पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

सिम्स की 400 भर्तियों में घोटाला, जांच करने पहुंची टीम को थैला भर मिले सबूत

3 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक

बिलासपुर.   सिम्स में करीब छह साल पहले वर्ष 2012-13 में बड़े पैमाने पर हुए फर्जी भर्ती मामले की जांच के लिए सोमवार को स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम अस्पताल पहुंची। लोकायुक्त के निर्देश पर बनी इस टीम के मेंबरों ने सोमवार को सुबह साढ़े 11 बजे शिकायतकर्ता संजीव कुमार पांडल को बुलवाया। डीन दफ्तर के किनारे बने एक चैंबर में चार सदस्यीय टीम ने मामले से जुड़ी जानकारी ली।

 

शिकायतकर्ता संजीव से पूछा गया कि उनके पास यहां हुई गड़बड़ी के क्या सबूत हैं? संजीव ने उन्हें थैला भर दस्तावेजों के सबूत दिखाए। और पूछा कि क्या यह सब देखने के बाद भर्ती घोटाले के जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी। तब एसआईटी ने कहा कि यदि गलत हुआ है तो इसकी रिपोर्ट सरकार को भेजी जाएगी। वहां से कार्रवाई तय होगी।

 

इसके अलावा टीम के मेंबरों ने कुछ डॉक्टर और दूसरे कर्मचारियों से पूछताछ की। कुछ लोगों को रायपुर आने की बात भी कही गई है। बताया जा रहा है कि एसआईटी मेंबरों को गड़बड़ी के कुछ अहम् सबूत मिले हैं। वे इसकी जांच करने ही बिलासपुर पहुंचे थे। सिम्स के डॉक्टरों से बंद कमरे में हुई पूछताछ कोई बताने को तैयार नहीं है। प्रभारी डीन डॉक्टर रमणेश मूर्ति इसे सामान्य जांच बता रहे हैं। उनका कहना है कि इससे पहले भी भर्ती से संबंधित मामले में पूछताछ हो चुकी है। लोकायोग के निर्देश पर कलेक्टर ने अपनी रिपोर्ट सरकार को भेज दी है। उन्होंने बताया कि कलेक्टर ने मामले में जांच के बाद किसी भी तरह से अभिमत देने से इनकार कर दिया है। इसलिए किसी गड़बड़ी जैसी कोई बात नहीं है। प्रभारी डीन ने ये भी कहा कि एसआईटी को उनके मांगे गए सारे साक्ष्य उपलब्ध कराए जाएंगे। इसमें किसी तरह की कोई लापरवाही नहीं बरती जाएगी।

 

जांच चल रही स्वतंत्र रूप से

सिम्स प्रभारी डीन सिम्स डॉक्टर रमणेश मूर्ति ने बताया कि सिम्स में तीन साल पहले भर्ती में हुए अनियमितता की जांच करने के लिए एसआईटी की टीम आई है। टीम स्वतंत्र रूप से जांच कर रही है। सभी को कक्ष आवंटित कर दिया गया है। इसकी एक जांच पहले हो चुकी है। कलेक्टर ने अभिमत देने से इनकार कर दिया है। आगे नया जांच दल अपना काम कर रहा है। 

खबरें और भी हैं...