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डाउनलोड करेंकुरुक्षेत्र. प्राचीनकाल से ही मान्यता है कि सरस्वती कुरुक्षेत्र की धरा से होकर बहती थी। आज भी इसके बहाव स्थल मौजूद हैं। पूर्व में हुई खुदाइयों में भी प्रमाणित हो चुका है कि यहां से वैदिक कालीन सरस्वती नदी बहती थी। सरस्वती को पुन:जीवित करने के प्रयासों में लगी है। अब एक बार फिर कुरुक्षेत्र में प्राचीन नदी बहने के स्पष्ट संकेत मिले हैं। विशेषज्ञ इसे सरस्वती नदी ही मान रहे हैं।
कुरुक्षेत्र के झांसा रोड पर बने सरस्वती पुल के नीचे से गुजरने वाली नदी से पूरा साल बहने वाली नदी के अवशेष मिले हैं। झांसा रोड पर नया पुल बनाने के लिए की गई खुदाई से केयू के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर रिसर्च सरस्वती नदी के निदेशक प्रो. एआर चौधरी ने शुक्रवार को रेत के सैंपल भरे। इस साढ़े पांच मीटर की खुदाई के दौरान ऊपर के तीन मीटर में मिट्टी और नीचे के ढाई मीटर में बारीक रेत मिली है। वहीं इस रेत में नदी के आठ बैड भी मिले हैं। इन आठ बैड की मिट्टी से मिली रेत के आधार पर अब केयू का सरस्वती शोध सेंटर शोध करेगा। ताकि पता लगाया जा सके कि नदी में मिली रेत किस कालखंड की है। वहीं यह भी पता लगाया जाएगा यह रेत किस पर्वत श्रृंखला से बहकर आई है। इससे नदी के बहाव और उद्गम स्थल के बारे में जानकारी मिलेगी।
बारीक रेत से पूरा साल बहने वाली नदी की संभावना
केयू के जियोलॉजी विभाग के प्रो. एआर चौधरी ने कहा कि बारीक चांदी की चमक वाली रेत से लग रहा है कि यह पूरा साल बहने वाली नदी के अवशेष हैं। उन्होंने कहा कि यह खुदाई बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। इस स्थान से लिए गए अवशेषों को सरस्वती नदी के कालखंड से मिलाया जाएगा। ताकि पता चल सके कि यह सरस्वती नदी के अवशेष हैं या किसी और नदी के। आज भी इस पुल के नीचे से सरस्वती नदी के बहने की मान्यता है। लेकिन शोध की रिपोर्ट आने के बाद यह मान्यता और पुख्ता होगी।
सैंपल का देहरादून व केयू लैब में परीक्षण
प्रो. चौधरी ने बताया कि देहरादून के वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी में इस रेत के सैंपल को भेजकर कालखंड पता किया जाएगा। इसके अलावा केयू की लैब में रेत से नदी किस वेग से बहती थी, किस पर्वत श्रृंखला की रेत है। प्रो. चौधरी ने कहा कि कुरुक्षेत्रर में यह सरस्वती नदी को लेकर बहुत बड़ी खोज साबित होगी। उन्होंने बताया कि इस रेत की रिपोर्ट आने में पांच से छह माह का समय लगेगा।
सेंटर के लिए संसाधन मिलने पर बेहतर होगा शोध
प्रो. चौधरी ने कहा कि प्रदेश सरकार की ओर से केयू के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर रिसर्च सरस्वती नदी के लिए संसाधन उपलब्ध करवाए जाने पर शोधकार्य और बेहतर तरीके से हो पाएगा। उन्होंने कहा कि खुदाई से मिले अवशेषों की जांच के लिए सभी उपकरणों की लैब तैयार होने के बाद जांच परिणाम में तेजी आएगी। प्रो. चौधरी ने कहा कि सेंटर का उद्देश्य है कि सरस्वती नदी के बहाव स्थल से जुड़े तथ्यों को प्रमाणित किया जाए।
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