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स्वच्छता सर्वेक्षण : भानपुर खंती को बंद किया, महापौर ने स्कूलों में बच्चों के नाखून तक काटे

3 वर्ष पहले
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भोपाल. स्वच्छता सर्वेक्षण में देश में सफाई में दूसरा स्थान बरकरार रखने की एक बड़ी वजह भानपुर खंती का बंद होना रहा। इसके लिए योजनाबद्ध तरीके से काम किया गया और इसका असर स्वच्छता सर्वे 2018 की टीम पर भी देखने को मिला। असल में, इससे शहर से निकलने वाले कचरे का निस्तारण करना आसान हो गया। 

- मेयर आलोक शर्मा ने इस बात को स्वीकार किया कि नगर निगम के सामने चुनौतियां बढ़ गईं हैं, स्वच्छता सर्वेक्षण 2018 में पैरामीटर्स बदल गईं। नंबर वन नहीं आने की कसक है, लेकिन हम आगे की तरफ उम्मीद से देख रहे हैं। नगर निगम हर पैरामीटर पर अंक हासिल करने के लिए योजनाबद्ध तरीके से तैयारी की थी और आगे भी करेगा। 
- मेयर ने कहा, जनता के सहयोग से लगातार दूसरी बार देश में सबसे साफ सुथरी राजधानी भोपाल रही। स्वच्छता सर्वेक्षण का परिणाम आते ही शहर में जश्न का माहौल बन गया। कल रात को नगर आयुक्त प्रियंका दास और महापौर आलोक शर्मा ने ढोल ढमाकों के साथ खुशियां मनाईं। 

राजा भोज सेतु पर मना जश्न 
- महापौर आलोक शर्मा, निगम आयुक्त प्रियंका दास सहित महापौर परिषद के सदस्य, पार्षद व निगम अधिकारियों की मौजूदगी में शहर के नागरिकों ने राजाभोज सेतु और महापौर निवास पर जमकर आतिशबाजी की। बता दें कि 1 जनवरी 2018 को भोपाल खुले में शौच से मुक्त (ओडीएफ) घोषित हुआ था। ओडीएफ सर्टिफिकेट के इस बार 110 अंक तय थे।

पहला स्थान न मिल पाने की कसक रहेगी 

- स्वच्छता की राह में भानपुर खंती को बंद करना एक बड़ा कदम था। हम इसमें सफल रहे और स्वच्छता सर्वे में इसका असर पड़ा। पहले मुकाबला 434 शहरों से था, लेकिन इस बार 4203 शहरों से। ऐसे में दूसरा स्थान बरकरार रखना हमारे लिए बड़ी बात रही। पहला स्थान न मिल पाने की कसक रहेगी। परंतु आगे की चुनौतियों के लिए रणनीति पर काम कर रहे हैं। जनसहयोग के बगैर तो कुछ नहीं होता। ये गौरव लोगों की वजह से ही मिला है। - आलोक शर्मा, महापौर 

 

ये किए नवाचार 
- चाचा चौधरी की कामिक्स छपवाई और बच्चों को अभियान जोड़ा, चाचा चौधरी शहर में घूमें और स्वच्छता के महत्व को बताया। 
- महापौर ने स्वच्छता की पाठशाला लगाई, खुद कई स्कूलों में गए और बच्चों के नाखून काटे।  
- डिस्काउंट कूपन जारी किया, जिन्होंने स्वच्छता में सहयोग किया उन्हें बाजार में सामान लेने में छूट मिली। 
- सूखे और गीले कचरे को रखने के लिए नीली और हरी बाल्टियां रखी गईं। लोगों को इसके लिए जागरूक किया गया। 
- चाय की चौपाल का आयोजन कर जागरूक किया, रोको-टोको अभियान, बाजारों में रात्रिकालीन सफाई व्यवस्था व धुलाई। 
- घर- घर दस्तक अभियान, कबाड़ से जुगाड़ जैसे नवाचार, स्वच्छता की पाठशाला, माय सिटी माय वाल ने नागरिकों को जोड़ा।
- स्कूलों, अस्पतालों, मैरिज गार्डन, रहवासियों, व्यापारियों, सामाजिक धार्मिंक संगठनों, धर्मगुरुओं आदि की बैठक बुलाई गई।

इन बिंदुओं मिली सेकेंड रैंक 
- डोर टू डोर कचरा कलेक्शन से लेकर चाय की चौपाल और घर-घर जाकर दी गई दस्तक ने शहर का गौरव बरकरार रखने में निभाई अहम भूमिका
- फीडबैक का व्यापक प्रचार-प्रसार किया गया। इसके लिए होर्डिंग पंपलेट के माध्यम से लोगों को सफाई रखने के लिए आग्रह किया।
- पब्लिक टॉयलेट, कम्युनिटी टॉयलेट सहित सार्वजनिक स्थानों पर जागरूकता के लिए बैनर पोस्टर लगाकर जागस्र्क किया गया।
- शहर से रोजाना डोर टू डोर कचरा कलेक्शन करने वाले कर्मियों और एनजीओ प्रतिनिधि घर-घर जाकर लोगों से स्वच्छता सर्वे की वेबसाइट या 1969 पर फोन कर स्वच्छता सर्वे में शामिल होने का आग्रह किया।
- महापौर आलोक शर्मा, आयुक्त प्रियंका दास सहित निगम अमला विभिन्न् सामाजिक, व्यापारिक, औद्योगिक, धार्मिक संगठनों, स्कूल-कॉलेज में जाकर सफाई के लिए प्रेरित किया।
- दो वैक्यूम मशीनों से आईएसबीटी के प्लेटफार्म और फर्श की सफाई के साथ ही पोंछा लगाया जाएगा। बड़ी मशीन से चौक बाजार और न्यूमार्केट एरिया की सफाई शुरू हो गई है। 
- ट्रांसफर स्टेशन बनाए गए जहां आने वाले गीले कचरे से कंपोस्ट और मीथेन गैस और बिजली बनाने का काम शुरू किया गया।
- कचरा वाहनों में दो हिस्से बनाए गए हैं, जिसमें एक तरफ गीला और दूसरी तरफ सूखा कचरा एकत्र करने की शुरुआत हुई।
- होटल, मैरिज गार्डन, पार्क आदि संस्थानों और कॉलोनियों में कुल 273 यूनिट तैयार किए गए। जहां कचरे से खाद बनाने का काम शुरू किया गया।

2018 में कैटेगरी के हिसाब से बढ़ाए अंक
म्यूनिसिपल डॉक्यूमेंटेशन - 1400
इंडेपेंडेंट ऑब्जर्वेशन - 1200
सिटीजन फीडबैक - 1400
कुल अंक - 4000

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