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महाभारत 2019: मुस्लिम तुष्टीकरण के आरोपों से हम 44 सीटों पर सिमटे- सलमान खुर्शीद

सोनिया की बेटी प्रियंका के राजनीति में आने के सवाल पर बोले खुर्शीद - उनका परदे के पीछे काफी अहम रोल।

Bhaskar News | Last Modified - May 24, 2018, 07:32 AM IST

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    सलमान खुर्शीद ने कहा हिन्दुस्तान में कोई सच सुनने को तैयार नहीं होता, क्योंकि सच में मोटिव ढूंढा जाता है। -फाइल

    नई दिल्ली. कांग्रेस नेता और पूर्व कानून मंत्री सलमान खुर्शीद ने जब कहा कि उनकी पार्टी के दामन पर भी मुस्लिमों के खून के दाग हैं, तो सवाल उठा कि कहीं पार्टी ने अपनी मुस्लिमपरस्त छवि बदलने के लिए तो यह बयान नहीं दिलवाया? भास्कर के मुकेश कौशिक और अमित निरंजन ने खुर्शीद से ऐसे ही विषयों पर सवाल किए।

    Q. आपने कुछ दिन पहले कहा था कि कांग्रेस के दामन पर भी मुस्लिमों के खून के दाग थे, इसका आशय क्या था? कौन से खून से रंगे हाथ की बात आप कर रहे थे?
    A. विडम्बना है कि रिपोर्ट ये नहीं हुआ कि दामन पर दाग थे, रिपोर्ट ये हुआ कि खून से हाथ रंगे हैं।

    Q. फिर भी, आपको ये कहना ही क्यों पड़ा?
    A. आम जनता के सामने स्वीकार करना है कि हमारे ऊपर भी कुछ प्रश्न चिह्न लगे हैं। कुछ लोग कांग्रेस से असंतुष्ट होने के कारण आरोप लगाते हैं। कुछ सिख और मुस्लिम समाज के लोग कांग्रेस पर आरोप लगाते हैं। इनके आरोपों का हम जवाब भी देते हैं। जवाब देने के दो रास्ते हैं। एक बहस करें कि आप जो कह रहे हैं वह सरासर गलत है और दूसरा रास्ता है कि मानो यह सही है तो अब हमें क्या करना है। ये बताओ -आगे देखें या पीछे देखें।

    Q. क्या ये सही है कि दामन पर दाग हैं?
    A. हिन्दुस्तान में कोई सच सुनने को तैयार नहीं होता, क्योंकि सच में मोटिव ढूंढा जाता है। कोई अपना दर्द बयां नहीं कर सकता कि मैं विफल रहा और जो नहीं होना चाहिए वो मेरे वक्त में हुआ। अगर मेरे होते हुए ऐसा हुआ है जिसने मुझे दुख पहुंचाया है। तो यह वही बात नहीं है कि ऐसा मैंने किया है। हमारे समाज में बहुत सारी त्रुटियां हैं।

    Q. आपकी पार्टी ने आपका साथ दिया?
    A. मुझे गर्व इस बात का है कि मेरी पार्टी और नेताओं ने मेरा साथ दिया, जबकि आमतौर पर कोई भी पार्टी संकोच करती है कि यार तुमने अब ये कौन-सा नया झमेला खड़ा कर दिया।

    Q. कहीं ऐसा तो नहीं कि पार्टी ने जानबूझकर अपने पुराने, विश्वस्त और जिम्मेदार नेता से ऐसा बयान दिलवाया ताकि प्रो-मुस्लिम छवि से निजात पाकर सॉफ्ट हिन्दुत्व का चेहरा निखारा जा सके?
    A. मुझे कई लोगों ने बताया कि इतना सब होने के बाद भी बीजेपी ने इसका इस्तेमाल क्यों नहीं किया। आप एक ही समय में तुष्टीकरण की बात करो और ये भी कहो कि इन्होंने तुष्टीकरण की बात मान ली। ये दोनों बातें एक साथ नहीं चल सकती हैं। इसलिए भाजपा ने इस मामले को उठाया ही नहीं और दबा दिया।

    Q. क्या आपसे पार्टी नेतृत्व ने नहीं पूछा कि ऐसा बयान क्यों दिया?
    A. पहले दिन पार्टी ने खुद को इस बयान से अलग कर लिया था। पार्टी प्रवक्ता ने कह दिया था कि पार्टी का इससे वास्ता नहीं है, किसी को भी ऐसा बयान नहीं देना चाहिए।

    Q. सुप्रीम कोर्ट में राम मंदिर की प्रतिदिन की सुनवाई का आपने विरोध क्यों किया?
    A. हमने विरोध नहीं किया। जो वकील मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड से अपना पक्ष रख रहे थे, उन्होंने ऐसा कहा। कांग्रेस का इससे ताल्लुक नहीं है।

    Q. सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस को लेकर महाभियोग का जो नोटिस लेकर कांग्रेस आई थी, उस पर आपकी राय जुदा थी?
    A. देखिए मेरी राय जुदा नहीं थी। मुझसे इस बारे में पार्टी ने चर्चा नहीं की, क्योंकि मैं पार्लियामेंट का सदस्य नहीं हूं।

    Q. मतलब पार्टी का ये कदम ठीक नहीं था?
    A. मुझे उस पर सहमति देने का मौका नहीं मिला, मैं इसी बात से संतुष्ट हूं कि कम से कम मेरे हाथ से ऐसा काम करने का मौका नहीं मिला।

    Q. तीन तलाक पर पार्टी ने जो रुख अपनाया है क्या वह बीजेपी को फायदा पहुंचाने वाला नहीं है?
    A. मैंने आपको पहले भी कहा था कि कहीं पर बीजेपी इसका फायदा उठाए तो हमें हाथ रोकना पड़ेगा। थोड़ा-सा हमें वहां पर कूटनीति का उपयोग करना पड़ेगा। ये तीन तलाक मसला भाजपा की अवैध मुहिम है।

    Q. क्या प्रियंका गांधी गेमचेंजर हो सकती हैं अगर वह राजनीति में आएं?
    A.देखिए, वे अभी भी गेमचेंजर हैं। उन्होंने जिस तरह से राहुल और पार्टी को सपोर्ट किया है। जैसे काम कर रही हैं, उससे पार्टी को सपोर्ट मिलता है। पर्दे के पीछे उनका बहुत ही अहम रोल है।

    Q. क्या उन्हें पर्दे के सामने नहीं आना चाहिए?
    A. वे परदे के सामने आ जाएं तो बहुत अच्छा है। हालांकि यह परिवार का मामला है।

    Q. क्या मोदी का मुकाबला करने के लिए राहुल में वह क्षमता है?
    A. हां, क्षमता है। मोदी का प्रभाव खत्म हो रहा है जो बड़ा खोखला भी है।

    Q. राहुल के नेतृत्व में लगभग सभी जगह सत्ता गंवाई है। क्या कांग्रेस अभी भी राहुल के नेतृत्व में चुनाव लड़ना चाहेगी?
    A. हम लोगों के मन में एक शब्द भी ऐसी कोई शंका नहीं है कि वह नेतृत्व नहीं कर सकते। मैं मानता हूं कि जिन परिस्थितियों में कांग्रेस पार्टी है और राहुलजी जिस तरह से नेतृत्व कर रहे हैं कोई और लीडर होता तो आप अनुमान भी नहीं लगा सकते हैं कि उसका क्या होता।

    Q. अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में जिन्ना के फोटो का विवाद क्या रंग लेगा?
    A. यूनिवर्सिटी को फैसला लेने का हक होना चाहिए कि किसका फोटो लगाए। मैं दुआ करता हूं कि एएमयू को खुद ही सद‌्बुद्धि आए।

    Q. यानी अभी उन्हें सद‌्बुद्धि नहीं है?
    A. अगर मैं हां कह दूंगा तो लोग मुझे भी उस जमात में मान लेंगे जो हमले कर रहे हैं।

    Q. 2014 का जनादेश आने के बाद से क्या कांग्रेस मानकर चल रही है कि मोदी के रहते मुस्लिम वोट कांग्रेस को ही मिलेगा, उन्हें क्यों मनाया जाए?

    A. ऐसा नहीं है, जब आप ऐसे विरोधी का सामना करते हैं, जो खेल सच्चाई से नहीं खेलता है तो रणनीति में परिवर्तन करना पड़ता है। हम जो अल्पसंख्यकों के प्रति दायित्व का पालन करते थे इस पर उन्होंने तुष्टीकरण का लेबल लगाया। सच्चर समिति इंसाफ के लिए बनी थी, उसे भी गलत तौर पर पेश किया गया।

    Q. सच्चर कमेटी अपीजमेंट के लिए नहीं थी?
    A. नहीं, सच्चर कमेटी एक इंसाफ था। लेकिन आरोप लगता था कि हम तुष्टीकरण कर रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ मुसलमानों की तरफ से हमें कहा जाता था कि छींटा हम पर डाल रहे हो।

    Q. क्या कांग्रेस ने भी अल्पसंख्यक वोटरों के मन में कंन्फ्यूजन की स्थिति पैदा नहीं की? जैसे राम मंदिर का ताला राजीव गांधी ने खुलवाया था।
    A. ताला राजीव सरकार ने नहीं, कोर्ट ने खोला था।

    Q. तब मुस्लिमाें को धक्का तो नहीं लगा?
    A. तो क्या उनको ये समझ में नहीं आता है कि उनकी वजह से और उनके तुष्टीकरण के आरोप की वजह से आज हम 44 पर ठहर गए हैं। अगर कोई कहना चाहे तो कह सकता है कि इससे मुसलमानों का क्या लेना-देना है। कांग्रेस निकम्मी थी इसलिए 44 पर आ गई है, ऐसा नहीं था। हमने बहुत अच्छी सरकार दी थी। ये सब करने के बाद हम पर ये आरोप लगे कि न तो हम विकास कर सकते हैं और न ही इंसाफ दे सकते हैं। हम उन्हें इंसाफ कैसे देते। उन्होंने कमेटी बैठाई और सच्चर कमेटी के माध्यम से कहा कि पूरे देश में मुसलमानों की स्थिति दलितों से भी खराब है। इस बात को आधार बनाकर उन्होंने ही हमसे कहा कि तुम क्या बोल रहे हो मियां अब तो सच्चर कमेटी ने कह दिया कि देखिए तुमने हमारे साथ क्या किया। इसके बाद तो हम कहीं के नहीं रहे।

    Q. क्या मुस्लिम वोट की वैल्यू खत्म हो गई है?
    A. ये तो मुस्लिम समाज को समझना चाहिए कि आपके समाज के कितने लोग संसद में हैं। आपके समाज की आवाज कहां-कहां सुनी जा रही है। लोग सुझाव देते हैं कि आपकी जो अलग पहचान है आप पहले उसको समाप्त करिए और घुलमिल जाइए। तब मैं उन लोगों से पूछता हूं कि क्या करना होगा। उनका सुझाव मानकर बुर्का-टोपी उतार देते हैं। उसके बाद खुलकर कहीं नमाज न पढ़ें। पहचान अगर समाप्त कर देंगे तो किसी को क्या मिलेगा।

    Q. लेकिन राहुलजी नहीं समझते हैं ऐसा। पिछले एक साल में हुए चुनावों में उन्होंने अपना चुनाव प्रचार मंदिरों और मठों में दर्शन करके शुरू किया। लेकिन इस दौरान वे एक भी मस्जिद में नहीं गए?
    A. हम जब राजनीति में आए थे तो हम भी मंदिरों में गए। तब हमारे खिलाफ ही फतवा निकलता था। राहुल गांधीजी मजारों में भी गए हैं। मैं चुपचाप नमाज पढूं और कोई यह कहना शुरू कर दे कि मैं नमाज नहीं पढ़ता। कभी-कभी राजनीति में कोई पैगाम देने के लिए, संकेत देने के लिए ऐसा करना पड़ता है।

    Q. क्या इससे मुसलमानों को नहीं लगेगा कि हम बेसहारा हो गए, कांग्रेस का ही सहारा था?
    A. तो मुसलमान खुलकर कांग्रेस को सहारा दें ताकि कांग्रेस फिर से इनका सहारा बन सके। देखिए हिन्दू और मुस्लिमों की एकता सबसे बड़ा सरमाया है इस मुल्क का। चाहे वो अशफाकउल्ला हों चाहे संत कबीर हों।

    Q. टोकन के लिए ही सही, क्या राहुल गांधी को मस्जिद में भी नहीं जाना चाहिए?
    A. वे मस्जिद क्यों जाएं। उन्हें नमाज थोड़े पढ़नी है। हां, वे दरगाह में गए हैं। वैसे हम ही कितना मस्जिद जाते हैं।

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