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एसबीआई पहली बार भर्ती परीक्षा के बाद तय करेगा कॉपी जांचने के नियम, पीओ एग्जाम में हाईकोर्ट की फटकार के बाद किया बदलाव

3 वर्ष पहले
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नई दिल्ली.  दिल्ली हाईकोर्ट में प्रोबेशनरी ऑफिसर (पीओ) की परीक्षा में फंसने के बाद एसबीआई ने अब अलग कदम उठाया है। बैंक अब स्पेशलिस्ट ऑफिसर (एसओ) की परीक्षा पहले लेगा। इसके बाद परीक्षा मूल्यांकन के नियम तय किए जाएंगे। 19 मार्च 2018 के नोटिफिकेशन के अनुसार, एसओ की परीक्षा के लिए ‘वेव्ड ऑफ’ का नियम लगाया गया है। एसबीआई अधिकारी ने बताया कि ‘वेव्ड ऑफ’ का मतलब है कि फॉर्म भरने के दौरान परीक्षार्थी को पता नहीं होगा कि परीक्षा में क्वालिफाइंग नंबर का नियम होगा या नहीं। एसबीआई परीक्षा पूरी होने के बाद तय करेगा कि सिलेक्शन में हर विषय में मिनिमम क्वालिफाइंग नंबर का क्राइटेरिया रखना है या नहीं। क्वालिफाइंग नंबर का नियम लगाने पर अगर तय सीटों के हिसाब एसबीआई को पर्याप्त उम्मीदवार मिल जाते हैं तो यह नियम लग सकता है। अगर पर्याप्त उम्मीदवार नहीं मिलते हैं तो सभी विषयों के कुल नंबर के आधार पर चयन होगा, तब क्वालिफाइंग नंबर का नियम हट सकता है।

 

विज्ञापन के बाद नियम बदला

6 फरवरी 2017 को एसबीआई ने विज्ञापन निकाला। इसमें बैंक ने चारों विषयों में न्यूनतम कटऑफ की बात कही थी। मगर ऐसे बच्चे भी सिलेक्ट हो गए जिनके गणित में जीरो नंबर थे। इसके बाद दो दर्जन याचिकाकर्ता दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचे। एक आरटीआई से यह भी पता चला कि ऐसे 67 लोग चुने गए जिनके किसी न किसी विषय में जीरो नंबर आए। बाद में एसबीआई ने हाईकोर्ट को बताया कि बाद में मिनिमम क्वालिफाइंग मार्क्स का नियम हटा दिया गया। इस पर हाईकोर्ट ने कहा था कि खेल शुरू होने के बाद नियम नहीं बदल सकते। अगली सुनवाई 16 अप्रैल को है।

 

नोटिफिकेशन में ही नियम बदला
19 जनवरी 2018 को एसबीआई ने क्लर्क की परीक्षा के लिए एक नोटिफिकेशन निकाला। इसमें लिखा था कि गणित, अंग्रेजी और रीजनिंग विषय में अलग-अलग क्वालिफाइंग नंबरों की जरूरत नहीं है। कुल नंबरों के आधार पर उम्मीवार का चयन किया जाएगा। यानी किसी विषय में जीरो नंबर आएं तब भी कुल नंबरों के आधार पर चयन हो सकता है। फॉर्म भरने की आखिरी तारीख 10 फरवरी थी। दैनिक भास्कर में 20 फरवरी को खबर छपने के बाद यह मामला सार्वजनिक हो गया। इसके एक हफ्ते बाद 28 फरवरी को एसबीआई ने क्लर्क परीक्षा की तिथि जून तक के लिए बढ़ा दी। 

 

ये ऐसा जैसे...मैदान में किसी को न पता हो कि बल्लेबाज आउट कैसे होगा 

सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता और हाईकोर्ट में छात्रों की ओर से बैंक पीओ का केस लड़ रहे जयवीर शेरगिल ने बताया कि एसबीआई एसओ परीक्षा में ‘वेव्ड ऑफ’ के नियम से स्पष्ट नहीं होता है कि आखिर कौन से नियम लागू होने वाले हैं। यह कुछ ऐसा है जैसे क्रिकेट के मैदान में खेलने उतर तो गए लेकिन गेंदबाज और बल्लेबाज को भी नहीं पता कि आउट कैसे होगा। अब अंपायर के ऊपर निर्भर करता है कि आउट होने पर बल्लेबाज को वह आउट दे या न दे।

 

दूसरे बैंकों की परीक्षा में लागू है मिनिमम मार्क्स नियम
एसबीआई के अलावा अन्य बैंकों की परीक्षा का जिम्मा आईबीपीएस के पास होता है। आईबीपीएस ने पीओ का 16 अगस्त, क्लर्क का 12 सितंबर और एसओ का 7 नवंबर को नोटिफिकेशन निकाला था। इन तीनों परीक्षाओं में हर विषय में मिनिमम क्वालिफाइंग मार्क्स का नियम था।

 

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