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सफाई कर्मचारी ने लगाए थे टांके, अब डॉक्टरों की डिपार्टमेंट इंक्वायरी खुली
भास्कर ने उठाया
था मामला...
सिविल अस्पताल के डॉक्टर्स और स्टाफ की लापरवाही का आलम यह है कि डॉक्टर्स अपना काम फोर्थ क्लास (सफाई कर्मचारी) के सहारे ही छोड़ देते हैं। ऐसे ही एक मामला सामने आया था, जिसमें डॉक्टर्स की लापरवाही के चलते एक 16 साल के लड़के पैर में इंफेक्शन हो गया था। पेर काटने तक की नौबत आ गई थी। अगर समय रहते घायल के परिवार की ओर से उसका सही इलाज न करवाया जाता तो लड़के का पैर काटना पड़ सकता था। लेकिन गनीमत यह रही कि परिवार की ओर से समय रहते लड़के को प्राइवेट अस्पताल में एडमिट करवा कर उसकी वहां पर सर्जरी करवाई, जिससे कि उसका पैर काटने से बच गया था। इस मामले की शिकायत बच्चे की मां ममता जैन की ओर से सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह और हेल्थ डिपार्टमेंट पंजाब को की गई थी। इस मामले में सीएमओ ऑफिस की ओर से मामले की जांच सिविल मेडिकल ऑफिसर मोहाली डॉ. सीके लद्दहार काे सौंपी गई है। वीरवार को मेडिकल ऑफिसर की ओर से शिकायतकर्ता ममता को अस्पताल बुलाकर उनकी पूरी बात सुनी गई। साथ ही उन्हें संबंधित डॉक्टर्स तथा स्टाफ के खिलाफ डिपार्टमेंट इंक्वायरी खोलने तथा भविष्य में ऐसी कोई लापरवाही ना होने का आश्वासन दिया गया। मेडिकल ऑफिसर की ओर से निर्देश जारी करते हुए कहा गया है कि भविष्य में सिविल अस्पताल फेज-6 का कोई भी फोर्थ क्लास कर्मचारी किसी प्रकार का कोई मेडिकल का काम नहीं करेगा। न ही किसी पेशेंट को कोई मेडिकल ट्रीटमेंट देगा। साथ ही उनकी ओर से यह भी कहा गया कि इसकी जिम्मेवारी ड्यूटी पर मौजूद संबंधित डाॅक्टर की होगी कि फोर्थ क्लास कर्मचारी ऐसा कोई काम न करे। लेकिन अगर भविष्य में ऐसा कोई काम फोर्थ क्लास कर्मचारी की ओर से किया जाता है तो साफ तौर पर उसकी जिम्मेदारी ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर की मानी जाएगी। उसके खिलाफ बनती कार्रवाई
की जाएगी।
शिकायतकर्ता ममता जैन ने शिकायत में कहा था कि 16 साल के बेटे रोहित का एक्सीडेंट 9 दिसंबर को हुआ था। सिविल हॉस्पिटल में डॉक्टर ने कहा कि पैर पर टांके लगाने हैं। लेकिन फोर्थ क्लास कर्मचारियों ने बेटे को टांके लगाए। वह भी गलत तरीके से।
ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर्स से लिया जाएगा जवाब
मेडिकल ऑफिसर की ओर से शिकायतकर्ता को आश्वासन देते हुए कहा गया कि 9 दिसंबर के दिन जिस दिन वह अपने 16 साल के बेटे को अस्पताल लेकर आए थे, उस दिन का सारा रिकॉर्ड चेक किया गया है। उसके अनुसार ड्यूटी पर मौजूद संबंधित डॉक्टर्स से इसके बारे में पूछा जाएगा और उनसे जवाब लिया जाएगा कि उनकी मौजूदगी में फोर्थ क्लास कर्मचारी ने पेशेंट के टांके क्यों लगाए। इसके अलावा जब पेशेंट के पैर में इंफेक्शन हो गया तो उस समय जिस डॉक्टर ने चेक किया उसने मरीज को सर्जरी करवाने की सलाह क्यों नहीं दी। मेडिकल ऑफिसर ने कहा कि इन सभी डॉक्टर्स को जवाब तलब कर इनसे लिखित में इसका जवाब लिया जाएगा।
भास्कर में छपी खबर।