कर दी गईं और जो आई भीं, वे काफ़ी सोच-विचार के बाद.
एक रूसी पर्यटक ने बीबीसी से बातचीत में कहा, \"रूबल कमज़ोर हो गया है, डॉलर मज़बूत- इसलिए अब हमारी क्षमता पिछले साल जितनी नहीं रह गई है.\"
एक अन्य रूसी पर्यटक का कहना था, \"मेरे बहुत से दोस्त जो नए साल पर कहीं घूमने जाते थे- गोवा भी आते थे- इस साल कहीं नहीं गए. वे पैसा बचा रहे हैं ताकि संकट जारी रहने पर तैयार रहा जाए.\"
पर्यटन उद्योग के रूसियों पर इतना निर्भर होने से स्थानीय व्यापारियों पर इसका सीधा असर पड़ रहा है.
भारतीय पर्यटकगिरीश जयराम पिछले चार साल से बोरा-बोरा रेस्तरां चला रहे हैं. वह कहते हैं जो रूसी आए भी हैं वह पहले के मुक़ाबले कम ख़र्च कर रहे हैं.
वह कहते हैं, \"मेरा धंधा पिछली बार के मुक़ाबले 50 फ़ीसदी तक कम है. पिछली बार तगड़ी मांग को देखते हुए मैंने इस साल ज़्यादा निवेश किया था.\"
\"लेकिन इस समय स्थिति इतनी ख़राब है कि मैं अपने कर्मचारियों की तनख्वाह देने के लिए भी जूझ रहा हूं. यह बहुत मुश्किल वक़्त है.\"
ऐसा नहीं है कि रूसी मंदी का नुक़सान सिर्फ़ भारतीय व्यापारियों को ही है. तट के साथ बने कई बार और रेस्तरां के मालिक रूसी हैं, जो अपने देशवासियों की ख़ातिर कर पैसा कमाना चाह रहे हैं.
गोवा भारतीयों के बीच भी पसंदीदा सैरगाह है. देसी पर्यटकों की आमद घाटे को कुछ कम कर सकती है.
और पर्यटन विभाग एक बार फिर वही ग़लती नहीं दोहराना चाहता. इसलिए दुनिया के अन्य देशों के पर्यटकों को लुभाने की कोशिश भी की जा रही है.
\'कोशिश\'गोवा के पर्यटन विभाग के निदेशक अमय अभयंकर कहते हैं, \"अगर आप अमरीका से वीज़ा ऑन अराइवल योजना को देखें तो पाएंगे कि यह बहुत उत्साहजनक है.... इसलिए हम अमरीका में बहुत सारी प्रचार गतिविधियां शुरू करने जा रहे हैं.\"
\"इसके अलावा स्कैंडिविनियाई देशों, जैसे कि फ़िनलैंड, स्वीडन, नॉर्वे, पर भी हमारा विशेष ध्यान है. हम पारंपरिक बाज़ारों- जर्मनी और ब्रिटेन से भी पर्यटकों को बड़ी संख्या में लाने की कोशिश करेंगे.\"
गोवा का पर्यटन सीज़न सामान्यतः फ़रवरी के बाद उतार पर रहता है. ऐसे में अगर देर से पर्यटक आते भी हैं तो कुछ के लिए इसका कोई फ़ायदा नहीं रहेगा.
रूसी पर्यटकों पर पूरी तरह निर्भर व्यापारियों को उम्मीद है कि यह महज़ एक साल की छुट्टी जैसा ही होगा और गोवा पर्यटन जल्द ही फिर से रफ़्तार पकड़ लेगा.
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