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आसान नहीं संविदा कर्मचारियों का संविलियन, देनी पड़ सकती है परीक्षा

3 वर्ष पहले
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भोपाल.   चुनावी साल में सरकार कर्मचारियों के हर कैडर को साधने में तो  जुटी है, लेकिन उसे कई दिक्कतें भी हो रही हैं।  प्रदेश के संविदा कर्मचारियों के संविलियन को लेकर भी कई अड़चने आ रही हैं। संविलियन को लेकर शासन इन कर्मचारियों के सामने परीक्षा देने, बोनस अंक देने और ग्रेडेशन का प्रावधान रख सकता है। जीएडी द्वारा तैयार किए गए मसौदे में इस तरह के प्रावधान का किया गया है। जीएडी ने संविदा नियुक्ति नियम 2017 में थोड़ा बहुत फेरबदल करके कई पेंच भी लगा दिए हैं।


डेढ़ महीने पहले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा था कि संविदा नीति अन्याय पूर्ण है। इसके बाद जीएडी ने संविलियन की कवायद शुरू कर दी थी। इसके लिए विभागों से जानकारी मांगी गई  थी। मुख्य सचिव ने पिछले महीने विभिन्न विभागों के प्रमुख सचिवों की बैठक ली थी। इससे पहले राज्य कर्मचारी कल्याण समिति के चेयरमैन रमेशचंद्र शर्मा ने मप्र संविदा कर्मचारी अधिकारी महासंघ, संयुक्त मंच समेत अन्य संघों के ज्ञापन के बाद शासन को प्रस्ताव भेजा था।

 

जीएडी के हाथ लगी यह जानकारी

- 1,50256 पद खाली।

- 23500 पद बैकलॉग के खाली।

- 1.10 लाख पात्र संविदा कर्मचारी।

- 55 हजार पांच साल से ज्यादा सेवा अवधि वाले।

 

जीएडी के मसौदे में ऐसे-एेसे प्रावधान

- संविदा कर्मचारी को जिला स्तरीय चयन समिति की सिफारिश के बाद ही हटाया जा सकता है। ऐसे कर्मचारी संभाग स्तरीय समिति के सामने अपील भी कर सकेंगे।

- इन कर्मचारियों को वेतन मूल विभाग द्वारा ही  दिया जाएगा। अभी दस फीसदी इन्क्रीमेंट होगा और हर साल पांच-पांच प्रतिशत वेतन बढ़ेगा।
- संविलियन या नियमितीकरण के लिए पहले से तय पदों पर पीईबी द्वारा ली जाने वाली परीक्षा एवं अंकों में वेटेज दिया जाएगा। हर साल 2 अंक बतौर बोनस दिए जाएंगे, अधिकतम 5 साल तक 10 अंक ही दिए जाएंगे।
-  जिन्हें पांच साल पूरे जाएंगे वे करार और कार्य आधारित मूल्यांकन से मुक्त रहेंगे। इसमें भी एक पेंच यह है कि सालाना वेतन वृद्धि नियंत्रणकर्ता अधिकारी द्वारा दी गई ग्रेड के आधार पर ही की जाएगी।
- सीआर का रिकार्ड रखा जाएगा। ईएल नहीं मिलेगी। मेडिकल लीव 15 दिन की मिलेगी, लेकिन यह संभाग स्तरीय समिति के अनुमोदन के बाद ही दी जाएगी।

 

महासंघ नाखुश, कहा- सीएम तो चाहते हैं रेगुलर करें, अफसर लगा रहे अड़ंगे

जीएडी के मसौदे को लेकर संविदा कर्मचारी अधिकारी महासंघ नाखुश है। प्रदेशाध्यक्ष रमेश राठौर का कहना है कि सीएम तो चाहते हैं कि संविदा कर्मचारियों को रेगुलर कर दिया जाए, लेकिन अधिकारी अड़ंगा लगा रहे हैं। इसीलिए ऐसा मसौदा तैयार कर दिया। गुरुजी, पंचायतकर्मी, शिक्षाकर्मी और दैनिक वेतन भोगियों को स्थाई करने और नियमित करने में कोई अड़ंगे नहीं आए। हमारे लिए यह अड़चन क्यों? डेढ़ लाख में से 55 हजार कर्मचारियों का संविलयन करना कोई बड़ी बात नहीं है।

 

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