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सेहत के सवाल: क्यों होती है सिर में खुजली, कान में दर्द, मुंह से दुर्गंध और अधिक पसीना आने की समस्या

एक्सपर्ट से जानते हैं सिर, कान, मुंह से जुड़ी समस्याओं के जवाब...

Danik Bhaskar | Jul 11, 2018, 07:24 PM IST

हेल्थ डेस्क. सिर में खुजली की समस्या, कान में अक्सर दर्द रहना, रोजाना ब्रश के बाद मुंह से दुर्गंध आना और अधिक पसीना आने की समस्या ज्यादातर लोगों में देखने को मिलती है। छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखकर इसे दूर किया जा सकता है। एक्सपर्ट से जानते हैं इससे जुड़े सवालों के जवाब....

एक्सपर्ट पैनल

  • डॉ. प्रशांत शेट्टी, एक्जिक्यूटिव डायरेक्टर, बायोकैमिस्ट्री, आईजेनेटिक डायग्नोस्टिक्स
  • डॉ. सुमित गुप्ता, त्वचा रोग विशेषज्ञ, स्कीनोवेशन क्लीनिक, नई दिल्ली
  • डॉ. भूमिका मदान, दंत चिकित्सक, आकाश हेल्थकेयर सुपर स्पेशियालिटी हॉस्पिटल
  • डॉ. अनिल दशोरे, चर्मरोग विशेषज्ञ

सवाल : अक्सर सिर में खुजली होने लगती है व बारिश में यह समस्या अधिक बढ़ जाती है। कोई उपाय बताएं। निहारिका शर्मा, सूरत, गुजरात।

  • जवाब: वातावरण में अधिक नमी के कारण शरीर की स्वेद ग्रंथियां और तेल बनाने वाली ग्रंथियां अधिक काम करने लगती हैं। इसके कारण बालों की सतह पर ज़्यादा नमी हो जाती है जिससे जड़ों में बैक्टीरिया, कीटाणु और फंगस पनपने की आशंका बढ़ जाती है। इससे कई बार त्वचा निकलना, डैंड्रफ होना या खुजली होने जैसी समस्या हो सकती है।
  • बारिश के मौसम में त्वचा को ज़्यादा देखभाल की ज़रूरत होती है। सिर की त्वचा में लाली, खुजली, दाने आदि को नज़रअंदाज़ न करें। बालों की जड़ में नमी के कारण चेहरे पर मुहांसे भी उभर सकते हैं। रोज़ाना बाल धोने पर भी चिपचिपापन बना रहे या खुजली हो तो इसका अर्थ है कि स्वेद ग्रंथियां अधिक कार्य कर रही हैं। इससे बचने के लिए इस मौसम में कम से कम तेल का इस्तेमाल करें।
  • जड़ों की सफ़ाई के लिए शैम्पू का इस्तेमाल करें। अगर सामान्यत: हफ़्ते में दो बार शैम्पू करते हैं तो इस मौसम में तीन या चार बार करें। रोज़ाना भी कर सकते हैं। झाग वाले शैम्पू जिनकी क्लींजिंग प्रॉपर्टी ज़्यादा हो उनका उपयोग करें।
  • बैक्टीरियल या फंगल इंफेक्शन होने पर एंटी-फंगल या एंटी-बैक्टीरियल शैम्पू का इस्तेमाल करें। लम्बे बालों को रोज़ाना नहीं, तो कम से कम हफ़्ते में तीन बार धोएं। कम से कम तेल लगाएं। बाल अगर रूखे लगें तो कंडीशनर का इस्तेमाल करें। बारिश में सिर भीग जाए, तो घर आकर सिर को अच्छी तरह से धोएं। गीले बाल न बांधें।

सवाल : कुछ दिनों से कान में दर्द है। रह-रह कर लगता है कि कान बंद हो रहा है। इसके क्या कारण हो सकते हैं। • सौम्या वैष्णव, सूरत, गुजरात।

  • जवाब: बारिश के मौसम में नमी ज्यादा होती है, जिसकी वजह से कान में फंगल इंफेक्शन की आशंका बढ़ जाती है। कान में खुजली भी हो सकती है। कई बार लोग किसी भी नुकीली चीज़ से कान साफ़ करने लगते हैं जो कि बेहद खतरनाक है, इससे भी इंफेक्शन हो सकता है।
  • गले में किसी संक्रमण के कारण भी कान दर्द हो सकता है, क्योंकि नाक, कान और गला आपस में जुड़े हुए हैं। इंफेक्शन की वजह से ठीक से सुनाई न देना, कर्कश आवाज आना, दर्द होना जैसी तकलीफ होने लगती हैं। सर्दी-जुकाम भी एक कारण हो सकता है। इसे घरेलू नुस्खे से ठीक करने की कोशिश न करें। सबसे पहले अपने चिकित्सक से सलाह लें। सही तरह की जांच के बाद ही बताया जा सकता है कि कान में किस वजह से दर्द है।
  • कभी भी मैल जम जाने पर भी कम सुनाई देना या कान के भीतरी भाग में दर्द हो सकता है। बारिश में कान का विशेष तौर पर ख्याल रखें। कान में पानी जमा होने से इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। कान में पानी जाने पर सूखा कपड़ा लेकर सफ़ाई करें। ईयरबड्स, माचिस की तीली, सेफ्टी पिन आदि का उपयोग बिल्कुल न करें।
  • पिन से ईयरड्रम में छेद भी हो सकता हैं जिसे ठीक करवाने के लिए सर्जरी तक की नौबत आ सकती है। कान को कभी गीला न रहने दें। सूखे कपड़े से यथासंभव सफ़ाई करें। ईयरफोन के इस्तेमाल में सावधानी बरतें, क्योंकि कई बार धूल उन पर चिपकी रहती है और हम उन्हें सीधे कान में लगा लेते हैं।

सवाल : मैं अधिक पानी पीता हूं फिर भी मुंह से दुर्गंध आती है। इसका कारण क्या है? संभव पटवर्धन, ठाणे, महाराष्ट्र।

  • जवाब - मुंह से दुर्गंध आना सामान्य बात है लेकिन इसे नज़रअंदाज़ करना हानिकारक साबित हो सकता है। इसके कई कारण हो सकते हैं। पहला कारण है दांतों के बीच खाना फंसना। नियमित ब्रश करने और पानी पीने के बाद भी दांतों में खाना जमा हुआ रह सकता है। दूसरा कारण है कि रोज़ाना जीभ को साफ़ नहीं करना।
  • मुंह से दुर्गंध आना पायरिया का भी लक्षण है। पायरिया में खाना दांतों पर चिपककर कठोर हो जाता है जिसके बाद मसूढ़े और दांत धीरे-धीरे गलने लगते हैं या अपनी जगह छोड़ने लगते हैं, जिससे दांत कमज़ोर होकर हिलने लगते हैं। इसलिए अगर दुर्गंध के साथ दांत हिल रहा हो, मसूढ़ों से ख़ून आए तो चेकअप करवा लें। कई बार दांतों में कीड़े लगने के कारण भी यह समस्या हो सकती है।
  • सामान्य तौर पर हर छह महीने में डेंटिस्ट के पास चेकअप के लिए ज़रूर जाएं। अगर कोई दिक़्क़त न भी हो तो भी चेकअप करवाएं। कई बार किसी भी तरह के संक्रमण के लक्षण स्पष्ट दिखाई नहीं देते हैं। इसके अलावा दुर्गंध पेट से जुड़ी किसी तकलीफ़ के कारण भी हो सकती है। पहले डेंटिस्ट से चेकअप करवा लें, अगर कोई कारण सामने न आए तो फिर जनरल फिजिशियन के पास जाएं। एहतियातन दिन में दो बार ब्रश करें, कुछ भी खाएं तो कुल्ला करें।
  • इसके अलावा फ्लॉस का उपयोग करें। नियमित रूप से जांच करवाएं। टूथपिक का इस्तेमाल न करें क्योंकि कई बार टूथपिक के नुकीले सिरे से मसूढ़ों में इंफेक्शन हो जाता है। अल्कोहल फ्री माउथवॉश से दिन में दो बार कुल्ला करें। पानी अधिक पिएं, साथ ही हर भोजन के बाद कुल्ला ज़रूर करें ताकि भोजन के कण दांतों में न फंसें।

सवाल : मेरी उम्र 26 साल है। अधिक शारीरिक श्रम न करने के बावजूद मुझे बेहद अधिक पसीना आता है। क्या यह किसी बीमारी का सूचक है? समीरा कौशिक, चंडीगढ़।

  • उत्तर : पसीना आना हमारे शरीर की एक बिल्कुल सामान्य प्रक्रिया है। इससे शरीर का तापमान नियंत्रित होता है। मसलन बुखार में पसीना आता है जिससे शरीर का तापमान नियंत्रण में रहता है। शरीर में मौजूद ऊष्मा के आदान-प्रदान के लिए पसीना निकलता है, लेकिन कभी-कभी पसीना अधिक आना मुश्किलें खड़ी कर देता है। कारण यह है कि पसीने को नियंत्रित करने वाली ग्रंथि अति सक्रिय हो जाती है। उपचार के लिए कई बार छोटा सा आॅपरेशन करने की भी ज़रूरत पड़ जाती है।
  • अधिक पसीने के लिए कोई उपचार पद्धति नहीं है लेकिन एहतियात के तौर पर दो बार नहाएं और टैल्कम पाउडर का इस्तेमाल करें। पसीना अधिक आने की वजह से बगल में तथा जोड़ों के भीतर फंगल इंफेक्शन भी हो सकता है। यह मुख्यत: बारिश अौर गर्मी के मौसम में होता है जिसे टीनिया कुरसिस कहते हैं।
  • लड़कों के मुक़ाबले लड़कियों को अधिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है, क्योंकि अधिक पसीना आने के कारण बालों में नमी बनी रह सकती है जिससे कई तरह की त्वचा संबंधित समस्याएं सिर उठा सकती हैं। इससे बचने के लिए रोज़ाना सिर धाेना ज़रूरी है। बालों को लगातार एंटी-डैंड्रफ शैंपू से साफ़ करें, नहीं तो इसमें बैक्टीरियल फंगल इंफेक्शन होने के आसार होते हैं। हालांकि पसीना आना पूर्णत: प्राकृतिक क्रिया है लेकिन कई बार तनाव के कारण भी अधिक पसीना आ सकता है। मोटापे में बगल और जांघ में घर्षण के कारण भी फंगल इंफेक्शन हो सकता है।