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'इंसान' के इंसान बनने की कहानी है सेपियन्स, युवाल नोआ हरारी ने तैयार किया सोच बदलने वाला दस्तावेज

Dainik Bhaskar

Jan 14, 2019, 12:28 PM IST

सेपियन्स इंसानी इतिहास का विस्तृत विवरण है। कोई ग्रंथ नहीं है, लेकिन प्रमाणित दस्तावेज है।

Sapiens: A Brief History of Humankind by yuval noah harari

सेपियन्स...पिछले कुछ दिनों में इस एक किताब का बहुत जिक्र हुआ है। मानव इतिहास के आश्चर्यचकित कर देने वाले और चौंकाने वाले किस्सों से भरपूर ये किताब इंटरनेशनल बेस्टसेलर है। 30 से ज्यादा भाषाओं में ट्रांसलेट हो चुकी सेपियन्स को पूरी दुनिया में जितना सराहा गया है उससे कहीं ज्यादा पढ़ा गया है। येरूशलम के हिब्रू विश्वविद्यालय में प्रोफेसर डॉ युवाल नोआ हरारी ने किस्सागोई और पाठकों के मनोरंजन का पूरा ध्यान रखा है। इस किताब को पढ़कर ही आप जान पाएंगे कि बिल गेट्स सहित पूरी दुनिया आखिर इसकी दिवानी क्यूं हुई जा रही है और क्यों, फॉरेन मीडिया इसे सदी की सबसे बेहतरीन किताब मान रहा है।

सेपियन्स इंसानी इतिहास का विस्तृत विवरण है। कोई ग्रंथ नहीं है, लेकिन प्रमाणित दस्तावेज है। आप इसे और इसमें लिखे तथ्यों को नकार नहीं सकते। हालांकि मानव इतिहास को हम सबने अपने स्कूल कोर्स में जितना पढ़ा है, उससे कहीं आगे का ज्ञान इस किताब में है, जो न सिर्फ तस्वीरों, तथ्यों और तर्कों से प्रमाणित है, बल्कि आसान उदाहरणों के साथ समझने में भी मदद करती है। सेपियन्स को पढ़ने के दौरान आपको महसूस होगा कि आप वास्तविक में क्या हैं, क्यों हैं और यहां तक पहुंचने में किन-किन परिस्थितियों से गुजरना पड़ा। ये ठीक वैसा ही है जैसे आप जमीन में एक बीज बोएं और उसे अपने सामने पहले पौधा फिर पेड़ बनते देखें।

'सेपियन्स' में डॉ युवाल नोआ हरारी ने जीव-विज्ञान, मानवशास्त्र, जीवाश्म विज्ञान और अर्थशास्त्र के गहन ज्ञान के आधार पर इस रहस्य को खोजा है कि इतिहास के प्रवाह ने आख़िर कैसे हमारे मानव समाज, हमारे चारों ओर के प्राणियों और पौधों को आकार दिया है। यही नहीं, इसने हमारे व्यक्तित्व को भी कैसे प्रभावित किया है, ये भी सेपियन्स के जरिए समझा जा सकता है।

क्यों पढ़ें


करीब 100,000 साल पहले धरती पर मानव की कम से कम छह प्रजातियां बसती थीं, लेकिन आज स़िर्फ हम (होमो सेपियन्स) हैं। प्रभुत्व की इस जंग में आख़िर हमारी प्रजाति ने कैसे जीत हासिल की? हमारे भोजन खोजी पूर्वज शहरों और साम्राज्यों की स्थापना के लिए क्यों एकजुट हुए? कैसे हम ईश्वर, राष्ट्रों और मानवाधिकारों में विश्वास करने लगे? कैसे हम दौलत, किताबों और कानून में भरोसा करने लगे? और कैसे हम नौकरशाही, समय-सारणी और उपभोक्तावाद के गुलाम बन गए? आने वाले हज़ार वर्षों में हमारी दुनिया कैसी होगी? इस किताब में इन्हीं रोचक सवालों के जवाब समाहित हैं।

क्यों न पढ़ें

अगर आप मानव इतिहास को जानने और समझने की बजाय सिर्फ नई हिंदी की उलझाने वाली प्रेम कहानियों के शौकीन हैं या फिर, कविता-नज़्म और बायोग्राफी के आदी हों तो सेपियन्स आपके लिए नहीं है।

सेपियन्स में अनुवादक मदन सोनी का काम बेहतरीन है। पूरी किताब के किसी भी पन्ने को पढ़कर ये नहीं लगता कि अनुवाद है। इसके लिए वे बधाई के पात्र भी हैं। मंजुल पब्लिकेशन ने सेपियन्स को हिंदी में उपलब्ध कराया है। क्षेत्रीय भाषाओं में भी इसे लाने की तैयारी है। तकरीबन 450 पन्नों की किताब होकर भी ये कलेक्शन में रखने लायक है।


सेपियन्स : मानव जाति का संक्षिप्त इतिहास
मंजुल पब्लिकेशन हाउस,
पेज-450 तकरीबन
कीमत- 382 रुपए

सभी बुकस्टोर्स व अमेज़न पर उपलब्ध

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Sapiens: A Brief History of Humankind by yuval noah harari
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