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डाउनलोड करेंसनाउल्लाह पर कोट भलवाल जेल में एक कैदी ने जानलेवा हमला किया था
चंडीगढ़ के पीजीआई अस्पताल में दम तोड़ने वाले पाकिस्तानी कैदी सनाउल्लाह रांजे जेल में आजीवन क़ैद नहीं रहना चाहते थे और उन्होंने 14 साल पहले जेल में सुरंग बनाकर भागने की नाकाम कोशिश की थी.
पाकिस्तान से सियालकोट के रहने वाले 52 साल के सनाउल्लाह को 1994 में जम्मू और आसपास के इलाक़ों में हुए बम धमाकों के आरोप में गिरफ्तार किया गया था.
जम्मू के सतवारी चौक में 16 जुलाई 1994 को एक मेटाडोर में हुए बम धमाके में चार लोग मारे गए थे. उसी साल 20 नवंबर को नगरोटा में हुए बम धमाके में दस लोगों की मौत हुई थी.
इन धमाकों में दो दर्जन से अधिक लोग मारे गए थे और कई अन्य घायल हो गए थे. सनाउल्लाह चरमपंथी संगठन हिज्बुल मुजाहिदीन से जुड़े थे.
कई साल दूसरी जेलों में बिताने के बाद सनाउल्लाह को 1999 में कोट भलवाल जेल में लाया गया था.
दोषीअदालत ने सनाउल्लाह को दो मामलों में दोषी करार देते हुए 2009 में आजीवन कारावास का सजा सुनाई थी.
इसके अलावा उनके ख़िलाफ़ आरपीसी, पोटा और टाडा के तहत कई मामले चल रहे थे.
सनाउल्लाह को अति सुरक्षित मानी जाने वाली जम्मू की कोट भलवाल जेल में रखा गया था. इस जेल में उन कैदियों को रखा जाता है जो बड़े अपराधों में शामिल रहे हैं.
चरमपंथी संगठन जैशे मोहम्मद के संस्थापक मौलाना अजहर मसूद को भी इसी जेल में रखा गया था. मसूद और उनके दो साथियों को 1999 में कंधार विमान अपहरण कांड में यात्रियों की रिहाई के बदले छोड़ा गया था.
साजिशसनाउल्लाह ने 1999 में अन्य पाकिस्तानी कैदियों के साथ जेल में सुरंग बनाकर भागने की साजिश रची थी लेकिन जेल प्रशासन को इसकी भनक लग गई और उनकी कोशिश नाकाम हो गई. इसके बाद से पाकिस्तानी और स्थानीय कैदियों को साथ-साथ रखा जाने लगा.
सनाउल्लाह सियालकोट जिले के दालूवाली गांव के रहने वाले थे. वो पढ़े लिखे नहीं थे और अवैध रूप से भारत प्रशासित जम्मू कश्मीर में घुसने से पहले तांगा चलाकर अपने परिवार का पेट पालते थे.
उनके साले मोहम्मद शहज़ाद के मुताबिक सनाउल्लाह की पत्नी का निधन सात साल पहले हो गया था और उनके दो बेटे दस्ताने बनाने का काम करते हैं.
सनाउल्लाह बैगपाइप बजाने में माहिर थे और जम्मू कश्मीर जेल विभाग के पाइपर बैंड में शामिल थे.
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